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कमरों में जाने के लिए सीढ़ी ही नहीं, बल्लियों पर टिकी छत, इतना 'एडवांस' स्कूल कहां है?

मध्यप्रदेश के अशोकनगर के एक सरकारी स्कूल में 14 साल पहले 6 लाख रुपये खर्च कर पहली मंजिल पर दो कमरे बनाए गए, लेकिन वहां पहुंचने के लिए सीढ़ियां या रैंप नहीं बनाया गया.

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स्कूल की छत को बल्लियों और पाइप के सहारे टिकाया गया है. (सांकेतिक फोटो- India Today)

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  • मध्य प्रदेश के बमनावर के सरकारी स्कूल में 14 साल पहले 6 लाख रुपये खर्च करके छत पर दो कमरे बनाए गए, लेकिन उनकी पहुंच के लिए कोई सीढ़ी या रैंप नहीं बनाया गया।
  • स्कूल की 62 साल पुरानी बिल्डिंग की छत में दरारें आ गई हैं, जिससे कक्षाएं नहीं चलतीं और मिड-डे मील खाना खतरे में होता है, जबकि मरम्मत के लिए अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे गए।
  • जिला प्रशासन ने मामले की जांच और निरीक्षण करवाया है, और फंड मिलने पर क्षतिग्रस्त बिल्डिंग को तुरंत दुरुस्त कराने का फैसला लिया है।

क्या आप सोच सकते हैं कि लाखों रुपये खर्च करके छत पर कमरे बनाए जाएं लेकिन वहां तक जाने के लिए सीढ़ी ही न बने. ऐसे कमरे फिर किस काम के हो सकते हैं? मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल में यही हुआ. 14 साल पहले स्कूल की पहली मंजिल पर 6 लाख रुपये खर्च करके दो कमरे बनाए गए. लेकिन सीढ़ियां या कोई रैंप बना ही नहीं. अब ये कमरे किसी काम के नहीं रहे. बात सिर्फ इतनी नहीं है. स्कूल की 62 साल पुरानी बिल्डिंग की छत चटक गई है. उसे बल्लियों और पाइप के सहारे टिकाया गया है.

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वैसे तो दरारों वाली छत के नीचे कोई क्लास नहीं चलती, लेकिन मिड-डे मील का खाना भी यहीं बनता है. कमरा खाली और खुला रहता है. इसलिए कई बार बच्चे यहीं बैठकर खाना भी खाते हैं. ऐसे में किसी अनहोनी की आशंका लगातार बनी रहती है. 

दैनिक भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे को दावत देती ये बिल्डिंग जिस स्कूल की है, वो ईसागढ़ के बमनावर में है. स्कूल में क्लास 6 से लेकर 8 तक के 125 बच्चे पढ़ते हैं. टूटी छत वाली बिल्डिंग में क्लासेज नहीं चलती हैं. स्कूल के प्रभारी का कहना है कि अधिकारियों को कई बार इसे ठीक कराने के लिए चिट्ठी लिखी गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

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छत पर कमरे बना दिए, सीढ़ी नहीं बनाई

इससे भी ज्यादा हैरान करते हैं स्कूल बिल्डिंग की छत पर बने दो कमरे, जिन तक जाने के लिए कोई छत नहीं है. 14 साल पहले ये कमरे 6 लाख रुपये खर्च करके बनाए गए थे. लेकिन कोई सीढ़ी या रैंप नहीं बनाया गया. अब ये कमरे लावारिस हालत में बिना इस्तेमाल के पड़े हैं. ये सब देखकर स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सवाल फिर उठा है. लेकिन ऐसा क्यों है, इसका संतोषजनक जवाब किसी के पास नहीं है.

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जिला कलेक्टर साकेत मालवीय से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने एकदम सरकारी जवाब दिया कि मामले की जांच कराएंगे. अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी. अशोकनगर के डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर (डीपीसी) राहुल शर्मा ने कहा कि वो भी मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे. खतरे को दावत देने वाली बिल्डिंग को गिराया जाएगा.

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ये खबर सामने आने के बाद राहुल शर्मा इंजीनियर को लेकर स्कूल पर गए भी. उन्होंने स्कूल की बिल्डिंग और किचन की जांच की. लोगों से पूछताछ की. कागज तैयार किया और बोले कि जैसे ही स्कूल के लिए स्वीकृत फंडिंग आती है, क्षतिग्रस्त बिल्डिंग को तत्काल दुरुस्त कराया जाएगा. 

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