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'कांग्रेस के 5 सांसद UPI पर MDR चार्ज के सपोर्ट में थे', BJP के इस दावे की पूरी कहानी जानिए

UPI-MDR: समिति का तर्क था कि UPI का पूरा सिस्टम लंबे समय तक सिर्फ सरकारी मदद के भरोसे नहीं चल सकता. इसके लिए ऐसा रेवेन्यू मॉडल चाहिए, जिससे UPI का खर्च निकले और सरकार के खजाने पर लगातार बोझ न पड़े. और अब इसी रिपोर्ट को लेकर बीजेपी कांग्रेस पर सवाल उठा रही है. जानिए पूरी कहानी.

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पी. चिदंबरम (बीच), मनीष तिवारी (बाएं), गौरव गोगोई (दाएं) और अन्य विपक्षी सांसद 12 अगस्त को हुई समिति की बैठक में शामिल थे. (courtesy: इंडिया टुडे)

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  • सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant UPI पेमेंट्स पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने का निर्णय लिया है।
  • वित्त मामलों की स्थायी समिति ने UPI के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की सिफारिश की, जिसमें बड़े ट्रांजैक्शन पर स्तरबद्ध MDR की व्यवस्था समय के साथ लागत बढ़ने के कारण जरूरी बताई गई।
  • NPCI ने नया MDR फ्रेमवर्क लागू किया है, जिससे UPI पेमेंट इकोसिस्टम के संचालन और सुरक्षा में निवेश के लिए स्थायी वित्तीय सहायता मिलेगी और सरकार पर खर्च का बोझ कम होगा।

UPI पर 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ पेमेंट पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होने के फैसले के बाद सियासी विवाद शुरू हो गया है. लेकिन इस विवाद के बीच अब संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट सामने आ गई है, जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों की नज़र है.

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इस रिपोर्ट में UPI के लिए टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत बताई गई थी. समिति ने ज्यादा रकम वाले UPI ट्रांजैक्शन के लिए टियर-बेस्ड यानी अलग-अलग स्तर वाला MDR मॉडल बनाने और उसे जल्द लागू करने की सिफारिश की थी. समिति का तर्क था कि UPI का पूरा सिस्टम लंबे समय तक सिर्फ सरकारी मदद के भरोसे नहीं चल सकता. इसके लिए ऐसा रेवेन्यू मॉडल चाहिए, जिससे UPI का खर्च निकले और सरकार के खजाने पर लगातार बोझ न पड़े. और अब इसी रिपोर्ट को लेकर बीजेपी कांग्रेस पर सवाल उठा रही है.

विवाद क्यों है?

वित्त मामलों की स्थायी समिति की ये रिपोर्ट 12 अगस्त की है. जिसमें विपक्ष के 13 सांसद शामिल थे. इसमें कांग्रेस के भी 5 सांसद पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ बतौर सदस्य शाम‍िल थे.

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बीजेपी की तरफ से दावा किया गया है कि ये सभी सांसद उस बैठक में मौजूद थे. मीट‍िंग में किसी असहमति का जिक्र नहीं है. इसी आधार पर बीजेपी अब राहुल गांधी के UPI MDR के विरोध पर सवाल उठा रही है. लेकिन यहां एक बात साफ समझना जरूरी है.

समिति की रिपोर्ट में MDR का एक ड‍िटेल्ड और टियर-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल सुझाया गया था. इसका मतलब ये नहीं है कि इन सांसदों ने बाद में लागू किए गए मौजूदा 0.4% MDR, 2,000 रुपये की सीमा और बाकी शर्तों को सीधे मंजूरी दी थी. यानी संसदीय समिति की सिफारिश और मौजूदा UPI MDR व्यवस्था एक ही चीज नहीं हैं.

समिति ने क्या कहा?

अब सवाल ये क‍ि आख‍िर समिति ने कहा क्या था? समिति ने कहा था क‍ि UPI के लिए एक ऐसा रेवेन्यू मॉडल जरूरी है, जिससे इसका पूरा इकोसिस्टम आर्थिक तौर पर टिकाऊ बन सके. रिपोर्ट में कहा गया कि ज्यादा रकम वाले ट्रांजैक्शन के लिए अलग-अलग स्तर पर MDR लागू करने की व्यवस्था के लिए कानूनी प्रावधान किए गए हैं. समिति ने सरकार से इस व्यवस्था को जल्द नोटिफाई और लागू करने को कहा था.

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UPI पर अभी तक बड़े पैमाने पर Zero-MDR व्यवस्था रही है. यानी मर्चेंट से UPI पेमेंट लेने के लिए MDR नहीं लिया जाता था. लेकिन UPI का नेटवर्क जितना बड़ा हुआ है, उसे चलाने का खर्च भी बढ़ा है.

संसदीय समिति के सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में UPI के लिए करीब 2,000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान है, जबकि इंडस्ट्री की अनुमानित ऑपरेशनल कॉस्ट करीब 20,700 करोड़ रुपये बताई गई. यानी दोनों के बीच काफी बड़ा अंतर है.

समिति का कहना था कि इस अंतर को हमेशा सरकारी मदद से पूरा करना लंबे समय के लिए टिकाऊ मॉडल नहीं है. UPI के नेटवर्क, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड प्रिवेंशन और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश के लिए एक स्थायी रेवेन्यू मॉडल जरूरी है.

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NCPI ने लागू किया MDR 

मॉडल बहस के बीच NPCI ने नया MDR फ्रेमवर्क लागू करने का ऐलान किया है. 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा. लेकिन सबसे पहले ये समझ लीजिए कि ये ग्राहक से लिया जाने वाला सीधा UPI चार्ज नहीं है.

MDR उस मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में लगने वाला चार्ज है, जिसमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप जैसी संस्थाएं शामिल हैं. वित्त मंत्रालय ने साफ कहा है कि MDR न तो सरकार का टैक्स है और न ही सरकार या NPCI इसे अपने पास रखेगा. ये पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल संस्थाओं के बीच बांटा जाएगा.

आसान भाषा में कहें तो अगर आप अपने दोस्त या परिवार के किसी सदस्य को UPI से पैसे भेजते हैं, तो P2P यानी Person-to-Person पेमेंट किसी भी रकम पर फ्री रहेगा. 5,000 रुपये भेजिए या 50,000 रुपये, इस MDR का चार्ज नहीं लगेगा. वहीं किसी मर्चेंट को 2,000 रुपये तक का पेमेंट भी MDR से बाहर रहेगा. सरकार का दावा है क‍ि छोटे व्यापारियों के लिए मौजूद Zero-MDR व्यवस्था भी जारी रहेगी. 

MDR आखिर है क्या?

2,000 रुपये से ऊपर पेमेंट पर कितना चार्ज? सामान्य P2M ट्रांजैक्शन में 0.4% MDR लगेगा. 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन होगी. नए फ्रेमवर्क में कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टरों के लिए अलग व्यवस्था है.

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि से जुड़े कुछ पेमेंट्स पर 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए 0.4% की जगह 5 रुपये का फ्लैट MDR रखा गया है. वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े कैपिटल मार्केट पेमेंट्स पर 0.02% MDR रखा गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है. यानी असल में चार्ज इस बात पर भी ड‍िपेंड करेगा कि पेमेंट किस तरह का है.

वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि MDR ग्राहक से नहीं लिया जाएगा. यानी UPI से पेमेंट करते समय ग्राहक को अलग से कोई UPI transaction fee देने की व्यवस्था नहीं की गई है. सरकार का कहना है कि नए मॉडल का मकसद UPI के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी में निवेश के लिए सिस्टम को आर्थिक तौर पर टिकाऊ बनाना है.

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