कोलकाता के लॉ कॉलेज की जिस वाइस-प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम के दफ्तर का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने गंगाजल से ‘शुद्धीकरण’ किया था, उन्होंने अपने इस्तीफे की बात से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह कॉलेज में अपनी सेवाएं जारी रखेंगी. राज्य के शिक्षामंत्री ने भी कहा है कि उन्हें तरन्नुम का इस्तीफा नहीं मिला है. एक दिन पहले छात्रों के एक ग्रुप से टकराव के बाद वाइस प्रिंसिपल ने कथित तौर पर इस्तीफा दिया था. बाद में ये भी कहा था कि वो इस्तीफा अपनी मर्जी से नहीं दे रही हैं बल्कि उन पर दबाव बनाया गया है. तरन्नुम ने आरोप लगाया कि कॉलेज की गवर्निंग बॉडी (GB) के प्रेसिडेंट कौस्तव बागची ने छात्रों को उनके खिलाफ भड़काया, जिसके बाद कॉलेज में करीब 24 घंटे तक तनाव बना रहा.
ABVP ने जिस वाइस प्रिंसिपल का दफ्तर गंगाजल से धोया, वो इस्तीफे से पलट गईं
Kolkata के सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज की वाइस-प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम ने इस्तीफे की खबरों को खारिज कर दिया. यह पूरा विवाद लॉ के छात्रों की अटेंडेंस को लेकर शुरू हुआ था. ABVP के छात्रों ने उनके ऑफिस को गंगाजल से 'शुद्ध' किया. क्या है पूरा मामला?

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा विवाद लॉ के छात्रों की अटेंडेंस को लेकर शुरू हुआ था. सेमेस्टर परीक्षा में बैठने के लिए तय अटेंडेंस पूरी नहीं करने वाले छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. मोहम्मदी तरन्नुम के मुताबिक, उन्होंने 9 सितंबर को इस मुद्दे पर पैरेंट्स-टीचर मीटिंग भी बुलाई थी, ताकि छात्रों की समस्या का हल निकाला जा सके. तरन्नुम ने कहा,
"वाइस-प्रिंसिपल के तौर पर मुझे अपने छात्रों पर पूरा भरोसा था. मैंने अटेंडेंस से जुड़ी समस्याओं पर बात करने के लिए 9 सितंबर को पैरेंट्स-टीचर मीटिंग बुलाई थी. लेकिन बाहरी लोगों के बहकावे में आकर कुछ छात्रों ने विरोध करना शुरू कर दिया और परीक्षा में बैठने की इजाजत की मांग करने लगे."
उन्होंने आरोप लगाया कि GB प्रेसिडेंट ने उन्हें कम अटेंडेंस वाले छात्रों को भी एग्जाम में बैठने की इजाजत देने के लिए कहा था. तरन्नुम ने कहा,
"जब मैंने GB प्रेसिडेंट को बताया तो उन्होंने मुझे 40% अटेंडेंस वाले छात्रों को इजाजत देने का निर्देश दिया, जबकि बार काउंसिल ने कम से कम 65% अटेंडेंस जरूरी तय की है."
तरन्नुम ने कहा कि यह नियम बार काउंसिल ऑफ इंडिया का है और कॉलेज प्रशासन इसे अपनी मर्जी से नहीं बदल सकता.
इसके बाद कॉलेज में छात्रों का विरोध बढ़ गया. तरन्नुम का आरोप है कि छात्रों के एक ग्रुप ने उन्हें उनके ऑफिस में रहने के लिए मजबूर किया. उन्होंने यह भी कहा कि बिजली और पानी की सुविधा बंद कर दी गई थी. रात के दौरान दूसरे फैकल्टी मेंबर्स को भी कॉलेज से जाने के लिए कहा गया. तरन्नुम ने कहा कि सुबह करीब 4:30 बजे अन्य संकाय सदस्यों को 'चक्री बचाते होले बेरिया जान' (अगर आप अपनी नौकरी बचाना चाहते हैं तो कॉलेज छोड़ दें) कहकर धमकी देने के बाद परिसर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था. तरन्नुम ने इस बारे में हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट और कलकत्ता यूनिवर्सिटी को सूचित किया. उन्होंने कहा,
मैंने GB प्रेसिडेंट से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मुझे उनसे कोई मदद नहीं मिली.
तरन्नुम के मुताबिक, उन्होंने मदद के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को ईमेल किया. इसके कुछ ही देर बाद पुलिस कॉलेज पहुंची और उन्हें बाहर निकाला.
'मैंने इस्तीफा नहीं दिया'11 सितंबर की दोपहर को वाइस प्रिंसिपल ने लिखित इस्तीफे पर दस्तखत किए. हालांकि, कॉलेज से निकलते समय उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्तीफा नहीं दिया. उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया. शनिवार, 12 सितंबर को अपने घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने कहा कि वो अपनी सेवा जारी रखेंगी. वहीं, हायर एजुकेशन मिनिस्टर जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि उन्हें अब तक तरन्नुम का इस्तीफा नहीं मिला है.
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ABVP ने कमरे का किया 'शुद्धिकरण'तकरीबन 23 घंटे तक घेराव के बाद जब तरन्नुम ने कथित इस्तीफा दिया तो प्रदर्शन करने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों ने इसे अपनी जीत बताया और वाइस-प्रिंसिपल के ऑफिस में गंगाजल छिड़ककर, अगरबत्ती जलाकर 'शुद्धीकरण' किया. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, लॉ के फर्स्ट ईयर के छात्र विनीत शर्मा ने कहा,
हम उस जगह को शुद्ध करना चाहते थे, इसलिए हमने गंगाजल छिड़का और अगरबत्ती जलाई. हमें उनके कमरे से पिछली व्यवस्था का असर खत्म करना था.
विनीत ने आरोप लगाया कि पिछली व्यवस्था में तृणमूल कांग्रेस की रैलियों में जाने वाले छात्रों को फायदा मिलता था. उन्होंने कहा कि ऐसे छात्रों को 100% अटेंडेंस तक दी जाती थी. वहीं, छात्रों ने बिजली और पानी की सप्लाई काटने के आरोपों से इनकार किया है.
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