मुंबई के समुद्र में अब लहरों, मछलियों और नावों के साथ विज्ञापन के बड़े-बड़े होर्डिंग भी तैरते नजर आ सकते हैं. महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड ने मुंबई के समुद्री किनारों पर तैरते विज्ञापन प्लेटफॉर्म और होर्डिंग लगाने के लिए टेंडर जारी किए हैं. जुहू बीच, बांद्रा-वर्ली सी लिंक और लोटस जेट्टी जैसे इलाके इस योजना में शामिल हैं. सरकार का कहना है कि इससे पोर्ट्स और वाटर ट्रांसपोर्ट के लिए कमाई होगी.
मुंबई के समंदर में तैरेंगे विज्ञापन वाले होर्डिंग, महाराष्ट्र सरकार की योजना सुनते ही विरोध होने लगा
महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड या MMB ने मुंबई के समुद्री किनारों पर तैरते विज्ञापन प्लेटफॉर्म और होर्डिंग लगाने के लिए टेंडर जारी किए हैं. इसके विरोध में आदित्य ठाकरे (UBT) ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी लिखी है. इस पर पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है.

लेकिन सरकार की इस योजना पर विवाद शुरू हो गया है. एनवायरमेंट एक्टिविस्ट और स्थानीय लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं. अब शिवसेना (उद्भव ठाकरे गुट) के नेता आदित्य ठाकरे भी इसके विरोध में उतर आए हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी लिखकर इस फैसले को रोकने की मांग की है. बांद्रा वेस्ट रेजिडेंट्स एसोसिएशन ने भी इसका विरोध किया है.
सरकार का प्लान क्या है?इस प्लान के केंद्र में महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड यानी MMB है. यह राज्य सरकार का बोर्ड है, जो बंदरगाहों और समुद्री परिवहन से जुड़े काम देखता है. बोर्ड ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी MMR में करीब 29 जगहों पर विज्ञापन लगाने के लिए टेंडर जारी किए हैं. योजना में दो तरह के विज्ञापन शामिल हैं.
पहला- Floating Advertising Barges. यानी समुद्र के पानी में तैरने वाले बड़े प्लेटफॉर्म या नाव जैसे स्ट्रक्चर. इन पर विज्ञापन दिखाए जाएंगे.
दूसरा है Fixed Hoardings. ये समुद्र किनारे, जेटी और दूसरी जगहों पर लगाए जाने वाले सामान्य विज्ञापन बोर्ड होंगे.
टेंडर के मुताबिक, कुल 29 विज्ञापन स्ट्रक्चर लगाने की योजना है. इनमें 15 फ्लोटिंग बार्ज और 14 सामान्य होर्डिंग शामिल हैं. हर विज्ञापन का आकार करीब 40×40 फीट तक हो सकता है.
इनके लिए जिन जगहों को चुना गया है, उनमें जुहू बीच, लोटस जेट्टी, बांद्रा-वर्ली सी लिंक जेट्टी, कार्टर रोड और मार्वे जेट्टी शामिल हैं. इसके अलावा नवी मुंबई और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के दूसरे इलाकों में भी विज्ञापन लगाए जाने हैं.
आदित्य ठाकरे को आपत्ति क्यों?अब आते हैं विवाद पर. इसे लेकर शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने X पर लिखा,
‘मुंबई के समुद्री तट को बर्बाद करने, उसकी खूबसूरती बिगाड़ने और मुंबई को लूटने के 101 तरीके. ये सब बीजेपी सरकार कर रही है. यह सब नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि ठेकेदारों के एक समूह को फायदा पहुंचाने के लिए है.’
आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी भी लिखी है. लिखा कि जब शहर में पहले से ही प्रदूषण है तो समुद्र में ये होर्डिंग लगाकर क्या फायदा? वैसे भी लोग तेज होर्डिंग LED लाइट से परेशान रहते हैं.
वहीं, महाराष्ट्र सरकार ने इस योजना का बचाव किया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक महाराष्ट्र के बंदरगाह और मत्स्य पालन मंत्री नितेश राणे ने तर्क दिया है कि पहले मैरीटाइम बोर्ड विज्ञापन लगाने के लिए सिर्फ NOC जारी करता था. इससे बोर्ड को सीधे कमाई नहीं होती थी. अब विज्ञापन के अधिकार देकर बोर्ड खुद राजस्व जुटा सकेगा.
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कैसे लागू होगा मॉडल?इसके लिए एजेंसियों को टेंडर के जरिए चुना जाएगा. एजेंसियां अपने खर्च पर विज्ञापन ढांचे बनाएंगी, उन्हें चलाएंगी और उनका रखरखाव करेंगी. बदले में उन्हें तय जगहों पर विज्ञापन दिखाने का अधिकार मिलेगा. यह व्यवस्था DBFOM मॉडल पर आधारित है. यानी डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और मेंटेन. सरकार का दावा है कि इस काम में एनवायरमेंट और तटीय नियमों का पालन किया जाएगा.
30 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, जुहू बीच और वर्ली जेट्टी के कुछ टेंडर में आवेदन की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर रखी गई है. इसके बाद 2 नवंबर को बोलियां खोली जानी हैं. यानी योजना अभी टेंडर के चरण में है.
इस योजना का विरोध सिर्फ राजनीतिक वजहों से ही नहीं हो रहा. पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है. समुद्र में रहने वाले जीव पानी की गुणवत्ता के साथ-साथ रोशनी और आवाज से भी प्रभावित होते हैं. मिड डे में छपी रिपोर्ट में मरीन इकोलॉजिस्ट शौनक मोदी ने बताया है कि फ्लोटिंग होर्डिंग पर लगी तेज LED लाइट समुद्री जीवों के प्राकृतिक जीवन को प्रभावित कर सकती है.
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