भारतीय राजनीति में जब भी डिजिटल नैरेटिव गढ़ने या सोशल मीडिया पर एग्रेसिव काउंटर अटैक की बात हुई, अमित मालवीय का नाम सबसे आगे रहा. बीजेपी के आईटी सेल के हेड के तौर पर वह 11 साल तक जमे रहे. उनकी काबिलियत ऐसी रही कि उन्हें बीजेपी का ‘डिजिटल चाणक्य’ भी कहा जाता है. लेकिन 17 अगस्त को बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने जब अपनी टीम का ऐलान किया तो सबसे चौंकाने वाला फैसला अमित मालवीय को लेकर ही था.
बीजेपी ने अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को आईटी सेल का हेड क्यों बनाया?
11 साल तक बीजेपी आईटी सेल की कमान संभालने वाले अमित मालवीय की जगह अब छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को ये जिम्मेदारी दी गई है. डेटा एनालिसिस और चुनावी माइक्रो-स्ट्रैटेजी के लिए पहचाने जाने वाले म्हस्के की एंट्री से बीजेपी की सोशल मीडिया रणनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं.

आईटी सेल हेड के पद से उनकी छुट्टी कर दी गई. मालवीय के ‘उग्र टेम्प्रामेंट’ के उलट विनम्र, शांत, डेटा एनालिसिस में दिलचस्पी रखने और अक्सर पर्दे के पीछे से रणनीतियां तय करने वाले छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को बीजेपी की सोशल मीडिया कमांड का नया सेनापति बनाया गया.
दीपक म्हस्के का नाम राजनीति और खासकर बीजेपी की राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों ने भले कभी सुना हो, लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए यह नाम कोई खास परिचित नहीं है. ऐसे में जब बीजेपी ने अपने सबसे मजबूत सोशल मीडिया सिपहसालार को हटाकर म्हस्के को उसकी जगह बैठाया तो हर किसी के मन में यही सवाल आया कि ये कौन हैं और जो भी हैं, पर क्या वह उसी आक्रामकता के साथ बीजेपी की सोशल मीडिया मशीनरी को चला पाएंगे, जैसा अमित मालवीय चलाया करते थे. ये तो वक्त बताएगा लेकिन दीपक म्हस्के का अतीत उनके बारे में कुछ रहस्य तो जरूर खोल सकता है कि उनकी राजनीतिक कैंपेनिंग क्षमता क्या है.
दीपक म्हस्के साल 1968 में रायपुर में जन्मे. राजनीति में आने से पहले वो साइंस स्ट्रीम की मास्टरी कर चुके हैं. उनके पास केमिस्ट्री में एमएससी की डिग्री है. सीमेंट टेक्नॉलजी में डिप्लोमा है. साथ ही कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का भी कोर्स उन्होंने किया है. रोजी-रोटी वाले करियर की शुरुआत में वह कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर रहे. बाद में खेती-किसानी के काम में चले गए. ऑर्गेनिक खेती और बागवानी का कम से कम 30 साल का अनुभव म्हस्के के पास है.
डेटा जुटाने और उसका एनालिसिस करने में म्हस्के की दिलचस्पी ज्यादा है. यही उनकी ताकत भी है. खासतौर पर चुनावी या सरकारी योजना वाले डेटा के विश्लेषण में उन्हें महारत हासिल है. छत्तीसगढ़ के चुनाव में उन्होंने अपने इस कौशल से बीजेपी को फायदा और कांग्रेस को काफी नुकसान पहुंचाया था.
राजनीतिक करियर की शुरुआतम्हस्के ने साल 2009 में बीजेपी जॉइन कर पॉलिटिक्स की शुरुआत की. महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण समुदाय से आने वाले दीपक म्हस्के के परिवार का कनेक्शन जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रहा. बीजेपी जॉइन में आने के बाद वो पार्टी के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे. वह छत्तीसगढ़ बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. वहां पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता भी रहे हैं. दीपक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत आने वाली सरकारी कंपनी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के बोर्ड में गैर-सरकारी स्वतंत्र निदेशक के तौर पर भी काम कर चुके हैं. फिलहाल म्हस्के छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन में तैनात हैं, जहां उन्हें राज्य मंत्री के दर्जे के बराबर का पद मिला हुआ है.
म्हस्के की असली ताकत उनका 'डेटा एनालिसिस' (Data Analysis) की स्किल है. वो चुनावी आंकड़ों, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के डेटा और जमीनी फीडबैक का सटीक विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं. साल 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सोशल मीडिया पर सटीक डेटा और तस्वीरों के जरिए हमला बोलने की रणनीति म्हस्के ने ही बनाई थी. उन्होंने जिला स्तर पर फेसबुक अकाउंट्स की माइक्रो-स्ट्रैटेजी तैयार की थी, जिसकी बदौलत बीजेपी सत्ता में वापसी कर पाई.
अमित मालवीय जहां अपने तीखे सोशल मीडिया पोस्ट्स और आक्रामक तेवर के लिए जाने जाते हैं. वहीं, म्हस्के शांत और पर्दे के पीछे से काम करने वाले लोगों में शुमार हैं. बेहद लो-प्रोफाइल हैं, जिन्होंने सालों से बीजेपी में अहम पदों पर जिम्मेदारियां संभालते हुए भी कभी चुनाव नहीं लड़ा.
खैर, बीजेपी की सोशल मीडिया टीम संभालने के बाद म्हस्के के सामने वही चुनौतियां होंगीं, जिनके आधार पर अमित मालवीय को कथित तौर पर हटाया गया.
मालवीय की छुट्टी की इनसाइड स्टोरीअमित मालवीय 11 सालों से बीजेपी के आईटी सेल में काम कर रहे थे. उन्हें इस ‘मठ’ से हटाने का बीजेपी का फैसला अचानक नहीं था. कई मौकों पर उनके कामकाज के तरीकों पर सवाल उठे थे. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी से उपजी कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया की ही चुनौती थी. वो वहीं पर बनी और वहीं उसका विस्तार हुआ, जो बाद में जंतर-मंतर के बड़े प्रोटेस्ट से होते हुए धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी तक जा पहुंचा. बताया गया कि अमित मालवीय बीजेपी के सामने आई इस चुनौती को ठीक से काउंटर नहीं कर पाए.
बड़ी संख्या में छात्रों के इस प्रोटेस्ट में आने के बाद कहा जाने लगा कि बीजेपी की सोशल मीडिया टीम नैरेटिव और काउंटर नैरेटिव ठीक से नहीं गढ़ पाई, जिस वजह से आंदोलन के सामने सरकार को बैकफुट पर जाना पड़ा. बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं की भी यही शिकायत रही कि प्रोटेस्ट के दौरान मालवीय जेन-जी को ठीक से डील नहीं कर पाए.
अमित मालवीय का आक्रामक स्वभाव भी पार्टी के कई नेताओं को पसंद नहीं आता था. ये तक कह दिया गया कि हर वक्त आक्रामकता नहीं चलती, थोड़ा तर्क भी होना चाहिए. मालवीय के नागरिकों के मजाक उड़ाने वाले एक ट्वीट पर संघ के विचारक रतन शारदा ने तो खुलेआम उन्हें टोक दिया. मालवीय को उन्होंने ताना दिया कि बीजेपी आईटी सेल का काम नागरिकों को ट्रोल करना या उनका अपमान करना नहीं है, बल्कि उनकी शंकाओं का समाधान करना है. बताते हैं कि इन सबको लेकर पार्टी के भीतर मालवीय के खिलाफ लंबे समय से असंतोष पनप रहा था.
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कई सूत्र बताते हैं कि अमित मालवीय को आईटी सेल से हटाए जाने का फैसला खुद अमित मालवीय का ही था. कई मौकों पर उन्होंने खुद इस जिम्मेदारी से खाली किए जाने की इच्छा जताई थी. 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कथित तौर पर उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं से इस पर बात भी की थी. कहा तो ये भी जा रहा है कि नितिन नबीन के अध्यक्ष बनने के बाद भी मालवीय ने अपनी ये इच्छा उनके सामने दोहराई. उनकी जगह पर आईटी सेल कौन संभालेगा, इस पर उन्होंने नबीन के साथ विचार-विमर्श किया. सूत्रों का कहना है कि नई सोशल मीडिया टीम के लिए जिन नामों पर विचार किया गया था, उनमें से कई नाम खुद मालवीय ने सुझाए थे.
कुछ सूत्रों का ये भी कहना है कि बीजेपी की सरकार वाले कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गृहमंत्री अमित शाह से अमित मालवीय की शिकायत की थी. कहा था कि राष्ट्रीय स्तर पर सोशल मीडिया टीम प्रदेश सरकारों के फैसलों को वैसी इंटेंसिटी के साथ प्रमोट नहीं करती, जैसा करना चाहिए. सोशल मीडिया पर आक्रामक होने के चक्कर में बीजेपी सरकार के कामकाज के मुद्दे पीछे छूटते जा रहे थे.
वजह जो भी है, अमित मालवीय अब बीजेपी आईटी सेल के हेड नहीं हैं. अब उनकी जगह आए दीपक म्हस्के क्या तीर मारेंगे ये देखने वाली बात है.
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