कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी बढ़ाई गई हिरासत को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने इस मामले में रात में ही सुनवाई की अपील की है. जंतर-मंतर पर पुलिस के रोके जाने के बावजूद तिरंगा फहराने पहुंचे दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था. इसके बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. बाद में फिर हुई सुनवाई में उनकी न्यायिक हिरासत को दो दिनों के लिए बढ़ा दिया गया.
आशुतोष रांका-सौरव दास हिरासत के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे, रात में सुनवाई की अपील की
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाने के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

सीजेपी ने सीईएम के इस फैसले का विरोध किया और इसे गैरकानूनी बताया. मंगलवार, 20 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और इस फैसले को चुनौती दी. उनके वकीलों ने छुट्टियों के दौरान तत्काल सुनवाई की अपील की. वकीलों ने तर्क दिया कि SEM का आदेश कानूनी रूप से गलत है. रिकॉर्ड पर ऐसा कोई आधार नहीं है जिसके चलते जमानत (Surety) को खारिज किया जाए और न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) बढ़ाई जाए.
सीजेपी की कानूनी टीम का कहना है कि वो सुनवाई के संबंध में हाईकोर्ट रजिस्ट्री से जवाब का इंतजार कर रहे हैं.
सीजेपी में कानूनी मामले देखने वाली रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत के खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है और कोर्ट से रात में ही सुनवाई की अपील की है.
रत्ना ने कहा कि सौरव दास और आशुतोष को एक मिनट के लिए भी जेल में नहीं रहना चाहिए. यह उनकी आजादी का मामला है और राजनीतिक खेलों की वजह से उनकी आजादी में कटौती नहीं की जा सकती. इंसाफ मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए.
CJP का आरोप है कि इस मामले में जमानत की सुनवाई जानबूझकर टाली जा रही है, ताकि पार्टी के दोनों नेताओं को रिहा होने से रोका जा सके.
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क्या है मामला?CJP के दोनों नेता आशुतोष रांका और सौरव दास पर पुलिस के काम में बाधा डालने का आरोप है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर की सुबह कॉकरोच जनता पार्टी के 11 लोगों के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका जबरन जंतर-मंतर पहुंच गए जबकि इस जगह को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था. उन्होंने वहां तिरंगा फहराया और नारे लगाए. मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन वो नहीं माने. उन्होंने पुलिस के काम में बाधा डाली, जिसके बाद 14 लोगों को हिरासत में लिया गया.
इसके बाद सौरव और आशुतोष को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. 19 अक्टूबर को उनकी इस हिरासत की अवधि को दो और दिन के लिए बढ़ा दिया गया. अब दोनों 21 अक्टूबर को फिर मजिस्ट्रेट के सामने पेश होंगे.
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