नकली सरकारी विभाग बनाकर सरकार से पैसे ऐंठने की शातिर घटना गुजरात के दाहोद में हुई है. आरोप है कि यहां सिंचाई और जल संसाधन विभाग के एक नहीं 6 फर्जी सरकारी दफ्तर बनाए गए. इससे जुड़े आरोपियों ने सरकारी अफसर का ‘रूप’ बनाया. फर्जी मोहरें बनवाईं. नकली सिग्नेचर करके कागज तैयार किए. फिर धोखाधड़ी से सरकार से फंड भी हासिल कर लिया.
सरकारी विभागों के नकली दफ्तर खोलकर सिस्टम को बनाया उल्लू, 121 स्कीमों के नाम पर करोड़ों डकार गए
Gujrat के दाहोद में आरोपियों ने सिंचाई और जल संसाधन विभाग के 6 नकली दफ्तर बनाकर फर्जी दस्तावेज और सिग्नेचर के जरिए 121 परियोजनाओं के लिए सरकारी फंड हासिल किया. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुख्य आरोपी अबू बकर जकीर अली सैयद, उसके परिवार और सहयोगियों की 22.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति अस्थायी तौर पर जब्त की है.

इन नकली अफसरों ने एक-दो नहीं बल्कि 121 फर्जी कामों के लिए सरकार से फंड निकलवा लिए. अब ईडी ने आरोपियों पर शिकंजा कसते हुए उनकी 22 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति जब्त की है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अहमदाबाद रीजनल दफ्तर ने सोमवार, 17 अगस्त को फर्जी सरकारी दफ्तर घोटाले के मामले में हुई कार्रवाई के बारे में जानकारी दी है. ईडी ने बताया कि एक मुख्य आरोपी, उसके परिवार और सहयोगियों की 22.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति अस्थायी तौर पर सीज की गई है. ये कार्रवाई धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है.
जब्त की गई संपत्तियों में 7 जमीनें, म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट और अलग-अलग बैंक खातों में जमा पैसे शामिल हैं. मुख्य आरोपी की पहचान अबू बकर जकीर अली सैयद के रूप में हुई है. ईडी ने आगे बताया कि उसने साल 2023 में दाहोद टाउन ए डिवीजन पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी.
एफआईआर में क्या था?
एफआईआर के मुताबिक, मामले से जुड़े आरोपियों ने दाहोद जिले में सिंचाई और जल संसाधन विभाग के 6 नकली दफ्तर बनाए थे. इन दफ्तरों के जरिए फर्जी कागज बनाकर सरकार से करोड़ों के फंड निकलवाए गए. आरोपियों ने न सिर्फ फर्जी दफ्तर खोले बल्कि नकली मोहरें भी बनवाईं. अफसरों के फर्जी साइन किए और इनकी मदद से फंडिंग के लिए फर्जी कागज तैयार किए. ईडी की जांच में पता चला है कि आरोपियों ने ऐसी साजिश रचकर 121 फर्जी परियोजनाओं के लिए मंजूरी हासिल की और धोखाधड़ी से सरकारी पैसा हासिल किया.
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पैसों को ऐसे ठिकाने लगाया
धोखाधड़ी से आए पैसों को आरोपियों ने बड़े कायदे से ठिकाने लगाया. सरकारी विभागों से मिले पैसे को पहले फर्जी सरकारी दफ्तरों के नाम से खोले गए 9 बैंक खातों में जमा किया गया. फिर 18 बैंक खातों से गुजारते हुए आरोपियों और उनसे जुड़े संस्थानों के 118 अन्य बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया. बाद में इन पैसों से जमीनें खरीदी गईं. म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया गया और अन्य प्रॉपर्टीज खरीदी गईं.
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