मूड का क्या है? पल-पल में बदलता है लेकिन चुनाव तो पांच साल में एक बार होते हैं. इस पांच साल के अंदर देश की जनता का मूड भी बार-बार बदलता ही है. लेकिन ये जानने की दिलचस्पी तो होती है कि अगर आज चुनाव हो जाएं तो क्या होगा? क्या लोग सरकार से खुश हैं? क्या विपक्ष के उठाए मुद्दे जनता को खींच पा रहे हैं. उन पर असर डाल रहे हैं? भारत में तो चुनाव आयोग और उसकी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर भी सवाल उठाए जाते हैं. इन सवालों पर जनता क्या सोचती है?
'लोकतंत्र खतरे में है', 'चुनाव आयोग भरोसेमंद है या नहीं?', सर्वे में ऐसे 5 सवालों के ये जवाब मिले
इंडिया टुडे-सी वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन सर्वे' में अगर आज लोकसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को फिर से जीत मिलती दिख रही है.

इन सब सवालों के जवाब इंडिया टुडे-सी वोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे में जानने की कोशिश की गई है. ये सर्वे कहता है कि अगर आज लोकसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को 261 सीटें मिलेंगी. वहीं कांग्रेस 106 सीटें पा सकती है. यह तो वोटरों से जुड़ा मामला है और जब चुनाव होंगे तब इसकी सच्चाई पता चल ही जाएगी लेकिन कुछ ऐसे सवाल भी हैं, जो इस वोटिंग से अलग होते हैं. इसमें जनता अपना मत प्रकट करती है.
– जैसे, पहला सवाल यही लें कि भारत में लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति के बारे में आप क्या सोचते हैं?
MOTN के सर्वे में 46.7% लोगों ने जवाब दिया है कि ‘हां, लोकतंत्र खतरे में है.’ 41.6% ने कहा कि ‘नहीं, लोकतंत्र खतरे में नहीं है.’ 11.7 फीसदी लोगों का कहना है कि ‘पता नहीं. इस पर कुछ कह नहीं सकते.’
– फिर दूसरा सवाल, ‘क्या आपको लगता है कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं?’
51.9% लोगों ने जवाब दिया कि हां, होते हैं. ‘नहीं’ 40.9% लोगों ने कहा है. ‘पता नहीं या कह नहीं सकते’ का जवाब 7.1% लोगों ने दिया.
– तीसरे सवाल पर आते हैं. पिछले एक साल में भारत के चुनाव आयोग पर आपका भरोसा बढ़ा है या घटा है?
43.3% लोगों ने कहा कि उनका भरोसा बढ़ा है. वहीं, 38 फीसदी लोगों ने कहा कि आयोग पर उनका भरोसा कम हुआ है. 9.1 फीसदी लोगों ने चुनाव आयोग पर अपनी कोई राय नहीं बदली है. पहले जैसा था, वैसा ही अब भी है. 9.5 फीसदी लोग इस पर कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं.
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– चौथा सवाल, चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में मतदाता सूचियों से कई नाम हटा दिए गए. इस कवायद के बारे में आपका क्या विचार है?
60.2% लोगों ने कहा कि फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाना जरूरी था. 19.5 फीसदी लोगों ने कहा कि SIR जरूरी था, लेकिन इसे पक्षपात के साथ किया गया. 10.5 फीसदी लोग बोले कि इसे कुछ खास समूहों के मतदाताओं के नाम वोटर्स लिस्ट से हटाने के लिए किया गया. 9.8 फीसदी लोगों ने इस पर अपनी कोई राय नहीं रखी.
– आखिरी सवाल ये कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रदर्शन को आप किस तरह आंकते हैं?
30.1 फीसदी लोगों ने तो ‘बेहतरीन’ की रेटिंग दी है. 21.2 फीसदी लोगों ने सिर्फ ‘अच्छा’ कहा. 17.3 प्रतिशत लोगों ने पीएम मोदी के प्रदर्शन को ‘औसत’ बताया. ‘खराब’ कहने वालों का आंकड़ा 11.7 फीसदी का रहा. वहीं, 15.5 फीसदी लोगों ने ‘बहुत खराब’ रेटिंग दी.
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