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'तुम कुर्सी पर बैठोगे तो हम कहां बैठेंगे', ये बोलकर दलितों को जमीन पर बैठने को कहा

Rajasthan Dalit men caste abuse: राजस्थान के एक सरकारी स्कूल में कुछ दलित लोगों को कथित तौर पर जमीन पर बैठने के लिए कहा गया. आरोप है कि उन्हें कुर्सी पर नहीं बैठने दिया गया. मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है.

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राजस्थान में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कुछ लोगों को जमीन पर बैठने के लिए कहा गया. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • भीलवाड़ा के एक सरकारी स्कूल में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान दलित समुदाय के लोगों के कुर्सियों पर बैठने पर कुछ लोगों ने विरोध किया और राजस्थान पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की।
  • घटना के पीछे कारण यह था कि पहले दलित समुदाय के लोग जमीन पर बैठते थे, लेकिन इस बार टीचर ने सभी को कुर्सियों पर बैठने के लिए कहा, जिससे कुछ लोगों ने जातिसूचक टिप्पणी करते हुए असहिष्णुता दिखाई।
  • FIR दर्ज होने के बाद मामले की जांच डिप्टी SP राहुल जोशी को सौंपी गई है और कुछ समुदायों द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह का बहिष्कार भी किया गया, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ने की संभावना है।

आजादी को करीब 80 साल हो गए. देश में विकास हुआ, तरक्की हुई. लेकिन सोच? वो आज भी कहीं-कहीं विकसित नहीं हो सकी है. राजस्थान के भीलवाड़ा के एक स्कूल से खबर आई है. 15 अगस्त को सरकारी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा था. कार्यक्रम में बच्चे, अध्यापक, अभिभावक और गांव के लोग शामिल थे. बैठने के लिए स्कूल ने 'कुर्सियों' का इंतजाम किया था. 

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अक्सर वे लोग जमीन पर ही बैठते थे. मगर इस साल तो कुर्सियां थीं. टीचर ने पैरेंट्स से कहा कि आप चेयर पर बैठ जाइए. आरोप है कि जब दलित समुदाय के लोग वहां बैठने लगे, तो कुछ लोगों ने इसका विरोध किया. कहा,

'अगर तुम कुर्सियों पर बैठोगे, तो हम कहां बैठेंगे? तुम्हें हमारे सामने बैठने का क्या अधिकार है?'

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अब इस मामले में राजस्थान पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. उनके नाम हैं- बालू वैष्णव, हीरालाल शर्मा, नारायण जाट, रामेश्वर जाट और प्रकाश जाट. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह शिकायत रामेश्वरलाल बैरवा (उम्र 35) और गोपीलाल बैरवा (उम्र 37) की शिकायत पर दर्ज की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना उनके गांव भाकलिया के सरकारी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान हुई.

एक्सप्रेस से बात करते हुए रामेश्वरलाल बैरवा ने आरोप लगाया,

"हम कार्यक्रम के दौरान वहां रखी कुर्सियों पर बैठे थे, तभी लोगों ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए हमें अपशब्द कहे. बहुत अपमानजनक लहजे में कहा कि तुम बैरवा लोग नीचे बैठो. अगर तुम कुर्सियों पर बैठोगे, तो हम कहां बैठेंगे? तुम्हें हमारे सामने बैठने का क्या अधिकार है?"

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पीड़ित रामेश्वरलाल ने कहा,

"हर साल हम सभी जमीन पर बैठते हैं. लेकिन इस बार कुर्सियां थीं और टीचर ने हमें उन पर बैठने के लिए कहा. इससे कुछ लोगों ने हमें टोकते हुए कहा कि हम उनके साथ नहीं बैठ सकते."

आंगनवाड़ी बंद करने की धमकी

पीड़ितों को इस घटना से मानसिक आघात पहुंचा है. आत्म-सम्मान को गहरी चोट पहुंची है. रिपोर्ट के मुताबिक, घटना का एक वीडियो भी है, जिसे स्थानीय निवासी बद्री लाल बैरवा रिकॉर्ड कर रहे थे. वीडियो में कुछ लोगों की बहस हो रही है. इस दौरान बद्री कहते हैं, "आप पढ़े-लिखे आदमी हैं... और यह हालत है."

पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें डराया-धमकाया गया. कुर्सियां खाली करने को मजबूर किया. ये भी कहा कि उस आंगनवाड़ी को बंद कर दिया जाएगा, जिसमें उनके समूह की दो महिलाएं काम करती थीं.

OBC समुदाय के लोगों ने किया था बहिष्कार

बद्री लाल ने यह भी दावा किया कि OBC समुदाय के लोगों ने स्वतंत्रता दिवस समारोह का बहिष्कार किया था. मामले की जांच डिप्टी SP राहुल जोशी को सौंपी गई है. वह भीलवाड़ा के मंडल इलाके के सर्कल ऑफिसर हैं. 

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बागोर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत गैर-कानूनी रूप से इकट्ठा होने और आपराधिक धमकी देने, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है.

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