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आवारा कुत्ते डरे हुए लोगों को सूंघ लेते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बात कह दी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुद्दा कुत्तों को खत्म करने का नहीं है, बल्कि सही तरीके से कानून के पालन करने का है. ताकि इंसानों की सुरक्षा और जानवरों की भलाई दोनों सुनिश्चित हो.

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Stray dogs case in Supreme Court Dog can always smell a human who is afraid of dogs observes SC
माइक्रोचिपिंग का सुझाव दिया गया, लेकिन कोर्ट ने पूछा कि क्या पेट डॉग्स के लिए ये अनिवार्य रूप से लागू हो रहा है? (फोटो- X)
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प्रशांत सिंह
8 जनवरी 2026 (Published: 02:42 PM IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कुत्तों के बढ़ते हमलों और डॉग बाइट के मामलों पर गहरी चिंता जताई है. बेंच ने नगर निगमों और राज्य सरकारों पर सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि Animal Birth Control (ABC) के नियमों को देशभर में ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है.

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की तीन जजों की बेंच ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई की. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक जजों ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए एक मजेदार लेकिन गंभीर टिप्पणी की. बेंच ने कहा,

“कुत्ता हमेशा उस इंसान को सूंघ लेता है, जो कुत्तों से डरता है. जैसे ही उसे पता चलता है कि सामने वाला डरा हुआ है, वो हमला कर देता है. हम ये अपने पर्सनल एक्सपीरियंस से बता रहे हैं.”

बेंच ने आगे कहा,

“सिर हिलाना बंद करिए... अगर कुत्तों को पता चल जाए कि आप डरे हुए हो, तो हमला करने की संभावना बहुत बढ़ जाती है. यहां तक कि आपका पेट डॉग भी ऐसा कर सकता है.”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुद्दा कुत्तों को खत्म करने का नहीं है, बल्कि कानून का सही तरीके से पालन करने का है. ताकि इंसानों की सुरक्षा और जानवरों की भलाई दोनों सुनिश्चित हो. मामले में पेश हुए वरिष्ठ वकीलों ने कई अहम बातें रखीं. उन्होंने कहा कि कुत्ते बहुत टेरिटोरियल होते हैं. हर 200-300 मीटर पर उनका टेरिटरी बदल जाती है. गलत जगह पर फीडिंग पॉइंट्स बनाने से कुत्तों में आपस में लड़ाई और इंसानों से टकराव बढ़ता है.

सीनियर एडवोकेट नकुल देवन ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये समस्या एक दिन में खत्म नहीं हो सकती. उन्होंने कहा,

“हमें कम्युनिटी डॉग्स की ग्रोथ को धीमा करना होगा.”

इसके लिए उन्होंने एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग की.

माइक्रोचिपिंग का सुझाव दिया गया, लेकिन कोर्ट ने पूछा कि क्या पेट डॉग्स के लिए ये अनिवार्य रूप से लागू हो रहा है? कई जगहों पर ABC सेंटर्स की कमी, बजट की समस्या और नगर निकायों की लापरवाही को लेकर शिकायतें उठीं. अचानक कुत्तों को हटा देने से चूहों की संख्या बढ़ने का खतरा भी बताया गया. इस दौरान कोर्ट ने व्यंग्यात्मक अंदाज में एक सवाल पूछा,

“आप हमें बताओ कि अस्पताल के कॉरिडोर में कितने कुत्ते घूमने चाहिए?”

कोर्ट ने कहा कि असल समस्या ये है कि मौजूदा ABC नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो रहा. कोर्ट का जोर इस बात पर है कि वैक्सीनेशन और स्टेरलाइजेशन के जरिए मानवीय तरीके से स्ट्रे डॉग्स की संख्या को कंट्रोल किया जाए, न कि नियमों को कमजोर किया जाए.

इस मुद्दे पर कोर्ट की सुनवाई अभी जारी है और आने वाले दिनों में और अहम फैसले आ सकते हैं. ये मामला पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे लाखों लोगों की सुरक्षा और करोड़ों स्ट्रे डॉग्स की भलाई जुड़ी हुई है.

वीडियो: आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

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