पिछले 13 सालों में 17 जज और न्यायिक अधिकारी IFS ऑफिसर संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं. इसमें सुप्रीम कोर्ट के दो जज, उत्तराखंड हाई कोर्ट के चार जज, सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल CAT के नौ सदस्य और जिला न्यायपालिका के दो जज शामिल हैं.
इस अधिकारी के मामलों से अलग हो जाते हैं बड़े-बड़े जज, अब तक 17 ने दूरी बनाई, SC जज भी शामिल
IFS officer Sanjiv Chaturvedi APAR petition: ताजा मामला CAT दिल्ली बेंच के जज राजवीर सिंह वर्मा का है. उन्होंने 21 सितंबर को संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है.

ताजा मामला CAT दिल्ली बेंच के जज राजवीर सिंह वर्मा का है. उन्होंने 21 सितंबर को इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया है.
केस से अलग होने की वजह नहीं आई सामनेइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में मुताबिक, राजवीर सिंह वर्मा के सामने चतुर्वेदी खुद पेश हुए थे. उन्होंने ऑल इंडिया सर्विसेज (परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट) रूल्स, 2007 का जिक्र किया. इसमें एनुअल परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (APAR) स्वीकार करने वाले प्राधिकारी, रिपोर्टिंग प्राधिकारी और समीक्षा प्राधिकारी से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. उन्होंने उत्तराखंड के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के 29 नवंबर 2021 के उस आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें IFS अफसरों की APAR के निपटारे के लिए अधिकारियों को तय किया गया था.
21 सितंबर के आदेश में कहा गया,
“मामले की कुछ देर सुनवाई के बाद माननीय सदस्य राजवीर सिंह वर्मा ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया है. रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह मामले को उचित बेंच के सामने लिस्ट करे और इसकी सूचना दे.”
इन सभी मामलों में खुद को अलग करने की कोई एक समान वजह सामने नहीं आई है. 21 सितंबर के मामले में भी ये नहीं बताया गया कि संजीव चतुर्वेदी के केस से जस्टिस वर्मा ने खुद को क्यों अलग किया. अब यह मामला CAT की किसी दूसरी उपयुक्त बेंच के सामने रखा जाएगा.
2002 बैच के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी अपनी सर्विस से जुड़े मामलों को लेकर कई बार कानूनी लड़ाई लड़ चुके हैं. इनमें पोस्टिंग, अनुशासनात्मक कार्रवाई, डेप्युटेशन और परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट से जुड़े विवाद शामिल हैं.
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2025 में संजीव की ओर से दायर एक अवमानना याचिका दायर की गई थी. इससे उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आलोक वर्मा और जस्टिस रवींद्र मैथानी ने खुद को अलग कर लिया था. फरवरी 2024 में संजीव ने अपने सेंट्रल डेप्युटेशन से जुड़े दस्तावेज कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) से मांगते हुए एक याचिका दायर की थी. इससे जस्टिस मनोज तिवारी खुद अलग हो गए थे.
इस सबसे पहले 2013 में चतुर्वेदी के एक मामले से तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जज रंजन गोगोई ने खुद को अलग किया था. बाद में 3 साल बाद यानी अगस्त 2016 में तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जज, जस्टिस यूयू ललित ने भी खुद को उनके केस से अलग कर लिया था.
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