महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) बीते कई दिनों से चर्चा में है. FDA कुछ महीनों से रेस्टोरेंट्स और मिलावटी खाने आदि को लेकर लगातार छापे मार रहा है. लेकिन अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र FDA को फटकार लगाई है. हाईकोर्ट ने अपने निर्देशों का पालन न करने के लिए एफडीए को फटकारा है. मामला मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) परिसर में मौजूद पांच फूड आउटलेट्स से जुड़ा है. FDA ने इनका फूड लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था. लेकिन कोर्ट की फटकार के बाद अब FDA सस्पेंशन को वापस लेगा.
'आपको लगता है आप भगवान हैं', महाराष्ट्र FDA पर क्यों भड़का HC? हद में रहने को कह दिया
MCA के BKC परिसर के पांच फूड आउटलेट्स के लाइसेंस सस्पेंड करने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र FDA को फटकार लगाई. Cipla के लाइसेंस रद्द करने के मामले में भी कोर्ट ने FDA की कार्रवाई को मनमाना बताया और उचित प्रक्रिया का पालन करने को कहा.

हाईकोर्ट ने कहा कि FDA के फैसले को वापस लेने के कारण लाइसेंस सस्पेंशन के आदेश रद्द हो गए हैं. कोर्ट के आदेश पर हुई नई जांच में इन खाने-पीने की जगहों ने सभी क्वालिटी चेक्स पार कर लिए हैं.
FDA को फटकार, मनमाने ढंग से कार्रवाई कीलाइसेंस बहाल करने का फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने सुनाया है. इस बेंच में एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र वी घुगे और जस्टिस गौतम ए अंखाड शामिल थे. बेंच ने FDA को बिना सही वजह बताए मनमाने ढंग से कार्रवाई करने के लिए फटकार लगाई और अधिकारियों को बिना सोचे-समझे सस्पेंशन ऑर्डर जारी करने पर डांटा. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा,
MCA के पांच फूट आउटलेट्स पर कार्रवाईमुझे समझ नहीं आता कि आप लोग इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं. क्या आपको हाई कोर्ट के आदेश से कोई दिक्कत है? अगर कोर्ट में अदालत की अवमानना की एक हजार याचिकाएं दायर होती हैं, तो उनमें से 500 राज्य सरकार के आदेश न मानने की वजह से होती हैं.
21 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र FDA ने MCA के पांच आउटलेट्स का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था. इस मामले पर पहली बार 25 अगस्त को सुनवाई हुई. इस सुनवाई में हाईकोर्ट ने दोबारा जांच करने का निर्देश दिया. इसके बाद, 29 अगस्त को कोर्ट के सामने FDA की रिपोर्ट पेश की गई. रिपोर्ट में पाया गया कि पांचों आउटलेट्स पैमानों का पालन कर रहे हैं. हालांकि, कोर्ट ने FDA के असिस्टेंट कमिश्नर द्वारा मामले को संभालने के तरीके पर आपत्ति जताई. बेंच ने कहा कि अधिकारी ने किसी 'नौसिखिए' की तरह काम किया. उन्होंने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (FSS) एक्ट, 2006 के तहत बिना सही वजह के आदेश जारी कर दिए. कोर्ट ने कहा,
आप हमारा आदेश नहीं समझते, आप एक्ट भी नहीं समझते. तो आप अपने नियम नहीं पढ़ते. आप कानून नहीं पढ़ते. आप हमारा आदेश नहीं पढ़ते. लेकिन आप बस कार्रवाई कर देते हैं. साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई उचित और संतुलित होनी चाहिए.
बेंच ने आगे कहा,
मच्छर को मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें. हम चाहते थे कि आप अपनी कार्रवाई सोच-समझकर करें. क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं? कि आप कुछ भी कर सकते हैं? रेगुलेटरी सिस्टम को नियमों का पालन करने और सुधार को बढ़ावा देना चाहिए, न कि तुरंत कामकाज बंद करने के लिए मजबूर करना चाहिए.
इसके बाद बेंच ने निर्देशों का पालन न करने पर अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी. तब FDA ने कहा कि वो अपना 21 अगस्त वाला सस्पेंशन ऑर्डर वापस लेने को तैयार हैं.
CIPLA के मामले पर भी FDA को फटकार29 अगस्त को FDA को एक और मामले में कोर्ट की फटकार लगी. दरअसल FDA ने पुणे के वाडकी में सिप्ला की 'कैरीइंग एंड फॉरवर्डिंग' फैसिलिटी का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया था. यह कार्रवाई रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग, स्टोरेज और रिकॉल से जुड़ी अनियमितताओं के कारण 27 अगस्त से लागू की गई थी. मामले पर सुनवाई करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने कहा कि FDA ने न्याय के नेचुरल सिद्धांतों के खिलाफ काम किया है.
सुनवाई में CIPLA ने कहा कि FDA के आदेश में उसके प्रोडक्ट्स की सेफ्टी, क्वालिटी या असर को लेकर कोई चिंता नहीं जताई गई थी. न ही इसमें मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा शामिल था. आखिरकार FDA ने कहा कि वह लाइसेंस रद्द करने का आदेश तुरंत वापस ले लेगा. वह कंपनी को एक नया कारण बताओ नोटिस जारी करेगा. इसके बाद ही कोई आदेश पारित किया जाएगा.
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छुट्टी के दिन कंपनी को ईमेल भेजासिप्ला की ओर से पेश सीनियर वकील आबाद पोंडा ने बताया कि FDA ने कंपनी को एक ईमेल भेजकर 26 अगस्त को सुनवाई के लिए विभाग के सामने पेश होने का निर्देश दिया था. इस दिन पब्लिक हॉलिडे था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पोंडा ने कहा,
उस दिन कंपनी का कोई प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं था और उन्होंने सुनवाई टालने का अनुरोध किया था. हालांकि, FDA ने बिना सुनवाई का मौका दिए उसी दिन आदेश पारित कर दिया.
इस पर FDA की ओर से पेश वकील पीपी काकड़े ने तर्क दिया कि कानून कंपनी को सुनवाई का अधिकार नहीं देता है. हालांकि, बेंच इससे सहमत नहीं थी. बेंच ने सवाल किया कि विभाग ने दवा कंपनी को ईमेल क्यों भेजा औऱ उसने सुनवाई के लिए प्रतिनिधि भेजने को क्यों कहा, खासकर छुट्टी के दिन. हाईकोर्ट ने कहा,
आप (FDA) सराहनीय और प्रशंसनीय काम कर रहे हैं. लेकिन अब आप हद से आगे बढ़ रहे हैं. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. आपने गलत किया है, और अब आपको इस मुद्दे को सुलझाना होगा.
बेंच ने पाया कि FDA ने मनमाना व्यवहार किया है. और उसने गलत प्रक्रिया अपनाकर और लाइसेंस रद्द कर दिया. हाईकोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या FDA का कंपनी को ईमेल करना और उसी दिन सुनवाई के लिए प्रतिनिधि भेजने का निर्देश देना निष्पक्ष और पारदर्शी था? बेंच ने सवाल किया कि अगर कोर्ट भी ऐसा ही करे, तो क्या यह सही होगा? सरकार छुट्टियों के दिन काम न कर पाने का हवाला देकर काम करने से मना कर देती है. या वो तारीख आगे बढ़ाने की मांग करती है. अगर ऐसा है तो फिर राज्य के विभाग ने अवकाश के दिन ऐसा आदेश कैसे जारी कर दिया?
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