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मुंबई-अहमदाबाद एक्सप्रेसवे पर खतरनाक गड्ढे, बाहर निकली सरिया, गाड़ियों के टायर फटे

Mumbai-Ahmedabad Highway Accident: पालघर में मुंबई-अहमदाबाद हाईवे के फ्लाईओवर पर कंक्रीट टूटने से बड़ा गड्ढा हो गया. इसकी वजह से 10-12 मिनट में 15 से अधिक गाड़ियां हादसे का शिकार हो गईं.

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कई गाड़ियों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ. (फोटो: सोशल मीडिया)

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  • महाराष्ट्र के पालघर जिले में मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर दहानू तालुका में महालक्ष्मी मंदिर के पास फ्लाईओवर पर बने गहरे गड्ढे की वजह से रात के दौरान 15 से ज्यादा गाड़ियां एक साथ हादसे का शिकार हो गईं।
  • इस घटना का कारण सड़क पर पिछले वर्ष 620 करोड़ रुपये की लागत से की गई वाइट टॉपिंग का खराब होना बताया गया है, जिससे कंक्रीट उखड़ गया और लोहे की सरिया बाहर आ गईं।
  • हादसे के बाद नेशनल हाईवे की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं और संभावित मरम्मत के लिए संबंधित विभाग को जांच एवं सुधारात्मक कार्रवाई करनी होगी।

महाराष्ट्र के पालघर जिले में मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर 15 से ज्यादा गाड़ियां हादसे का शिकार बन गईं. वजह है- एक फ्लाईओवर पर बना बड़ा सा गड्ढा. यह गड्ढा इतना खतरनाक है कि कंक्रीट के भीतर लगी लोहे की सरिया बाहर निकल आई. इसकी वजह से 10 से 12 मिनट के अंदर कई गाड़ियों के टायर फट गए. कई गाड़ियों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ.

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आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना दहानू तालुका में महालक्ष्मी मंदिर के पास फ्लाईओवर पर हुई, जो गुजरात से मुंबई की तरफ जाने वाले रास्ते पर है. सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे से टकराने के बाद कई गाड़ियों के टायर खराब हो गए. इस हादसे में राहत की बात यह रही कि किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा है. 

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फ्लाईओवर पर बने गड्ढे की वजह से 12 मिनट में एक साथ 15 से ज्यादा गाड़ियां इसकी चपेट में आ गईं. यह हादसा रात के समय हुआ. जब ऑलरेडी विजिबिलिटी कम रहती है. 

सवालों के घेरे में नेशनल हाईवे

इस घटना के बाद भारी-भरकम खर्चें से बना ये नेशनल हाईवे सवालों के घेरे में आ गया है. सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि जिस सड़क पर पिछले साल वाइट टॉपिंग का काम कराया गया था, वह पहली ही बारिश में जवाब कैसे दे गई. जानकारी के अनुसार सड़क की वाइट इट टॉपिंग पर करीब 620 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. इसके बावजूद कंक्रीट उखड़ने और लोहे की सरियों के बाहर आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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वाइट टॉपिंग का मतलब होता है कि पुरानी और खराब हो गई डामर की सड़कों के ऊपर सीमेंट-कंक्रीट की एक मजबूत परत बिछाना. इससे सड़कें गड्ढा मुक्त और बेहद टिकाऊ हो जाती हैं. और लगाई गई लागत 20 से 30 साल तक आसानी से चल सकती है. यह तकनीक दक्षिण भारत के राज्यों सहित कई नेशनल हाइवे पर इस्तेमाल की जा रही है.

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