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आवारा कुत्तों से परेशान थे लोग, किसी ने ना सुनी तो नगर पंचायत के दफ्तर में छोड़ आए

महाराष्ट्र के नासिक जिले में प्रदर्शनकारी निफाड नगर पंचायत के चीफ ऑफिसर धीरज भामरे के दफ्तर में पहुंचे और कुत्तों को उनकी टेबल के सामने छोड़ दिया. उनका आरोप है कि लगातार शिकायतों के बाद भी आवारा कुत्तों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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नासिक जिले में प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत के दफ्तर में चार आवारा कुत्ते छोड़ दिए. (courtesy: ITG)

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  • नासिक जिले के निफाड शहर में प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत के चीफ ऑफिसर के दफ्तर में चार आवारा कुत्ते छोड़कर आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या के विरोध में ध्यान आकर्षित किया।
  • शिकायत और बैठक के बावजूद आवारा कुत्तों की समस्या पर दो महीनों में कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत पर दबाव बनाने के लिए यह अनोखा विरोध किया।
  • प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर आवारा कुत्तों की समस्या पर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो वे अधिक बड़े और व्यापक आंदोलन की योजना बना रहे हैं।

महाराष्ट्र के नासिक जिले के निफाड शहर में प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत के चीफ ऑफिसर के दफ्तर में ही चार आवारा कुत्ते छोड़ दिए. आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर ये पूरा विरोध था. प्रदर्शन का नेतृत्व शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट की युवा सेना के जिला प्रमुख विक्रम रंधावे ने किया. उनके साथ नगरसेविका रूपाली रंधावे और कुछ स्थानीय नागरिक भी मौजूद थे.

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प्रदर्शनकारी निफाड नगर पंचायत के चीफ ऑफिसर धीरज भामरे के दफ्तर में पहुंचे और कुत्तों को उनकी टेबल के सामने छोड़ दिया. इस दौरान नगर पंचायत के कामकाज के विरोध में नोटों की दो मालाएं भी रखी गईं. कुछ देर के लिए ऑफिस में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई.

विरोध क्यों किया गया?

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निफाड शहर में पिछले करीब छह महीने से आवारा कुत्तों की समस्या लगातार बढ़ रही है. उनका दावा है कि इसकी वजह से बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और सड़क पर आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हो रही है. कुछ लोगों को कुत्तों के काटने का दावा भी प्रदर्शनकारियों ने किया है.

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इसी वजह से उनकी मांग है कि नगर पंचायत आवारा कुत्तों को पकड़ने की व्यवस्था करे, नसबंदी अभियान चलाए और उनकी संख्या को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए.

इंडिया टुडे के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर पहले भी प्रशासन से शिकायत की थी. शहर की स्थिति की तस्वीरें और जानकारी भी प्रशासन को देने का दावा किया गया. करीब दो महीने पहले इस मुद्दे पर बैठक होने और कार्रवाई का भरोसा मिलने की बात भी विक्रम रंधावे ने कही है. लेकिन उनके मुताबिक, इसके बाद भी जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

प्रदर्शनकारियों ने क्या कहा?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब शिकायत और बैठक के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो इस बार उन्होंने ऐसा तरीका अपनाया, जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो. इन आरोपों पर प्रशासन की तरफ से फिलहाल कोई जवाब सामने नहीं आया है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, विक्रम रंधावे ने आगे भी आंदोलन की चेतावनी दी है. उनका कहना है कि अगर आवारा कुत्तों की समस्या पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो अगला विरोध इससे भी बड़ा हो सकता है.

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मध्य प्रदेश में भी ऐसी घटना

ऐसा पहली बार नहीं है जब आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर किसी ने इस तरह का अनोखा विरोध किया हो. पिछले महीने मध्य प्रदेश के खंडवा में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था. 18 अगस्त को नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष दीपक उर्फ मुल्लू राठौर एक शख्स को कुत्ते का मुखौटा पहनाकर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंचे थे.

वहां उन्होंने आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए थे. राठौर ने दावा किया था कि पिछले चार साल में नसबंदी पर करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद आवारा कुत्तों की समस्या कम नहीं हुई. उन्होंने कुत्तों के काटने की घटनाओं का भी मुद्दा उठाया. प्रशासन की तरफ से मामले की जांच का भरोसा दिया गया.

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