प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद पर तो काबू पा लिया गया है, लेकिन माओवादी सोच वाले लोग अभी भी देश में मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि इन 'दिमागी नक्सलियों' की पहचान करनी होगी और उन्हें अलग-थलग करना होगा. पीएम मोदी ने उग्रवाद से लड़ते हुए जान गंवाने वाले सुरक्षाकर्मियों को भी श्रद्धांजलि दी.
'हथियारबंद नक्सली चले गए, दिमागी नक्सली अभी भी मौजूद', लाल किले से बोले पीएम मोदी
Independence Day 2026: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि नक्सली और माओवादी हिंसा में अब खुद को बनाए रखने की ताकत नहीं बची है और यह अपने अंतिम दौर में है. उन्होंने दावा किया कि अब नक्सल-प्रभावित इलाके नक्सलवाद-मुक्त होने की तरफ बढ़ रहे हैं.

शनिवार, 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर तिरंगा फहराया. देश को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,
"सालों तक माओवादी सोच वाले लोग देश की सत्ता के गलियारों में जमे रहे. इस माओवादी विचारधारा ने सरकारी कमेटियों में सलाहकार की भूमिका निभाते हुए भी नीतियों को प्रभावित किया. हम जंगलों में हथियारबंद नक्सलियों को खत्म करने और देश को उस संकट से मुक्त कराने में सफल रहे हैं."
पीएम मोदी ने आगे कहा कि हथियारबंद नक्सली तो चले गए, लेकिन 'दिमागी नक्सली' अभी भी मौजूद हैं. उन्होंने कहा,
"ऐसी सोच रखने वाले लोग मौके की तलाश में हैं. वे हिंसा और अशांति का रास्ता बना रहे हैं. वे समाज को गलत रास्ते पर ले जाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. हमें इन दिमागी नक्सलियों की पहचान करनी होगी. हमें उन्हें अलग-थलग करना होगा."
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है. इन्होंने अनगिनत माताओं से उनके जवान बेटों को छीन लिया और देश भर के परिवारों के सपनों को चकनाचूर कर दिया. उन्होंने आगे कहा,
“लगभग चार दशकों तक, नक्सलवाद ने भारत के बड़े हिस्सों और वहां की आबादी के एक बड़े हिस्से को अपनी गिरफ्त में रखा. बंदूक के दम पर राज किया और संविधान की धज्जियां उड़ाईं. आम नागरिकों की रक्षा करते हुए हमारे 3,500 से ज्यादा पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने अपनी जान गंवाई. नक्सलवाद ने धरती को खून से लाल कर दिया था.”
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प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सली और माओवादी हिंसा में अब खुद को बनाए रखने की ताकत नहीं बची है और यह अपने अंतिम दौर में है. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं और जहां की मिट्टी कभी खून से सनी हुई थी, आज वही नक्सल प्रभावित इलाके विकास के साथ नक्सलवाद-मुक्त होने की तरफ बढ़ रहे हैं.
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