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नेपाल में बाढ़ और लैंडस्लाइड ने फिर मचाई तबाही, 24 की मौत, वीडियो में दिखी बर्बादी

नेपाल में सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. जाजरकोट, म्याग्दी और बागलुंग जैसे इलाकों में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से भी निकाला गया है. आपदा के कारण नेपाल में बिजली संकट भी बढ़ गया है.

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नेपाल में बाढ़ के कारण पानी में डूबे घर. (Courtesy: ITG)

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  • नेपाल में 24 सितंबर से लगातार भारी बारिश के कारण बाढ़ और लैंडस्लाइड से कम से कम 24 लोगों की मौत हो चुकी है और कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है।
  • अगस्त में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के बाद देश अभी पूरी तरह उबर नहीं पाया था, जिससे सितंबर में आई नई भारी बारिश ने संकट को और बढ़ा दिया।
  • नेपाल में बाढ़ के कारण कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं और प्रशासन ने नदी किनारे रहने वालों को अलर्ट रहने को कहा है, साथ ही राहत और बचाव अभियान जारी है।

नेपाल 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ से अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि देश में फिर बाढ़ और लैंडस्लाइड ने भारी तबाही मचा दी है. 24 सितंबर से लगातार हो रही भारी बारिश ने नेपाल के कई हिस्सों में हालात बिगाड़ दिए हैं. बाढ़, लैंडस्लाइड और भारी बारिश से अब तक कम से कम 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 लोग लापता हैं. 5 लोग घायल बताए गए हैं. करीब 3 हजार लोगों को बाढ़ और लैंडस्लाइड के खतरे वाले इलाकों से निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है.

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सबसे ज्यादा असर पश्चिमी और मध्य नेपाल के कई जिलों में देखने को मिला है. बागलुंग, म्याग्दी, मनांग, पाल्पा, पर्वत, नवलपरासी और चितवन समेत कई इलाके प्रभावित हुए हैं. गंडकी प्रदेश में ही बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है. बागलुंग में 10, म्याग्दी में 6 और मनांग में 2 लोगों की मौत की रिपोर्ट है. वहीं पाल्पा में भी लैंडस्लाइड से लोगों की जान गई है. बागलुंग में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत लैंडस्लाइड में घर दबने से हुई.

घर, पुल और सड़कें सब तबाह

बाढ़ और लैंडस्लाइड की वजह से कई घर, पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं. कई जगह हाईवे और लोकल रोड बंद हैं. काली गंडकी नदी के उफान ने भारी नुकसान पहुंचाया है. पर्वत जिले की एक बस्ती में करीब 80 घरों के बह जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है.

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अब सबसे बड़ी चिंता नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर

चितवन के देवघाट में नारायणी नदी का जलस्तर 27 सितंबर को 11.94 मीटर तक पहुंच गया. ये 1963 के बाद अब तक का सबसे ऊंचा जलस्तर है. यहां 9 मीटर को खतरे का स्तर माना जाता है. यानी नदी खतरे के निशान से करीब 3 मीटर ऊपर पहुंच गई. हालांकि बाद में जलस्तर थोड़ा नीचे आया, लेकिन खतरे के निशान से काफी ऊपर बना रहा.

काली गंडकी नदी के अलावा कई दूसरी नदियों और सहायक नदियों में भी जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंचा है. प्रशासन ने नदी किनारे और बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को अलर्ट रहने को कहा है. वहीं चितवन जाने वाले कई रास्तों पर लैंडस्लाइड की वजह से आवाजाही प्रभावित है.

नेपाल में सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. जाजरकोट, म्याग्दी और बागलुंग जैसे इलाकों में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से भी निकाला गया है. लेकिन लगातार बारिश, लैंडस्लाइड और खराब सड़क कनेक्टिविटी की वजह से राहत और बचाव के काम में मुश्किलें आ रही हैं.

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नेपाल में बिजली संकट

बाढ़ का असर नेपाल के हाइड्रोपावर सेक्टर पर भी पड़ा है. कई पावर प्रोजेक्ट्स में इलेक्ट्रि‍स‍िटी प्रोडक्शन रोकना पड़ा है. इनमें 140 मेगावाट का कालीगंडकी, 25 मेगावाट का अपर मादी, 44 मेगावाट का सुपर मादी, 20 मेगावाट का नारजुंग मादी और 40 मेगावाट का सेती रिवर प्रोजेक्ट शामिल हैं. कालीगंडकी कॉरिडोर की 220 KV ट्रांसमिशन लाइन के टावर भी डैमेज हुए हैं, जिससे करीब 200 मेगावाट इलेक्ट्र‍िस‍िटी प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है.

म्याग्दी में 40 मेगावाट के राहुघाट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी बाढ़ से नुकसान पहुंचा है. खास बात ये है कि ये प्रोजेक्ट हाल ही में नेपाल के नेशनल ग्रिड से जुड़ा था. बाढ़ में प्रोजेक्ट के स्ट्रक्चर और ट्रांसमिशन लाइन के टावर क्षतिग्रस्त हुए हैं.

बाढ़ और बारिश का असर पहाड़ी इलाकों में पर्वतारोहियों पर भी पड़ा है. मनांग के हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप के पास हिमस्खलन के बाद दो शव बरामद किए गए हैं. उनकी पहचान की जा रही है.

अब जरा इस पूरी आपदा को पिछले महीने की तबाही से जोड़कर समझिए.

26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ में नेपाल में कम से कम 1,453 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,285 लोग अब भी लापता हैं. यानी उस आपदा का घाव अभी भरा भी नहीं था और नेपाल को एक और बाढ़-लैंडस्लाइड की मार झेलनी पड़ रही है.

भारत के लिए खतरा

इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है. नेपाल से निकलने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ने से भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है. हाल की बारिश के दौरान गंडक, कोसी समेत कई नदियों में जलस्तर बढ़ा है.

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भारत में भी कई र‍िवर मॉन‍िटर‍िंग सेंटर्स पर वाटर लेवल, खतरे के न‍िशान पर दर्ज किया गया है. फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है और मौसम पर लगातार नजर रखी जा रही है. आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर में बदलाव पर खास नजर रहेगी.

वीडियो: नेपाल बाढ़ के बाद हजारों परिवारों के सामने नई परेशानी, शव नहीं मिले तो मौत कैसे साबित करें?

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