SIR प्रक्रिया में ERO (Electoral Registration Officers) की ‘शक्ति’ कम होने का दावा महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोकलिंगम की एक चिट्ठी से और पुख्ता हो गया है. चुनाव आयुक्तों विवेक जोशी और एसएस संधू ने भी इसे लेकर चिंता जताई थी.
SIR में और कितनी खामियां? महाराष्ट्र के CEO ने पूरी लिस्ट भेज दी
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने 24 सितंबर को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर ECINet में बदलाव की मांग की, ताकि ERO अपने कानूनी अधिकारों के मुताबिक फैसले ले सकें.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते 24 सितंबर को एस चोकलिंगम ने चुनाव आयोग के अधिकारियों को एक चिट्ठी लिखी थी. इसमें उन्होंने ECINet सॉफ्टवेयर में कई कमियां बताईं. चोकलिंगम की सबसे बड़ी आपत्ति इस पर थी कि सरकारी दस्तावेजों और अदालत के फैसलों के मुताबिक ERO के पास कुछ फैसले लेने का अधिकार है, लेकिन ECINet सॉफ्टवेयर में उन फैसलों को लागू करने के लिए कोई बटन या विकल्प नहीं दिया गया है. यानी अधिकार तो मौजूद हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर उन्हें इस्तेमाल नहीं करने दे रहा है.
इसके अलावा, अगर ERO किसी फैसले को पलटना चाहता है या किसी मामले पर दोबारा विचार करना चाहता है तो सॉफ्टवेयर में इसकी व्यवस्था भी नहीं है, जो होनी चाहिए. अभी जो व्यवस्था है उसके तहत ECINet में ERO के पास सिर्फ किसी नाम को जोड़ने या हटाने का ऑप्शन है. चोकलिंगम का कहना है कि इसमें फैसले को वापस लेने या उसके खिलाफ अपील की प्रक्रिया का विकल्प भी होना चाहिए.
रिपोर्ट के मुताबिक चोकलिंगम ने ये ये चिट्ठी चुनाव आयोग के सीनियर उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग, DG (IT) सीमा खन्ना, पवन दीवान और एके पाठक को लिखी थी. इससे ठीक एक दिन पहले अखबार की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव को चिट्ठी लिखकर वोटर लिस्ट डेटाबेस के केंद्रीकरण (सेंट्रलाइज) पर चिंता जताई थी. उन्होंने इस चिट्ठी में ये भी कहा था कि ECINet सॉफ्टवेयर जमीनी स्तर पर वोटर लिस्ट तैयार करने और उसे फाइनल टच देने में ERO की शक्तियों को सीमित कर रहा है.
क्या बदलाव चाहते हैं चोकलिंगम?चोकलिंगम ने भी करीब-करीब यही बात कही है. इसे लेकर उन्होंने अधिकारियों से ECINet सॉफ्टवेयर में कुछ बदलाव करने को कहा है. ये बदलाव क्या हैं, चलिए विस्तार से जानते हैं.
1. अपनी चिट्ठी में चोकलिंगम ने बताया कि ERO के पास यह तय करने का अधिकार है कि किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से उसके सामने पेश होने की जरूरत है या नहीं. लेकिन ECINet में किसी व्यक्ति को सुनवाई से छूट देने का विकल्प नहीं है. इसलिए सॉफ्टवेयर में यह विकल्प जोड़ा जाना चाहिए.
2. दूसरी दिक्कत जो चोकलिंगम ने बताई, वो ये है कि नोटिस के पीछे 13 डॉक्युमेंट्स की जो सूची दी गई है वह सिर्फ उदाहरण के तौर पर है. यह सूची पूरी और अंतिम नहीं है. इसलिए 14वें विकल्प के तौर पर 'Other Equivalent Document' देने का विकल्प भी सॉफ्टवेयर में होना चाहिए. चोकलिंगम ने कहा कि ट्रांसजेंडर लोगों, सेक्स वर्कर्स या बेघर लोगों के पास लिस्ट में बताए गए 13 दस्तावेजों में से कोई दस्तावेज नहीं भी हो सकता है. ऐसे में उनके लिए ‘अन्य डॉक्युमेंट्स’ का ऑप्शन भी दिया जाना चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि चुनाव आयोग के Electoral Roll Manual में भी इस बात का प्रावधान है.
3. चोकलिंगम ने कहा कि ERO को सभी तरह की लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी का निपटारा करने का अधिकार होना चाहिए. पहले BLO लोगों के बयान और पंचनामा आदि जुटाते थे. इसके आधार पर ERO नाम से जुड़ी लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामलों में फैसला ले सकते थे, लेकिन ECINet ने ERO से ये शक्ति छीन ली है.
4. एक और मुद्दा चुनाव अधिकारी ने उठाया कि हर लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामले में पिछले SIR का रिकॉर्ड अपलोड करना जरूरी किया गया है. चोकलिंगम ने कहा कि ये अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक होना चाहिए. इसे सिर्फ उन मामलों में मांगा जाना चाहिए, जहां पिछले SIR के रिकॉर्ड में वास्तव में कोई गड़बड़ी हो या सिस्टम की गलती के कारण रिकॉर्ड मैच नहीं कर रहा हो.
5. चोकलिंगम ने बताया कि ERO के मन में SIR की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल हैं. सिर्फ मौखिक निर्देश देना पर्याप्त नहीं है. इसलिए चुनाव आयोग को FAQ यानी ‘अक्सर पूछे जाने वाले सवालों’ की एक सूची जारी करनी चाहिए. इसमें नोटिस, दस्तावेज जमा करने, सुनवाई और मामले के निपटारे की पूरी प्रक्रिया को साफ किया जाना चाहिए. ताकि मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों दोनों को प्रक्रिया समझने में आसानी हो.
ये भी पढ़ेंः धर्म के हिसाब से आबादी का डेटा क्यों मांग रही मोदी सरकार? रिकॉर्ड जुटाने में राज्यों के छूट रहे पसीने
क्या है ECInet?22 जनवरी को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने ECINet नाम का एक सॉफ्टवेयर लॉन्च किया था. इसके जरिए चुनाव आयोग के 40 से ज्यादा ऐप और पोर्टल को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया गया था. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने इसे लॉन्च करते हुए कहा था कि इसे कानून के मुताबिक तैयार किया गया है. आयोग की आईटी महानिदेशक (DG) सीमा खन्ना ने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा और लोगों का विश्वास मजबूत होगा. लेकिन हाल में इस सॉफ्टवेयर को लेकर आई आपत्तियों ने दोनों चुनाव अधिकारियों के वादे पर सवाल उठाए हैं.
वीडियो: परवेश वर्मा के थप्पड़ वीडियो पर बवाल, AAP के समर्थन में कांग्रेस











