कोच्चि के चेरानल्लूर में एक Mercedes-Benz की टक्कर से 55 वर्षीय जयबालकृष्णन की मौत हो गई थी. 25 अक्टूबर को हुई इस घटना के वक्त कार एक नाबालिग चला रहा था. मामले में नाबालिग के पिता को सह-आरोपी बनाया गया. वो खुद एक जज हैं. लेकिन गुरुवार, 5 नवंबर को केरल हाई कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी. यानी गिरफ्तारी से पहले ही जेल से राहत दे दी गई.
Mercedes Crash: आरोपी के जज पिता को बेल मिली, मृतक की बेटी बोली- 'न्याय नहीं सीने में खंजर घोंप दिया'
Kerala Mercedes Crash: Mercedes-Benz क्रैश में जान गंवाने वाले मृतक की बेटी ने कहा कि आरोपी के पिता को अग्रिम जमानत मिलने से उनका परिवार निराश है. वह सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे.

ये राहत जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने दी. उन्होंने कहा कि कि ऐसा कोई संकेत नहीं है, जिससे लगे कि ऑफिसर चल रही जांच में सहयोग नहीं करेंगे. मगर सेशन जज को मिली जमानत से जयबालकृष्णन का परिवार पूरी तरह टूट गया है. मृतक की बेटी भद्रा कीर्ति ने कहा कि ये सब उनके पिता की अंतिम संस्कार की रस्में पूरी होने से ठीक एक दिन पहले हुआ.
NDTV से बात करते हुए भद्रा कीर्ति ने कहा, "कल मेरे पिता की अंतिम रस्में पूरी हो जाएंगी. हमें अपने परिवार के लिए कुछ न्याय मिलने की उम्मीद थी. मगर, ऐसा नहीं हुआ."
आरोपी जज को बेल मिलने पर उन्होंने कहा, "ये फैसला मेरे सीने में खंजर घोंपने जैसा है."
परिवार ने अब हाई कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है.
क्यों दी कोर्ट ने पिता को जमानत?नाबालिग के पिता ने कोर्ट में एंटीसिपेटरी बेल याचिका में कहा था कि उन्हें मालूम नहीं पड़ा कि बेटा कब गाड़ी लेकर गया. उन्हें कॉल आने पर घटना का पता चला था. लेकिन गाड़ी उनके नाम थी और वे आरोपी के पिता थे. इसलिए FIR में उनका भी नाम आया था. वहीं मृतक के परिवार ने जज के दावों का विरोध किया.
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लेकिन हाई कोर्ट ने बेल ना देने से जुड़ी याचिका पर सवाल पूछा कि क्या ज्यूडिशियल ऑफिसर जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करने से इनकार करेंगे. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा,
“इस अदालत के एक जिम्मेदार अधिकारी के तौर पर क्या आपको लगता है कि एक जिला जज सहयोग नहीं करेंगे? आप जमानत अर्जी का विरोध कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि आप चाहते हैं कि उनकी गिरफ्तारी हो.”
अदालत ने सेशन जज की गिरफ्तारी की जरूरत पर सवाल उठाया. कहा,
“उनके घर की तलाशी पहले ही ली जा चुकी है. जांचकर्ताओं ने वहां से सामान भी जब्त कर लिया है. आपके पास ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे लगे कि उन्होंने सहयोग नहीं किया है.”
जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने आगे कहा,
“यह कोई विशेष मामला क्यों है? 16 पन्नों की आपत्ति? इसमें कोई शक नहीं कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला है. मान लेते हैं कि इस चरण में आपके सभी आरोप सच हैं. और शुरुआती नजर में अपराध बनता है, जिसमें BNS की धारा 105 भी शामिल है. आप उन्हें गिरफ्तार क्यों करना चाहते हैं? आप उन्हें हिरासत में क्यों लेना चाहते हैं?”
वहीं, नाबालिग आरोपी भी अभी जमानत पर है. रिपोर्ट के मुताबिक, एर्नाकुलम के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने दुर्घटना के एक दिन बाद यानी 26 अक्टूबर को नाबालिग को जमानत दे दी थी.
राज्य सरकार और जयबालकृष्णन के परिवार ने आरोपी किशोर को मिली जमानत रद्द करने के लिए अपील दायर की है. ये अभी सेशन कोर्ट में लंबित है.
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