पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रथिंद्र बोस के पास 10 TMC विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की गई थी. 8 जुलाई को दायर इस याचिका पर जल्द फैसला नहीं होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सोमवार, 28 सितंबर को अदालत ने कहा कि ऐसी याचिकाओं पर स्पीकर को तीन महीने में फैसला कर देना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने 10 बागी TMC विधायकों के मामले पर क्या फैसला सुनाया?
CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच TMC विधायक सोहनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

याचिका का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल के स्पीकर तीन महीने के अंदर इन 10 MLA की अयोग्यता याचिका पर फैसला करें. यह याचिका ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े के सीनियर विधायक सोहनदेब चट्टोपाध्याय ने दायर की थी. उनकी अपील पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सुनवाई की. बेंच ने कहा,
"हमारे पास यह मानने की ‘पूरी वजह’ है कि स्पीकर कोर्ट के फैसले से अच्छी तरह वाकिफ हैं. वह तय समय-सीमा के अंदर सही फैसला लेने की कोशिश करेंगे."
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंच ने फैसला सुनाते हुए जनवरी 2020 के सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का जिक्र किया था. इसमें तत्कालीन मणिपुर विधानसभा स्पीकर को अयोग्यता याचिका पर फैसला लेने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था. डिसक्वालिफिकेशन से जुड़ी याचिका सोहनदेब चट्टोपाध्याय ने 8 जुलाई 2026 को दायर की थी. ये देखते हुए कोर्ट ने कहा कि स्पीकर से उम्मीद की जाती है कि वे 8 अक्टूबर तक इस पर फैसला ले लें.
क्यों 10 विधायकों के खिलाफ दायर याचिका?जुलाई में सोहनदेब चट्टोपाध्याय ने स्पीकर रथिंद्र बोस को बागी गुट के 10 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी. चट्टोपाध्याय ने यह मांग इस आधार पर की थी कि इन विधायकों ने "पार्टी के हितों के खिलाफ काम किया है."
अपनी याचिका में चट्टोपाध्याय ने स्पीकर से कहा था कि वे 10 विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिका पर जल्द से जल्द फैसला लें. इन विधायकों में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी भी शामिल हैं.
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रीताब्रता बनर्जी के अलावा, अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष को भी नोटिस भेजे गए.
अप्रैल में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद TMC में फूट पड़ गई. इन चुनावों में 15 साल बाद पार्टी सत्ता से बाहर हो गई थी. 2026 में बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी थी.
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