मायावती ने आखिरकार साफ कर दिया कि उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश और ईशान आनंद को बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) में कोई भी छोटा या बड़ा पद नहीं मिलने वाला है. मायावती के मुताबिक, पार्टी को परिवारवाद से मुक्त रखने के लिए उन्होंने ये फैसला लिया है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा सुप्रीम के इस ऐलान ने यूपी की सियासत में हलचल मचा दी है. आकाश आनंद वही हैं, जिन्हें मायावती पहले अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बता चुकी हैं.
मायावती ने की 'प्रतिज्ञा'- 'भाई आनंद के बेटों की BSP में अब कोई पद नहीं मिलेगा'
मायावती ने साफ कर दिया है कि उनके भाई आनंद कुमार के बेटों आकाश और ईशान आनंद को बीएसपी में कोई छोटा-बड़ा राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा. वहीं, उनकी बेटी दीपिका आनंद की ईमानदारी और कार्यक्षमता को देखते हुए भविष्य में पार्टी में अहम जिम्मेदारी देने की संभावना खुली रखी गई है.

हालांकि, आकाश के लिए उनके फैसले पिछले तीन साल में लगातार बदलते रहे. बीएसपी का राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर बनाने और हटाने के कई बदलते फैसलों के बाद मायावती ने आकाश आनंद की पार्टी में किसी भी राजनीतिक संभावना का रास्ता अब बंद कर दिया. इससे पहले 10 सितंबर को ‘एक्स’ पर पोस्ट करके उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी से ‘पूरी तरह आजाद’ कर दिया था क्योंकि कथित तौर पर उन्होंने अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आकर उनकी ‘एक्स’ पोस्ट को रिपोस्ट नहीं किया.
आनंद परिवार से नई एंट्रीहालांकि, मायावती ने आनंद परिवार के लिए पार्टी में सारे रास्ते बंद नहीं किए. उन्होंने आकाश आनंद की बहन दीपिका को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वह ईमानदार हैं. वफादार हैं और उनकी कार्यक्षमता के आधार पर आने वाले समय में उन्हें वही जिम्मेदारी दी जा सकती है, जो फिलहाल उनके पिता निभाते हैं.
12 सितंबर, शनिवार को ‘एक्स’ पर लिखी एक लंबी पोस्ट में मायावती ने कहा कि पार्टी के संस्थापक कांशीराम की तरह ही उन्होंने अपने परिवार के लोगों को पार्टी के कामों तक सीमित रखकर उन्हें सांसदी, विधायकी, मंत्री पद या अन्य किसी भी राजनैतिक लाभ के पदों से हमेशा दूर रखा है. सगे भाई आनंद कुमार के पार्टी में होने पर सफाई देते हुए मायावती ने कहा कि अविवाहित होने के नाते उन्हें मजबूरी में अपने सगे भाई-बहनों में सबसे छोटे आनंद कुमार को साथ रखने की जरूरत पड़ी है. वो उनकी देखभाल करते हुए लंबे समय से पार्टी में कई अहम जिम्मेदारियां निभा रहे हैं.
अंतिम फैसला और प्रतिज्ञामायावती के मुताबिक, अब इसका फायदा आगे उनके (आनंद के) परिवार के लोग भी उठाएं ये पार्टी के हित में नहीं होगा. उन्होंने कहा,
आज मेरा अंतिम यही फैसला और प्रतिज्ञा भी है कि इसके एवज में अब आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बीएसपी में किसी भी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा.
मायावती ने आनंद कुमार की बेटी के लिए जरूर पार्टी में रास्ते खुले रखे हैं. उन्होंने आगे कहा,
मेरे साथ रहते हुए आनन्द कुमार को मेरी मदद के लिए किसी और पारिवारिक सदस्य की जरूरत पड़ती है तो वह मौजूदा राजनीतिक हालात में आगे चलकर केवल अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं. दीपिका वकालत की पढ़ाई कर रही हैं. आनंद कुमार उनकी ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता आदि को देखकर पार्टी में जरूरत के अनुसार अपनी खुद की जिम्मेदारी भी सौंप सकते हैं.
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'अगर लड़की नहीं होती तो..'मायावती ने कहा कि अगर वो लड़की नहीं होतीं तो कांशीराम की तरह ही अपने भाई-बहनों में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखतीं. लेकिन लड़की होने की वजह से अपनी सुरक्षा से जुड़ी परेशानी से मुक्त होकर पार्टी में मान-सम्मान से आगे बढ़ने के लिए उन्हें मजबूरी में अपने भाई आनंद को साथ रखना पड़ा है. उन्होंने कहा कि आनंद कुमार के बच्चों के बड़े होने और उनके शादीशुदा होने पर उन्हें काफी कुछ झेलना पड़ रहा है लेकिन फिर भी वह किसी मोह के चक्कर में पड़कर पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचने देंगी.
जेन जी से जुड़ेगी बीएसपीमायावती ने पार्टी के पदाधिकारियों को आने वाले विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर खास निर्देश भी दिए. उन्होंने Gen-Z और Gen-Alpha की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पार्टी की राजनीति को नई पीढ़ी से जोड़ने पर जोर दिया. मायावती ने कहा कि बीएसपी का उम्मीदवार चुनते समय वो सर्वसमाज के अच्छे लोगों को ही चुनें और युवा वर्ग को प्राथमिकता दें. इसमें महिला और पुरुष दोनों होने चाहिए.
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