भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे कर्नाटक सरकार के मंत्री बी नागेंद्र ने अपने आंसुओं को थामते हुए आखिरकार इस्तीफे का ऐलान कर दिया. उनके खिलाफ विपक्षी दल बीजेपी और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने मोर्चा खोल रखा था. दोनों ही पार्टियां नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रही थीं. डीके शिवकुमार सरकार में पदभार संभालने के 25 दिनों के भीतर ही उन्होंने ये पद त्याग दिया. अपने इस्तीफे के ऐलान में नागेंद्र ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि दलित होने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया.
'दलित हूं, इसलिए...', डीके शिवकुमार के मंत्री ने 25 दिन में इस्तीफा क्यों दे दिया?
कर्नाटक सरकार के मंत्री बी नागेंद्र ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच 25 दिन बाद फिर मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. महर्षि वाल्मीकि विकास निगम के 89.63 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले में विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था.

ये दूसरी बार है, जब नागेंद्र ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है. इससे पहले सिद्दारमैया की सरकार में भी उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद इस्तीफा दे दिया था. प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और डीके शिवकुमार सीएम बने तो कैबिनेट में उनकी वापसी हुई. 3 अगस्त को वह मंत्री बने और 25 अगस्त को इस्तीफा देकर फिर कैबिनेट से बाहर हो गए.
नागेंद्र ने कहा,
आज मैं अपनी मर्जी से मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं. ‘मनुवादियों’ (भाजपा) ने मुझे निशाना बनाया क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि देश में कोई आदिवासी व्यक्ति आगे बढ़े.
उन्होंने सवाल उठाया,
क्या वाल्मीकि लेनदेन में कहीं भी मेरे हस्ताक्षर हैं? मुझे दलित होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है? जब बैंक कथित लेनदेन में शामिल थे तो उन्हें ही क्यों जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. क्या केंद्रीय वित्तमंत्री इसके लिए जिम्मेदार हैं?
आंसू भरी आंखों से नागेंद्र ने कहा कि कर्नाटक के लोग देख रहे हैं. कैसे उनके खिलाफ हर दिन हजारों झूठ बोले जा रहे हैं.
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क्या है मामला?कर्नाटक की दो मुख्य विपक्षी पार्टियां बीजेपी और जेडीएस ने नागेंद्र पर महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के पैसे के गबन का आरोप लगाया है. जबसे वो मंत्री बने हैं, तबसे उनका इस्तीफा मांगा जा रहा था. शिवकुमार सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए बीजेपी और जेडी(एस) ने 1 से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक पैदल मार्च का ऐलान भी किया था लेकिन इससे पहले ही नागेंद्र ने रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को इस्तीफा देकर मंत्रालय छोड़ दिया.
ये विवाद मई 2024 का है. महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के तत्कालीन लेखा अधीक्षक (Accounts Superintendent) पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी. निगम के पैसे को लेकर अनियमितता का आरोप लगाते हुए उन्होंने 6 पन्नों का एक नोट भी छोड़ा था. इसके बाद जांच हुई तो पता चला कि 89.63 करोड़ रुपये निगम के बैंक खाते से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में ट्रांसफर किए गए थे. ये पैसे बाद में कई और बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए. इस मामले ने प्रदेश में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था.
उस समय नागेंद्र जनजातीय कल्याण मंत्री थे. आरोपों की आंच उन तक आई तो जून 2024 में उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. इसी महीने 3 अगस्त 2026 को योजना और सांख्यिकी मंत्रालय के पोर्टफोलियो के साथ उन्हें फिर से कर्नाटक सरकार में शामिल किया गया था. हालांकि, उनका ये दूसरा कार्यकाल सिर्फ 25 दिनों तक रह पाया.
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