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US-इजरायल को नसीहत, फिलिस्तीन-ईरान को 'सपोर्ट', ब्रिक्स में बदल गया भारत का स्टैंड?

BRICS Summit 2026 के जॉइंट स्टेटमेंट पर दुनिया भर की नजर है. इसमें इजरायल का सीधे नाम लेकर फिलिस्तीन और लेबनान के हक की बात की गई. स्टेटमेंट में अमेरिका या डॉनल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना उनके कामों की आलोचना की गई.

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BRICS सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों का ग्रुप फोटो. (ITG)

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  • नई दिल्ली में आयोजित 18वीं BRICS Summit 2026 के ज्वॉइंट स्टेटमेंट में इजरायल को सीधे नाम लेकर फिलिस्तीन और लेबनान की कब्जाई जमीन छोड़ने का अनुरोध किया गया।
  • इस ज्वॉइंट स्टेटमेंट को सभी 11 देशों की सहमति से जारी किया गया, जबकि विभिन्न देशों के आपसी मतभेद और सशंकाएं मौजूद थीं।
  • BRICS की इस साझा घोषणा से भारत को कूटनीतिक सफलता मिली और अब इसके पालन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आगे के कदम उठाए जाएंगे।

नई दिल्ली में हुई 18वीं BRICS Summit 2026 का ज्वॉइंट स्टेटमेंट शनिवार, 12 सितंबर को जारी हुआ. साझा बयान में कई अहम और गंभीर मुद्दों पर सख्त टिप्पणी की गई. इसमें भारत के मित्र देश इजरायल का सीधे नाम लेकर उससे इंटरनेशनल कानून का सम्मान करने के लिए कहा गया. लेबनान के मसले पर सीजफायर करने पर जोर दिया गया. इजरायल को फिलिस्तीन और लेबनान की कब्जाई जमीन छोड़ने के लिए कहा गया. एकतरफा टैरिफ और सैंक्शन की भी आलोचना की गई, लेकिन इसमें अमेरिका और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया गया.

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ज्वॉइंट स्टेटमेंट में सभी 11 देशों का एकमत होना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है.  इस बार BRICS की अध्यक्षता और मेजबानी भारत ने नई दिल्ली में की. ऐसे में जॉइंट स्टेटमेंट में शामिल सभी बातों पर सभी ब्रिक्स सदस्य देशों को रजामंद करवाना भारत के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था.

ज्वॉइंट स्टेटमेंट में शब्दों का चुनाव बहुत सावधानी से किया गया. लिहाजा, यूनाइटेड नेशंस (UN) के नियमों से बाहर जाकर लगाए आर्थिक प्रतिबंधों की आलोचना जरूर की गई पर अमेरिका या डॉनल्ड ट्रंप का जिक्र तक नहीं छेड़ा. इसी तरह ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों की निंदा की गई, लेकिन इन हमलों को लेकर ईरान और अमेरिका दोनों का नाम नहीं लिया.

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इजरायल को चुभेगी आजाद फिलिस्तीन की डिमांड

इजरायल के मामले में ऐसा नहीं हुआ. स्टेटमेंट में इजरायल का सीधे तौर पर नाम लिया गया. फिलिस्तीनियों को जबरन उनके घरों और इलाके से विस्थापित करने का कड़ा विरोध किया गया. इजरायली कब्जे में शामिल फिलिस्तीन की राजधानी पूर्वी येरूशलम, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी को आजाद करने की डिमांड की गई. इजरायल ने लेबनान में जो इलाके कब्जाए, वहां से कब्जा छोड़ने के लिए भी कहा गया. इजरायल से गाजा में मानवीय मदद पहुंचाने में रोड़ा ना बनने की भी मांग की गई.

स्टेटमेंट में यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) और यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) के प्रस्ताव और अरब पीस इनिशिएटिव के अनुसार 1967 की इंटरनेशनल लेवल पर मानी गई सीमाओं के अंदर एक संप्रभु, स्वतंत्र और कामयाब फिलिस्तीन देश बनाने की डिमांड की गई, जिसमें गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक शामिल हैं, और जिसकी राजधानी ईस्ट येरुशलम है, ताकि फिलिस्तीन और इजरायल शांति और सुरक्षा के साथ रह सकें.

लेबनान के मामले में भी BRICS देशों ने सख्त रुख अपनाया. सभी देशों की ओर से कहा गया कि वे लेबनान में हुए सीजफायर का स्वागत करते हैं. साथ ही दोनों पक्षों से इसे पूरी तरह से मानने की अपील भी की. पूरी स्टेटमेंट में इजरायल का नाम लेकर उन सिद्धांतों का जिक्र किया गया, जो उसे जरूर चुभेगा. उससे लेबनान सरकार के साथ हुए एग्रीमेंट का सम्मान करने के लिए कहा. लेबनान से इजरायली सेना को हटाने की सीधी मांग की गई.

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बिना नाम लिए अमेरिका और ट्रंप पर निशाना

BRICS के ज्वॉइंट स्टेटमेंट में ऐसी कई बातों को जिक्र किया गया, जो साफ तौर पर अमेरिका और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ईरान और रूस के खिलाफ की गई कार्रवाईयों की ओर इशारा करती हैं. जैसे- वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) के खिलाफ जाकर एकतरफा टैरिफ लगाने पर चिंता जताना. इसे ट्रंप की टैरिफ लगाने वाली नीतियों के खिलाफ देखा जा सकता है.

अमेरिका एकतरफा तरीके से अपने विरोधी देशों के खिलाफ ‘सैंक्शंस और टैरिफ का खेल’ खेलता है. इसका सबसे ज्यादा दंश BRICS के दो देश ईरान और रूस को झेलना पड़ता है. अमेरिका की ओर से दोनों देशों पर भरपूर सैंक्शंस लगाए जाते रहे हैं. रूस और ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को भी अमेरिकी प्रतिबंधों की धमकी दी जाती है.

स्टेटमेंट में भले ही अमेरिका का नाम नहीं लिया गया हो, लेकिन बयान से साफ है कि इसमें ईरान और रूस का समर्थन किया गया है. डॉनल्ड ट्रंप भी BRICS को खासा पसंद नहीं करते हैं. वो इस ग्रुप को अमेरिका विरोधी तक बता चुके हैं. यहां तक की उन्होंने इस ग्रुप के देशों पर 10% ज्यादा टैरिफ लगाने की धमकी भी दी थी. माना जाता है कि डॉनल्ड ट्रंप को ब्रिक्स, डॉलर की ताकत को कम करने वाला ग्रुप लगता है.

ईरान और UAE को एक पाले में किया

BRICS की ज्वॉइंट स्टेटमेंट में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को एक साथ देखना दिलचस्प है. वेस्ट एशिया में चल रही जंग में दोनों देशों का पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ है. इसके बावजूद, दोनों ही देश इस जॉइंट स्टेटमेंट पर सहमति बना पाए. इसलिए इसे भारत की अच्छी कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है. ईरान और UAE को एक पाले में लाना सबसे मुश्किल दिख रहा था.

BRICS Summit 2026 के ज्वॉइंट स्टेटमेंट जारी होने से पहले ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि इसे जारी करना मुश्किल होगा, क्योंकि ग्रुप में शामिल रूस, ईरान, UAE और चीन के मत अलग-अलग हो सकते हैं.

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ईरान, रूस और चीन पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के लिए सख्त लहजा रखते है. जबकि, वेस्ट एशिया में चल रही जंग को लेकर भी सऊदी अरब और UAE का रुख अलग है. कयास ऐसे भी लग रहे थे कि रूस, ईरान और चीन, अमेरिका के लिए कड़ी भाषा के इस्तेमाल पर जोर दे सकते हैं. ब्रिक्स के अन्य देश ऐसी भाषा के विरोध में खड़े हो सकते थे.

क्या बदल गया भारत का स्टैंड?

जॉइंट स्टेटमेंट में इजरायल को लेकर कड़ा रुख भारत की पुरानी प्रतिबद्धता को दोहराता है. फिलिस्तीन और इजरायल को लेकर ‘टू स्टेट सॉल्यूशन’ ही भारत का हमेशा से आधिकारिक स्टैंड रहा है. भारत ने फिलिस्तीन और इजरायल दोनों को आजाद मुल्क के तौर पर मान्यता दी हुई. इस मामले में भारत आधिकारिक तौर पर फिलिस्तीन और इजरायल के उन बॉर्डर को मान्यता देता है, जो 1967 के छह दिन के युद्ध (Six Day War) से पहले मौजूद थे.

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