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ऑपरेशन सिंदूर में सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाने लगा था पाकिस्तान, 'बहुत ब्रह्मोस मारे...'

Declassified: Operation Sindoor डॉक्यूमेंट्री में भारतीय सेना ने कैसे पूरी प्लानिंग की और फिर उसे अमल में लाया, इसके बारे में डिटेल में बताया गया है. पहलगाम हमले के बाद यह नाम तय हुआ था और इसके लिए 9 आतंकी ठिकाने टारगेट किए गए. जानें और क्या है इस डॉक्यूमेंट्री में.

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रेस ब्रीफिंग के दौरान तीनों सेनाओं के ऑपरेशंस डायरेक्टर (PHOTO- PTI)

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  • ऑपरेशन सिंदूर के तहत 7 मई 2025 की रात 1 बजकर 5 मिनट पर भारतीय सेना, एयरफोर्स और नेवी ने मिलकर पाकिस्तान के नौ आतंकवादी ठिकानों पर एक साथ हमला किया।
  • यह ऑपरेशन भारत द्वारा 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुई आतंकी घटना और इंडस वाटर ट्रिटी रद्द करने के बाद आतंकवाद के ठिकानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
  • आक्रमण के बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए लेकिन 10 मई को पाकिस्तानी DGMO ने भारत के DGMO से सीजफायर की मांग की और शाम 5 बजकर 30 मिनट पर सीजफायर लागू कर दिया गया।

'बस करिए सर, आपने इतने ब्रह्मोस मिसाइल मारे हैं. अब तो आप संतुष्ट होंगे.' ये शब्द थे मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्लाह के. जनरल अब्दुल्लाह 10 मई, 2025 को पाकिस्तान के DGMO यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस थे. उन्होंने ये सब भारत के DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई से कहा था. ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor Documantary) पर बनी डॉक्यूमेंट्री Declassified: Operation Sindoor में यह सब सामने आया है. 

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इस सीरीज को आप डिस्कवरी प्लस ओटीटी पर देख सकते हैं. लेकिन देखने से पहले हम आपको कुछ किस्से बताना चाहेंगे. वो किस्से जो अब तक हम अनसुने थे. हमें ये तो पता है कि ऑपरेशन सिंदूर कब हुआ? कहां हमले किए गए? लेकिन इस ऑपरेशन के पीछे की कहानी भी जानना जरूरी है. कैसे इस ऑपरेशन का नाम 'सिंदूर' रखा गया. सब कुछ डिटेल में समझते हैं.

ऑपरेशन सिंदूर : कैसे पड़ा ये नाम?

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले से पूरा देश शोक में था. 22 अप्रैल को पीएम मोदी सऊदी अरब के दौरे पर थे. तभी उन्हें खबर मिली कि पहलगाम की बैसारन घाटी में हमला हुआ है. वो क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिले. पीएम अपना दौरा बीच में ही छोड़कर देश लौट गए. दूसरी तरफ दिल्ली से कश्मीर तक सेना, इंटेलिजेंस एजेंसियां अपने काम में लग चुकी थीं. पीएम ने दिल्ली लैंड किया और मीटिंग ली. पहला फैसला ये लिया गया कि Indus Water Treaty यानी 'सिंधु जल समझौता' रद्द किया जाएगा. इसके बाद शुरू हुई प्लानिंग. वो प्लानिंग जिसके बारे में सरकार और फौज के चुनिंदा लोगों को जानकारी थी.

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इसी बीच पीएम मोदी और तत्कालीन आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी की बात हुई. पीएम ने उनसे पूछा कि ऑपरेशन का नाम क्या होगा? इस पर जनरल द्विवेदी कहते हैं -

चूंकि ये हमला (पहलगाम अटैक) घाटी में हुआ था, इसलिए हमने इसका नाम 'ऑपरेशन ट्यूलिप गार्डन' रखा है. लेकिन पीएम ने कहा कि नहीं. हमने इसका नाम ऑपरेशन सिंदूर रखा है.

जनरल द्विवेदी आगे बताते हैं,

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मैंने कहा सर ये बहुत अच्छा नाम है. चूंकि Indus Water Treaty भी सस्पेंड कर दी गई है, इसलिए ऑपरेशन 'सिंधु' अच्छा नाम है. लेकिन पीएम ने कहा, नहीं सिंधु नहीं. ऑपरेशन सिंदूर. क्योंकि उन्होंने हमारे देश की महिलाओं का सिंदूर उजाड़ा है, इसलिए इसका नाम ऑपरेशन सिंदूर होगा.

इस तरह इस ऑपरेशन का नाम 'ऑपरेशन सिंदूर' पड़ा. जनरल द्विवेदी बताते हैं कि ये पहली बार था जब भारत की तीनों सेनाएं एक कॉमन ऑपरेशनल नाम से ऑपरेट करने जा रही थीं. उदाहरण के लिए कारगिल की जंग में आर्मी के ऑपरेशन का नाम 'ऑपरेशन विजय' था. वहीं एयरफोर्स के ऑपरेशन का नाम 'ऑपरेशन सफेद सागर' था. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं ने एक कॉमन नाम रखा.

टारगेट्स को कैसे चुना गया?

इस ऑपरेशन में जो सबसे टफ चीज थी, वो था टारगेट चुनना. ये बात जगजाहिर है कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर आतंकियों को शह देता है. लेकिन भारत का रुख साफ था कि आम लोगों को नुकसान नहीं होना चाहिए. कुल मिलाकर 30 से अधिक आतंकी ठिकाने सेलेक्ट हुए. अब भारत को ये तय करना था कि इनमें से कौन से ठिकाने हैं, जो सालों से भारत को परेशान करते आए हैं. लिहाजा, कुल 9 टारगेट्स सेलेक्ट हुए. ये ठिकाने थे -

  1. मरकज़ तैयबा - मुरीदके, पाकिस्तान 
  2. मरकज़ सुभानअल्लाह - बहावलपुर, पाकिस्तान 
  3. सवाई नाला कैंप - मुज़फ्फराबाद, PoK 
  4. सैयदना बिलाल - जैश-ए-मोहम्मद कैंप, मुज़फ्फराबाद, PoK 
  5. गुलपुर कैंप - कोटली 
  6. अब्बास कैंप - कोटली 
  7. बरनाला कैंप - भिम्बर 
  8. सरजल कैंप - सियालकोट 
  9. महमूना जोया - सियालकोट
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भारत ने इन 9 ठिकानों पर हमला किया था (PHOTO- DGMO Briefing)

तय हुआ कि इनमें से दो ठिकाने, मुरीदके और बहावलपुर पर इंडियन एयरफोर्स हमला करेगी. जबकि बाकी के ठिकानों पर इंडियन आर्मी की आर्टिलरी और ड्रोन्स हमले करेंगे. बहावलपुर जैश-ए-मोहम्मद का हेडक्वार्टर है. जबकि मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा का हेडक्वार्टर है.

इंडियन नेवी ने जहाज रवाना कर दिए 

88 घंटों तक चली इस जंग को आर्मी और एयरफोर्स ने लीड किया. लेकिन नेवी क्या कर रही थी, इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थी. डॉक्यूमेंट्री में तत्कालीन नेवी चीफ, एडमिरल दिनेश त्रिपाठी बताते हैं कि नेवी ने विशाखापत्तनम की ओर से वॉरशिप्स को अरब सागर में भेजना शुरू किया. साथ ही नेवी ने फायरिंग की एक्सरसाइज भी शुरू कर दी. इंडियन नेवी ने पूरे पाकिस्तानी नेवी को ब्लॉक कर दिया. पाकिस्तानी नेवी के जहाज या तो बेस पर खड़े रह गए या वो ईरान की तरफ और दूर जाने लगे. उन्हें डर था कि अगर नेवी ने अटैक किया, तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं होगा.

इस जंग में तीनों सेनाओं को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया. क्योंकि एक बात क्लियर थी कि भारत के हमले के बाद पाकिस्तान बौखला कर जवाबी हमले करेगा. लेकिन पॉलिटिकल लीडरशिप यानी मोदी सरकार ने इनर सर्कल में एक बात साफ कर दी थी. उन्होंने कहा था कि इस बार अगर फुल-स्केल वॉर भी हो जाए तो भारत लड़ेगा. लेकिन पाकिस्तान की न्यूक्लियर हमले की धमकी को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 

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इंडियन नेवी ने अपने जहाज अरब सागर में तैनात किए हुए थे (PHOTO- DGMO Briefing)

लिहाजा सेनाओं ने तैयारी शुरू कर दी. लेकिन हमले के बाद एक खतरा भी था. खतरा, पाकिस्तानी ड्रोन्स/मिसाइल्स और फाइटर जेट्स का. इसलिए भारत ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम्स को एक्टिव किया. छोटे ड्रोन्स और मिसाइल्स के लिए L-70 एयर डिफेंस गन लगाई गई. वहीं बड़े खतरों के लिए आकाश मिसाइल और S-400 को तैनात किया गया.

एयरफोर्स के पास एक सिस्टम है. नाम है इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS). ये एक ऑटोमैटिक कमांड नेटवर्क है जिसक इस्तेमाल भारतीय इंडियन एयरफोर्स करती है. ये सिस्टम मिलिट्री रडार्स, हवाई सेंसरों, सिविल एविएशन की फीड और वेपन सिस्टम्स से लाइव डेटा लेता है. फिर ये इस डेटा को एक सिंगल पिक्चर में बदल देता है. साथ ही ये आर्मी के आकाशतीर सिस्टम से भी जुड़ा है.

तो कुल मिला कर हमला और जवाबी हमले से बचाव का प्लान तैयार था. लेकिन तारीख डिसाइड नहीं हुई थी. खैर, ये सब होते होते 30 अप्रैल की तारीख आ गई. इसी दिन इंडियन आर्मी में एक नई नियुक्ति हुई. लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा को नॉर्दर्न आर्मी कमांडर बनाया गया. ये वही इलाका है जहां से ऑपरेशन सिंदूर को लॉन्च किया जाना था. उनके ठीक बाद एयर मार्शल नागेश कपूर ने साउथ वेस्टर्न एयर कमांड की जिम्मेदारी संभाली. वहीं एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने वाइस चीफ का पद संभाला.

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयरफोर्स कंट्रोल रूम
एक बंद चिट्ठी ; हमले का ऑर्डर 

आखिरकार 1 मई, 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मी चीफ से मिलकर तारीख तय कर दी. उन्होंने सेनाओं से कहा कि 7 मई (6-7 मई की दरम्यानी रात) को 1 बजे हमला किया जाए. फाइनल हुआ कि सेनाएं रात के 1 बजकर 5 मिनट पर हमला करेंगी. इस बारे में जानकारी देते हुए आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा बताते हैं,

हमें  मिशन की सीक्रेसी को मेंटेन करना था. मैंने कोई बात फोन पर नहीं की. मैंने अपने एक सीनियर, ब्रिगेडियर लेवल के ऑफिसर को दिल्ली भेजा. वो आर्मी चीफ से मिले और चीफ ने उन्हें एक कागज की चिट दी. चीफ ने ब्रिगेडियर से कहा कि इसे बिना खोले, आर्मी कमांडर को दे देना. आखिरकार लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने उधमपुर स्थित नॉर्दर्न कमांड में वो चिट खोली. उसपर तारीख और समय लिखा था - 07/0105. यानी 7 तारीख को 1 बजकर 5 मिनट.

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आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा (PHOTO- Indian Army Northern Command)
कमांडर्स और चीफ ने कुछ यूं ‘छकाया’

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसमें होने वाला सरप्राइज एलिमेंट था. आखिरी समय तक किसी को तारीख पता नहीं थी. सेनाओं के सीनियर ऑफिसर्स को भी इस बात का ध्यान रखना था कि उनके हाव-भाव से किसी को ये न लगे कि हमला आज ही होने वाला है. 

6 मई की शाम, लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा लगभग 6 बजे ऑफिस से निकल गए. उन्होंने कहा कि ऑफिस में बस ड्यूटी ऑफिसर रहेंगे. साथ ही उन्होंने सभी को ब्रीफ किया कि अगले रोज लगभग साढ़े 10 बजे सबलोग मिलेंगे. वो बताते हैं कि रात में वो बस एक कार मंगा कर उससे निकल गए. उनके गेट पर खड़े गार्ड के अलावा किसी को भनक तक नहीं लगी कि वो ऑफिस के लिए निकल गए हैं.

इधर दिल्ली में भी कुछ ऐसा ही चल रहा था. उस दिन DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई शाम 7 बजे ही ऑफिस से निकल गए. आमतौर पर वो ऑफिस से देर रात निकलते थे. लेकिन आज बड़ा दिन था. अब हुआ ये कि उस उन्हें 10 बजे घर से निकलना था. लेकिन अचानक से उनकी बेटी और दामाद आ गए. लेफ्टिनेंट जनरल घई बताते हैं,

जब मेरी बेटी और दामाद को पता चला कि मैं किसी काम से ऑफिस जा रहा हूं, तो उन्होंने कहा कि आइए आपको हम ड्रॉप कर देते हैं. और फिर उन्होंने मुझे साउथ ब्लॉक ड्रॉप किया.

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लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई (PHOTO- ADGPI)

नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी ऐसा किया. उन्होंने अपने घर पर बताया कि उन्हें कुछ काम है. हालांकि किसी को नहीं पता था कि वो कहां जा रहे हैं. और इस तरह वो भी साउथ ब्लॉक स्थित ऑपरेशंस डायरेक्टरेट में पहुंचे. आर्मी चीफ ने तो अपनी कार तक नहीं मंगवाई. उन्होंने अपने एडीसी से उसकी पर्सनल गाड़ी लाने को कहा. अपने पूरे कार्यकाल में उन्होंने पहली बार अपने घर के बैक गेट का इस्तेमाल किया और साउथ ब्लॉक के लिए निकल गए.

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आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी (PHOTO- PTI)

लेकिन इन सभी चीफ़्स में एयरफोर्स ने जो किया, वो वाकई एक मजेदार किस्सा है. उन्होंने सभी को ये बताया कि वो बड़ौदा जा रहे हैं. शाम के 6 बजे उन्होंने सरकारी जहाज से उड़ान भरी. एयरफोर्स चीफ एपी सिंह बताते हैं,

मैंने सभी को कहा था कि मैं बड़ौदा जा रहा हूं. हमने उड़ान भी भरी. लेकिन वो फ्लाइट कभी बड़ौदा पहुंची ही नहीं. हमने एक लोकल सॉर्टी यानी चक्कर मारा और वापस दिल्ली लैंड कर गए. सभी को यही लगा कि चीफ बड़ौदा गए हैं, जबकि वो वहां कभी नहीं पहुंचे.

CDS जनरल अनिल चौहान बताते हैं कि उस रात सभी सभी चीफ़्स अलग-अलग रास्तों से आए. किसी को पता नहीं चला कि कौन आया और कब आया.

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तीनों सेनाओं के चीफ और CDS अलग-अलग रास्तों से मिलिट्री ऑपरेशंस रूम पहुंचे (PHOTO- PTI)
फाइनल स्ट्राइक 

आखिरकार सेनाओं ने अपनी घड़ियों को सिंक किया. यानी तीनों सेनाओं, सभी कमांडर्स और हमला करने वाली टुकड़ियों ने अपनी घड़ियों का टाइम मैच किया. आर्मी स्ट्रेटेजिक कमांड के डायरेक्टर कर्नल आशीष उप्रेती कहते हैं कि जब उन्होंने तीनों चीफ और CDS को देखा, तो वो समझ गए कि आज रात स्ट्राइक होने वाली है. आखिरकार भारत ने ठीक 1 बजकर 5 मिनट पर हमला किया. सभी बंदूकें, आर्टिलरी, मोर्टार, ड्रोन्स और फाइटर जेट्स ने एक ही समय पर 9 ठिकानों को निशाना बनाया. पाकिस्तान की ओर से कुछ फाइटर जेट्स हवा में उड़े. लेकिन तब तक भारत के जहाज अपना काम कर चुके थे.

इसके बाद लगभग 88 घंटों तक हमले जारी रहे. भारत ने जहां आतंकी ठिकानों पर हमला किया, वहीं पाकिस्तान ने आम लोगों पर हमले शुरू कर दिए.फिर कर्नल उप्रेती ने तुरंत आर्मी स्ट्रेटेजिक कमांड के लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष गुप्ता को बुलाया. उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष गुप्ता से 1 बजकर 51 मिनट पर ऑपरेशन सिंदूर का वो ऐतिहासिक पोस्टर ट्वीट किया. लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष गुप्ता ही वो व्यक्ति थे जिनके एक क्लिक ने दुनिया को भारतीय सेनाओं के शौर्य के बारे में बताया.

बहुत ब्रह्मोस मार लिया, अब बंद करिए : पाक DGMO 

भारत लगातार हमले कर रहा था. पाकिस्तान की हालत खराब होती जा रही थी. लिहाजा उसने फाइटर जेट्स और ड्रोन्स से हमला किया. भारत समझ गया कि अब जवाब का तरीका और 'हार्ड' करना होगा. लिहाजा एयरफोर्स ने अपने जेट्स (संभवतः सुखोई) को ब्रह्मोस से लैस किया. कुल मिलाकर 11 ऐसे एयरबेस को निशाना बनाया गया, जो पाकिस्तानी एयरफोर्स की रीढ़ थे. ये एयरबेसेज थे,

  1. नूर खान एयरबेस, रावलपिंडी (ये पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वार्टर के करीब है)
  2. सरगोधा एयरबेस
  3. रफीकी एयरबेस 
  4. भोलारी 
  5. मुरीद एयरबेस 
  6. आरिफवाला एयरबेस 
  7. चुनियान एयरबेस 
  8. पसरूर एयरबेस 
  9. सक्कर एयरबेस 
  10. जैकोबाबाद एयरबेस 
  11. स्कर्दू एयरबेस
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लल्लनटॉप की टीम को तबाह हुई पाकिस्तानी सेना की चौकियां दिखाते इंडियन आर्मी के अधिकारी

जब इन ठिकानों पर हमले हुए तब LoC पर आर्मी ने अपने हमले तेज कर दिए. लिहाजा पाकिस्तान हर तरफ से फंस गया. फिर 10 मई को पाकिस्तानी DGMO ने भारत के DGMO को फोन किया. लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई बताते हैं, 

चूंकि मैं सीनियर हूं तो मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्लाह ने मुझे सर कह कर संबोधित किया. उन्होंने कहा कि अब तो आपने ब्रह्मोस भी चला दी हमारे एयरबेसेज पर. अब आप संतुष्ट हो गए होंगे. लिहाजा अब सीजफायर कर दीजिए.

(यह भी पढ़ें: 'भारत लड़ाई मे शुरू से ही आगे था...' ऑपरेशन सिंदूर पर यूरोपियन थिंक टैक की बात सुन तिलमिला जाएगा पाकिस्तान)

आखिरकार दोनों देशों के बीच सहमति बनी और शाम के 5 बजकर 30 पर सीजफायर लागू हुआ. अंततः भारत ने दिखा दिया कि आतंक और उसको शह देने वाले जहां भी हों, भारत उन्हें ढूंढ़ कर खत्म करेगा. इस ऑपरेशन में 100 आतंकी मारे गए. इसमें से लगभग दर्जन भर हाई लेवल के कमांडर्स थे. भारत का रुख साफ है. अगर गोली चली, तो बदले में भारत गोला चलाने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाएगा.

वीडियो: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान पर फर्स्ट एयर स्ट्राइक करने वाले रिजवान मलिक की कहानी

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