उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने का सपना लेकर स्टूडेंट्स एंट्रेंस एग्जाम देने आए थे. लेकिन एग्जाम हुआ नहीं. या कहें कि हो नहीं पाया. आरोप है कि पहले तो एग्जाम सेंटर में घंटों एंट्री नहीं हुई. जब एंट्री हुई तो सर्वर डाउन था. किसी कंप्यूटर में माउस नहीं अटैच था. तो किसी में कीबोर्ड. जब इनविजिलेटर्स से शिकायत की गई तो वो बगले झांकने लगे. छात्रों ने बवाल किया तो आनन-फानन में एग्जाम रीशेड्यूल कर दिया गया.
सर्वर डाउन, इंटरनेट बंद, माउस-कीबोर्ड खराब, NEET आयुर्वेद परीक्षा का मजाक बना दिया!
NEET Pre Ayurveda का एग्जाम देने छात्र लखनऊ वाले सेंटर पर पहुंचे थे. लेकिन एग्जाम हुआ नहीं. या कहें हो नहीं सका. आरोप है कि पहले तो एग्जाम सेंटर में घंटों एंट्री नहीं हुई. जब एंट्री हुई तो सर्वर डाउन था. इसके अलावा भी कई दिक्कतें थीं.

हालांकि, एग्जाम की अगली तारीख नहीं बताई गई. जो स्टूडेंट्स अलग-अलग राज्य, शहरों से लखनऊ एग्जाम देने पहुंचे थे. उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ा. वापस लौटने वाले स्टूडेंट्स अकेले नहीं थे. उनके साथ उनके परिवार के लोग भी थे जो उनकी आंखों से अपने सपने पूरे होने की उम्मीद लगाए थे. लेकिन सारी उम्मीद धरी की धरी रह गई.
अब सवाल है कि आखिर इसके पीछे गलती किसकी है? एग्जाम कंट्रोलर की? जिसने एग्जाम सेंटर सेलेक्ट किया या सेंटर एडमिनिस्ट्रेशन की? जिनकी जिम्मेदारी थी सुचारू रूप से एग्जाम कंडक्ट करवाने की? गलती किसी की भी हो. परेशान अंततः स्टूडेंट्स और उनकी फैमिली हुई.
एग्जाम है NEET Pre Ayurveda का. एग्जाम कराने का जिम्मा था सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी का. यूनिवर्सिटी ने अलग-अलग कंपनियों को एग्जाम कराने का टेंडर दिया था. 24 जुलाई को नोटिफिकेशन आया. 30 अगस्त से 6 सितंबर के बीच एग्जाम की तारीख तय हुई लेकिन एग्जाम हुआ 18 अक्टूबर को. यूपी में 2 शहरों में सेंटर बनाए गए. पहला लखनऊ और दूसरा वाराणसी में. लखनऊ में सेंटर तय हुआ सुल्तानपुर रोड स्थित दयाल ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन. तकरीबन 400 स्ट्रूडेंट्स का सेंटर ये था.
उनके साथ परीक्षा दिलवाने परिवार के लोग भी सेंटर पहुंचे थे. सुबह 10 बजते-बजते तकरीबन 800 लोग सेंटर के बाहर पहुंचे थे. 11 बजे से एंट्री शुरू होनी थी और 1 बजे से एग्जाम था. लेकिन साढ़े 11 तक जब एंट्री नहीं शुरू हुई तो लोगों ने सेंटर के गार्ड से सवाल करना शुरू किया. उसने जवाब नहीं दिया तो हालात बिगड़ने लगे. हल्ला शुरू हुआ.
दयाल ग्रुप की तरफ से कुछ लोग बाहर आए. स्टूडेंट्स को समझा-बुझाकर एग्जाम शुरू करवाया गया. लेकिन एग्जाम हॉल की हालत और खराब थी. किसी सिस्टम में नेट नहीं चल रहा था तो किसी में माउस और कीबोर्ड अटैच नहीं था. स्टूडेंट्स के शिकायत करने के बाद भी जब बात नहीं बनी जब माहौल और बिगड़ गया. कुछ स्टूडेंट्स ने पुलिस को बुला लिया. कुछ ने तोड़फोड़ शुरू कर दी. इस दौरान और क्या-क्या हुआ हमने जाना परीक्षा देने आए एक छात्र हर्ष से.
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हर्ष ने क्या बताया?हर्ष भी इसी सेंटर पर एग्जाम देने पहुंचे थे. हर्ष का आरोप है कि दयाल ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन के लोग एग्जाम के नाम पर मजाक कर रहे थे. वो असल एग्जाम पेपर की जगह मॉक एग्जाम पेपर दे रहे थे. हर्ष ने बताया,
‘फिर 11:30 बज गए. उसके बाद हम लोग साइड से होते हुए अंदर गए. बहुत सारे लोग थे. लगभग 1000 के आसपास. जो सेंटर के हेड थे वो लगभग फोर्थ फ्लोर पे थे. वहां पूरा लॉक करके बैठे थे कि उनके पास हम लोगों में से कोई पहुंच न पाए. इसके बाद हम लोग नारेबाजी करने लगे. फिर उनमें से कोई आया. उनसे हमने कहा कि हम लोगों का एग्जाम 1 बजे से है. उन्होंने कहा कि सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी की तरफ से हमारे पास कोई अपडेट नहीं आया है. इसके बाद पुलिस बुलाई गई. पुलिस ने उन लोगों से बात की. फिर पेरेंट्स को गेट के बाहर जाने के लिए कह दिया गया. हमें लाइन में इकट्ठा होने को कहा. हमने एक्स्ट्रा टाइम की मांग की. तब जाके पेपर कराने को राजी हुए.’
हर्ष ने आगे बताया,
‘इसके बाद फिर कहा गया कि सिस्टम में कुछ ग्लिच है. थोड़ा रुक जाइए. फिर कुछ लोगों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी. कुछ देर बाद हमारी चेकिंग हुई और रूम में बैठाया गया. वहां सिस्टम में भी कई गड़बड़ियां थीं. 1:30 बजे एग्जाम शुरू हुआ. जब हम इंविजिलेटर को बुला रहे थे तब वो इसे सीरियसली नहीं ले रहे थे. WiFi भी इस दौरान बंद था. कुछ लोगों की आईडी भी लॉगिन नहीं हो रही थी.’
स्टूडेंट्स के बवाल के बाद एग्जाम को रीशेड्यूल कर दिया गया. मेल करके इसकी जानकारी दी गई. एग्जाम की अगली तारीख अभी तय नहीं है. लेकिन लोगों में नाराजगी है. तमाम स्टूडेंट्स ऐसे हैं जो अलग-अलग राज्यों से लखनऊ एग्जाम देने पहुंचे थे.
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