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ग्रेटर नोएडा में पाइपलाइन मेंटनेंस के लिए खोदे गड्ढे में गिरी कार, न बैरिकेड थे न चेतावनी

Greater Noida में पाइपलाइन की मरम्मत के लिए खोदे गए गड्ढे में कार गिर गई. हालांकि, हादसे में ड्राइवर की जान बच गई. स्थानीय लोगों ने जांच कर दोषियों को सजा देने की मांग की है.

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प्रगति पांडे
| अरुण त्यागी
29 जून 2026 (अपडेटेड: 29 जून 2026, 05:37 PM IST)
Grater Noida Car Pit Dug Accident
ग्रेटर नोएडा में फिर गड्ढे में गिरी कार. (फोटो- इंडिया टुडे)
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ग्रेटर नोएडा में प्रशासन के खोदे गड्ढे कभी युवराज मेहता को डुबा देते हैं तो कभी किसी कैब ड्राइवर को निगल जाते हैं. युवराज मेहता को नहीं बचाया जा सका. कैब ड्राइवर की किस्मत अच्छी थी कि जान नहीं गई. आप बिल्कुल ठीक समझ रहे हैं. ग्रेटर नोएडा में एक कार ड्राइवर समेत गड्ढे में समा गई. 

घटना 27-28 जून की दरम्यानी देर रात सेक्टर अल्फा-1 स्थित रेलवे विहार के मेन रोड पर हुई. पीड़ित प्रमोद अपनी कार लेकर वहां से गुजर रहे थे. तभी गाड़ी गंगाजल पाइपलाइन की मरम्मत के लिए खोदे गए एक गड्ढे में गिर गई. गड्ढा इतना बड़ा था कि कार उसमें खड़ी हो गई.

ग्रेटर नोएडा में गड्ढे में गिरी कार

इंडिया टुडे से जुड़े अरुण त्यागी की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगाजल पाइपलाइन की मरम्मत के लिए खोदा गया यह गहरा गड्ढा कई दिनों से बिना बैरिकेडिंग के खुला था. उसके पास कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाया गया था. इस कारण प्रमोद को वहां गड्ढा होने का पता नहीं चला. उनकी गाड़ी सीधा गड्ढे में जा गिरी. 

हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. हालांकि, प्रमोद ने किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली. गाड़ी रातभर गड्ढे में ही पड़ी रही. उसे अगले दिन क्रेन की मदद से निकाला गया.

​एक्टिव सिटीजन टीम के सदस्य हरेंद्र भाटी ने इस घटना को लेकर प्रशासन की कड़ी आलोचना की है. उनका आरोप है कि शहर को गड्ढा-मुक्त बनाने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं. विकास के नाम पर जगह-जगह मौत के कुएं खोदे जा रहे है. हरेंद्र भाटी ने कहा कि युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद भी प्राधिकरण ने कोई सबक नहीं लिया है.

उन्होंने आगे कहा, “अगर इस जगह पर समय रहते बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और चेतावनी के संकेत लगाए गए होते, तो आज यह हादसा नहीं होता.”

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हादसे के बाद ​स्थानीय लोगों और एक्टिव सिटिजन टीम ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से इस पूरे मामले की जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि जल विभाग, तकनीकी विभाग और संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाए, शहर के सभी खुले गड्ढों को तत्काल भरा जाए और खुदाई वाली जगहों पर रिफ्लेक्टर और बैरिकेडिंग सुनिश्चित हो.

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