इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली के कैंपस में 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार ने आत्महत्या कर ली थी. बताया गया कि छात्र ने घटना से एक दिन पहले अपनी मां से बात करते हुए कहा था--'मैं बेकार हूं. टैलेंट के बावजूद कुछ नहीं कर पा रहा.' अब बताया गया है कि मौत से पांच दिन पहले ऋषिकेश को एक जॉब ऑफर मिला था.
जान देने से 5 दिन पहले IIT स्टूडेंट ऋषिकेश को इस कंपनी से मिला था परमानेंट जॉब ऑफर
IIT student Rishikesh suicide: ऋषिकेश IIT में MSc फिजिक्स प्रोग्राम के छात्र थे. एक बयान में इंस्टीट्यूट ने कहा कि ऋषिकेश कुछ समय से मेंटल हेल्थ इशूज का सामना कर रहे थे. उनका हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. उन्होंने दो सेमेस्टर भी छोड़ दिए थे. उनकी मां और भाई ने भी बताया कि मृतक को सुसाइडल थॉट्स आते थे.

ऋषिकेश IIT में MSc फिजिक्स प्रोग्राम के छात्र थे. एक बयान में इंस्टीट्यूट ने कहा कि ऋषिकेश कुछ समय से मेंटल हेल्थ इशूज का सामना कर रहे थे. उनका हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. उन्होंने दो सेमेस्टर भी छोड़ दिए थे. उनकी मां और भाई ने भी बताया कि मृतक को सुसाइडल थॉट्स आते थे.
2025 में IIT में लिया था मृतक ने दाखिलाऋषिकेश की मां आशा पोद्दार उनके साथ साउथ दिल्ली के कटवारिया सराय में रह रही थीं. NDTV से बात करते हुए उन्होंने कहा,
"वह काफी रो रहा था. कह रहा था, 'मम्मी, मैं बहुत दुखी हूं. मुझे सुसाइड करने का भी डर लग रहा है. मैं ऐसा भी नहीं कर पाऊंगा. मैं बेकार हूं, किसी काम का नहीं हूं. टैलेंट होने के बावजूद मैं इस दुनिया में कुछ भी हासिल नहीं कर पा रहा हूं. जरूर पिछले जन्म की कोई कमी होगी जो मुझे इतनी सफलता और टैलेंट के बाद भी कुछ भी हासिल करने से रोक रही है.
मुझमें कोई भी कॉम्पिटिटिव एग्जाम पास करने के लिए काफी टैलेंट है. फिर भी मेरी पढ़ाई में रुकावटें आती रहती हैं. एक के बाद एक प्रॉब्लम आती रहती हैं. हमेशा कुछ न कुछ होता रहता है, जिससे मेरी पढ़ाई रुक जाती है."
ऋषिकेश का परिवार बिहार का रहने वाला है. उन्होंने IIT में दाखिला लेने से पहले NIT राउरकेला में BTech में एडमिशन लिया. मगर 2019 में किसी कारण बीच में ही कोर्स छोड़ दिया. फिर पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी से BSc पूरी की और IIT JAM एग्जाम में ऑल इंडिया 40वीं रैंक हासिल की. 2025 में IIT में MSc फिजिक्स प्रोग्राम में एडमिशन लिया.
अपनी पढ़ाई के साथ उन्होंने कई साल साइंस और मैथ्स पढ़ाया. पहले एक फ्रीलांस एजुकेटर के तौर पर और बाद में पटना के एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में. उनके परिवार का कहना है कि मौत से पांच दिन पहले उन्हें जोधपुर में अनएकेडमी में परमानेंट फैकल्टी की पोजीशन का ऑफर मिला था.
लेकिन वह कहीं न कहीं परेशान चल रहे थे. NDTV से बात करते हुए ऋषिकेश के भाई अभिषेक कुमार ने बताया,
"वह मम्मी से कह रहा था कि 'मुझे सुसाइड के ख्याल आ रहे हैं'. हमने इस बारे में एक डॉक्टर से भी बात की. वह कहता रहा, 'मम्मी, मेरी जिंदगी बेकार है. मैं अब और जीना नहीं चाहता. उसे लग रहा था कि उसकी जिंदगी खत्म हो गई है. वह IIT में रहना भी नहीं चाहता था. सेमेस्टर से नाम वापस लेने के बावजूद वह बहुत ज्यादा स्ट्रेस में था. वह हर दिन कहता था कि मम्मी, चलो जल्दी से पटना चलते हैं. घर चलते है'.”
ये भी पढ़ें: बारिश में गुरुग्राम की बेहाली पर बोले BJP सांसद, ‘2047 तक इंतजार कीजिए, सब ठीक हो जाएगा’
मृतक के भाई ने यह भी बताया कि वो इस बात से भी दुखी थे कि ऋषिकेश को हॉस्टल का कमरा नहीं मिल रहा था.
वीडियो: भारत और चीन Border विवाद पर Doval और Wang Yi की बंद कमरे में क्या बात हुई?













