अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो पांच महीने के भीतर दूसरी बार भारत आए हैं. हालांकि अभी तक भारत-अमेरिका के बीच कोई ट्रेड डील नहीं हुई है. इस बीच द इंडियन एक्सप्रेस ने मार्को रुबियो का इंटरव्यू किया. बातचीत के दौरान रुबियो ने ट्रेड डील से लेकर रूसी तेल जैसे मुद्दों पर सवालों का जवाब दिया. रुबियो ने भारत और अमेरिका के बीच के संबंधों को सकारात्मक बताया है.
'ट्रेड डील पर 99 परसेंट काम पूरा', अमेरिका ने समझौता होने का टाइम बता दिया
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के साथ रिश्तों को सकारात्मक बताया. रूसी तेल पर टैरिफ को लेकर अमेरिकी रुख स्पष्ट किया. रुबियो के मुताबिक ट्रेड डील का 99 फीसदी काम पूरा हो चुका है. कब तक होगा समझौता? ये भी बताया.

मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा,
'मुझे लगता है कि हम डील पूरी होने के बहुत करीब हैं. मैं कहूंगा कि इसे फाइनल करने में अब बस कुछ हफ्ते बचे हैं, महीने नहीं. मुझे लगता है कि 99% काम पूरा हो चुका है. बाकी का बचा हिस्सा भी 100% पूरा होना चाहिए. लेकिन जिस दिशा में यह काम आगे बढ़ रहा है, उसे लेकर मैं काफी सकारात्मक हूं.'
मार्को रुबियो से पूछा गया कि अपने दो साल के कार्यकाल में वो भारत-अमेरिका संबंधों को कैसे देखते हैं? इस पर रुबियो ने कहा,
‘असल में मेरी सबसे पहली बैठक ‘क्वाड’ के साथ हुई थी, जिसमें भारत भी शामिल है. तब से लेकर अब तक, मैंने यहां अपने समकक्षों के साथ कई बार, शायद एक दर्जन से अधिक बार, अलग-अलग मंचों पर बातचीत की है. यह मेरा यहां दूसरा दौरा है. आपने देखा होगा कि हमारी सरकार के हाई-लेवल प्रतिनिधि भी यहां आते रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमेरिका का द्विपक्षीय दौरा किया था. हम इसी आधार पर आगे भी अपने संबंधों को और मजबूत करते रहेंगे.’
रूसी तेल की खरीद पर क्या बोले रुबियो?प्रेसिडेंट ट्रंप जब-तब रूसी तेल खरीदने पर टैरिफ लगाते रहते हैं. हाल ही में उन्होंने रूसी तेल की खरीद पर लगे प्रतिबंधों में छूट दी है, जिससे भारत को राहत मिली है. लेकिन चिंता यह है कि भविष्य में ये प्रतिबंध फिर से लगाए जा सकते हैं. रुबियो से पूछा गया कि क्या इससे भारत-अमेरिका के आर्थिक संबंधों पर कोई दबाव पड़ता है? इसके जवाब में मार्को रुबियो कहते हैं,
‘हां, ऐसा हो सकता है, इसमें कोई शक नहीं है. इसलिए इसे बहुत सावधानी से संभालने की जरूरत है, क्योंकि हमारे बीच के संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं. इनमें से कोई भी टैरिफ भारत को दंडित करने या नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं है. ये हमारी व्यापक विदेश नीति का हिस्सा हैं. दुर्भाग्य से, इसमें रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध भी शामिल है, जिसे हम खत्म होते देखना चाहते हैं.’
मार्को रुबियो आगे कहते हैं,
‘आपने हमारे मीडिया और राजनीतिक व्यवस्था में देखा होगा कि जब राष्ट्रपति ने ये छूट दी और हमारी कांग्रेस द्वारा पारित कानून के तहत जरूरी शुल्क नहीं लगाए, तो उन्हें इसके लिए आलोचना का सामना करना पड़ा. लेकिन उन्होंने ये शुल्क इसलिए नहीं लगाए क्योंकि वे समझते हैं कि ऐसा करने से भारत के साथ हमारे बेहद महत्वपूर्ण संबंधों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.’
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रुबियो के मुताबिक भारत उन चुनिंदा जगहों में से एक है जहां वेनेजुएला के ‘हेवी क्रूड’ को रिफाइन किया जा सकता है. रिलायंस, जामनगर का दौरा हमारे लिए एनर्जी के सोर्स में विविधता लाने के लक्ष्य को हासिल करने के नए अवसर तलाशने का एक मौका है.
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