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स्वतंत्र भारद्वाज को अंतरिम जमानत मिली, जंतर-मंतर पर लड़की के पिता का 'सिर फोड़ा' था

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान लड़की के पिता पर कथित हमला और जातिसूचक गालियां देने के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को 10 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत मिली है.

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स्वतंत्र भारद्वाज को मिली जमानत. (फोटो- India Today)

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  • स्वतंत्र भारद्वाज को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी लड़की के पिता पर हमले के आरोप में न्यायिक हिरासत के बाद दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 15 सितंबर को अंतरिम जमानत दी।
  • मामले की पृष्ठभूमि में एक वीडियो में भारद्वाज ने खुद हमला करने की स्वीकारोक्ति की थी, जिससे मामला राजनीतिक रूप लेकर विवादास्पद हो गया और इसके बाद उस पर एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
  • अंतरिम जमानत मिलने के बाद भारद्वाज की नियमित बेल याचिका पर आगे सुनवाई होगी, जबकि पुलिस और राजनेताओं के बीच इस मामले की जांच और राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

स्वतंत्र भारद्वाज को 10 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद जमानत मिल गई है. उस पर जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान एक प्रदर्शनकारी लड़की के पिता की ‘खोपड़ी फोड़ने’ का आरोप है. स्वतंत्र भारद्वाज ने कोर्ट में रेगुलर बेल (नियमित जमानत) की अपील की थी. लेकिन कोर्ट ने उसे अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है.

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स्वतंत्र भारद्वाज को बेल मिली

अंतरिम जमानत तब दी जाती है जब आरोपी की बेल रिट पर सुनवाई हो रही होती है. यानी जब तक बेल पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक आरोपी को जेल जाने से छूट मिल जाती है. रेगुलर जमानत में व्यक्ति को मुकदमा चलने तक पुलिस हिरासत से राहत मिलती है. जमानत की दोनों प्रक्रियाएं ‘शर्तों के साथ’ होती हैं.  

आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज पर एससी-एसटी ऐक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. इसमें उस पर आरोप लगा कि उसने प्रदर्शनकारी लड़की के पिता पर न सिर्फ हमला किया बल्कि उन्हें जातिसूचक गालियां भी दीं. सितंबर की शुरुआत में भारद्वाज का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह खुद पीड़ित की खोपड़ी फोड़ने का दावा कर रहा था. इसके बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और उसकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई थी. 5 सितंबर को भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया था.

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बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशन जज (एएसजे) सौरभ प्रताप सिंह लालेर के सामने भारद्वाज की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई. इसमें कोर्ट ने उसे अंतरिम जमानत का आदेश दिया. 

वकील के तर्क

भारद्वाज के वकील उमेश चंद्र शर्मा ने कोर्ट के सामने तर्क दिया था कि उसे राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया गया, जबकि शिकायतकर्ता ने भी उस पर हमला किया था. वकील ने इस घटना का वीडियो होने का भी दावा किया और आरोप लगाए कि दिल्ली पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की.

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वहीं, प्रदर्शनकारी लड़की के पिता की वकील स्वाति खन्ना ने कोर्ट के सामने दावा किया कि आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज ने उनके खिलाफ जातिवादी गालियों का इस्तेमाल किया और एक वीडियो में ये कबूल किया कि उसी ने लड़की के पिता पर हमला किया था. स्वाति खन्ना ने कोर्ट को ये भी बताया कि इससे पहले स्वतंत्र भारद्वाज ने दिल्ली हाई कोर्ट में भी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था. 

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क्या है मामला?

ये पूरा मामला जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के दौरान का है. एक नाबालिग लड़की के पिता पर स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर हमला किया और उन्हें गालियां दीं. तब शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने सिर्फ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2) (साधारण चोट पहुंचाना) और 126(2) (गलत तरीके से रोकना) के तहत एफआईआर दर्ज की थी. 

इसके बाद सितंबर 2026 के शुरुआत में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सामने आया. इसमें भारद्वाज ये कबूल करता दिखता है कि उसने लड़की के पिता का सिर फोड़ दिया था. उसने दिल्ली के बीजेपी विधायक कपिल मिश्रा पर राजनीतिक संरक्षण देने की बात भी कही. उसने कहा कि कपिल मिश्रा के फोन करने पर ही उसे एक दिन की भी जेल नहीं हुई.

वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के लोगों ने लड़की और उनके पीड़ित पिता को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज एफआईआर में संशोधन किया गया. उस पर मारपीट और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी-एसटी ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. 

पहली एफआईआर में इस ऐक्ट के तहत केस दर्ज न करने पर दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में सफाई दी. कहा कि पहली शिकायत में भारद्वाज पर जातिवादी गाली देने के आरोप का जिक्र नहीं था. बाद में जब शिकायतकर्ता का बयान दोबारा दर्ज किया गया तो उसने जातिसूचक गाली दिए जाने की बात कही. इसके बाद ही एफआईआर में एससी-एसटी ऐक्ट की धाराएं जोड़ी गईं.

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