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मोबाइल ऐप से चलता ई-रिक्शा बंद किया, मदद के नाम पर पैसा लिया, चालू करके चलते बने

आरोपी पहले ऐप से ई-रिक्शा हैक करते थे. ई-रिक्शा बंद होने पर आरोपी 'तकनीकी एक्सपर्ट' बनकर वहां पहुंच जाते थे. और उसे स्टार्ट करने के नाम पर पैसे वसूल करते थे.

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पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. फोटो- इंडिया टुडे

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  • मध्यप्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है जो मोबाइल ऐप से ई-रिक्शा हैक कर उसमें समस्या पैदा करता था और फिर मदद के नाम पर पैसे वसूलता था।
  • विदेशी ऐप के प्रयोग से ई-रिक्शा अचानक बंद होने की घटनाएं बढ़ने लगीं, जिससे इलाके में असामान्य गतिविधियों और ठगी की शिकायतें मिलीं, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
  • पुलिस तकनीकी जांच के साथ ही संदिग्धों का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है, और ई-रिक्शा चालकों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।

ई-रिक्शा के बुरे दिन चल रहे हैं. कभी खबर आती है कि चाइनीज़ ऐप से चलता ई-रिक्शा रोक कर लोग मज़े ले रहे हैं. अब ई-रिक्शा हैंकिंग की खबर आ रही है. इसमें आरोपी पहले ऐप से ई-रिक्शा हैक करते हैं. ई-रिक्शा बंद होने पर 'तकनीकी एक्सपर्ट' बनकर वहां पहुंच जाते हैं. और उसे स्टार्ट करने के नाम पर पैसे वसूल करते हैं.

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इंडिया टुडे से जुड़े रवीश पाल सिंह और संदीप कुलश्रेष्ठ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्कैम का खुलासा मध्यप्रदेश के उज्जैन से सामने आया है. यहां पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है. उस पर आरोप है कि मोबाइल ऐप से ई-रिक्शा को हैक करता था और फिर मददगार बनने की आड़ में 200-300 रुपये वसूलता था. लोगों को शक तब हुआ जब इलाके में इस तरह के मामले अचानक बढ़ने लगे. 

सुनसान इलाकों में ठगी

रिपोर्ट के मुताबिक, ये लोग सुनसान इलाकों में सक्रिय थे. खासकर देर रात में मोबाइल ऐप या और टेक्निकल मीडियम से ई-रिक्शा को अचानक बंद कर देते थे. इसके बाद इन्हीं में से कोई ‘मददगार’ बनकर मौके पर पहुंच जाता था. जो खुद को तकनीकी जानकार बताता था. कुछ मिनटों में ही ये लोग ई-रिक्शा चालू कर देते थे. और इसके एवज में ई-रिक्शा चालकों से मनमाने पैसे वसूल लेते थे.

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इस कथित ठगी की शिकायत कई ई-रिक्शा चालकों और असंगठित ई-रिक्शा चालक-परिचालक संघ ने पुलिस से की. शिकायत मिलने के बाद एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने जांच का निर्देश दिया. क्राइम ब्रांच और संबंधित थाना पुलिस की जॉइंट टीम बनी. जांच के दौरान नीलगंगा थाना पुलिस ने ग्राम नवली के निवासी 18 साल के रीतेश भानूपा को शक के आधार पर हिरासत में लिया. उससे पूछताछ जारी है.

पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने बताया कि मोबाइल ऐप की मदद से ई-रिक्शा सिस्टम को प्रभावित किए जाने के दावों की तकनीकी जांच कराई जा रही है. शहरभर के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और संदिग्ध गतिविधियों का भी विश्लेषण किया जा रहा है. ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके.

इस बीच उज्जैन पुलिस ने ई-रिक्शा चालकों को सलाह दी है कि वो खुद भी सतर्क रहें. अगर अचानक से उनका वाहन बंद हो जाए तो किसी अनजान व्यक्ति के बहकावे में आकर कैश या ऑनलाइन भुगतान न करें. केवल अधिकृत सर्विस सेंटर या कंपनी के टेकनीशियन से ही संपर्क करें. अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति जबरन मदद करके पैसे मांगता है तो उसकी फोटो/वीडियो और वाहन नंबर सुरक्षित रखें और तुरंत पुलिस को सूचना दें. 

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