जिस फोटो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन एक साथ गपशप कर रहे हों, उसमें किसी और पर नजर कहां जाती है? लेकिन एक फोटो प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर बीते दिनों शेयर की. इसमें इन तीनों ताकतवर नेताओं को छोड़ सबकी नजर चौथे चेहरे पर टिक गई. ये फोटो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की है, जब मोदी, पुतिन और जिनपिंग आपस में कुछ बातचीत कर रहे थे.
मोदी-जिनपिंग-पुतिन के बीच दिखा शख्स 'UPSC चैंपियन' निकला, एक-एक बात जानें
BRICS समिट की एक तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन के साथ नजर आए शख्स की पहचान हो गई है.

12 सितंबर की शाम सवा 4 बजे के आसपास पीएम मोदी ने इसे ‘एक्स’ पर शेयर किया था. फोटो में प्रधानमंत्री मोदी चीनी नेता शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का हाथ थामे हैं. तीनों ही नेता मुस्कुरा रहे हैं. इसी ‘सर्किल’ में गले में आईकार्ड डाले एक और शख्स खड़ा है. ऑलिव ग्रीन कोट पहना और गहरे मैरून रंग की टाई लगाया हंसता हुआ चेहरा देख सबकी नजरें उधर ही शिफ्ट हो गईं कि ये है कौन?
अब इसका जवाब मिल गया है. उनकी पहचान सामने आ गई है जो एशिया के तीन ताकतवर नेताओं के साथ खड़े हंस रहे हैं. नाम है- सिद्धार्थ बाबू. केरल के रहने वाले हैं. भारतीय विदेश सेवा के बड़े अधिकारी हैं. UPSC की परीक्षा में उनकी 15वीं रैंक थी. चीन में कई सालों तक पोस्टेड रहे हैं और चीनी भाषा के अच्छे जानकार हैं. अब काफी हद तक क्लियर हो गया होगा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी के साथ वो वहां क्या कर रहे थे.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धार्थ बाबू केरल के कोच्चि के कलूर इलाके के रहने वाले हैं. 1995 से 2006 तक उन्होंने नवनिर्माण सीनियर सेकेंड्री स्कूल में पढ़ाई की. बाद में केरल के कोठामंगलम के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज ‘मार अथानासियस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग’ से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली और दो साल तक एक ई-कॉमर्स कंपनी में नौकरी भी की. लेकिन बाद में नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी करने लगे. पहले प्रयास में तो सफल नहीं हो पाए, लेकिन दूसरी कोशिश में उनकी काफी अच्छी रैंक आ गई. ऑल इंडिया सिविल सर्विस एग्जाम में वह 15वें स्थान पर रहे.
परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने भारतीय विदेश सेवा (IFS) को काम के लिए चुना. आईएफएस चुनने वालों को एक विदेशी भाषा सीखनी पड़ती है. सिद्धार्थ बाबू ने सीखने के लिए मंदारिन भाषा को पकड़ा, जो चीन की भाषा है. 2018 से 2022 के बीच में वह चीन में भी रहे. वह बीजिंग के भारतीय दूतावास में काम कर रहे थे. इस दौरान चीनी भाषा पर उनकी पकड़ और मजबूत हुई. तभी कोरोना महामारी का वक्त भी आया. चीन में सख्त लॉकडाउन लगा. सिद्धार्थ बाबू ने इस समय का सदुपयोग चीनी इतिहास, अर्थव्यवस्था और संस्कृति को गहराई से समझने में किया.
कुल मिलाकर वह भारतीय अफसरों की टोली में चीनी भाषा के अच्छे जानकार बन गए.
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सिद्धार्थ बाबू ने अमेरिका में अंग्रेजी से चीनी और चीनी से अंग्रेजी में अनुवाद का कोर्स भी किया. 2024 में उनकी पोस्टिंग दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में हुई. पहले वो यहां अंडर सेक्रेट्री रहे. अब विदेश मंत्रालय के ईस्ट एशिया डिविजन में डिप्टी सेक्रेटरी हैं. चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के साथ भारत के संबंधों का कामकाज यही विभाग देखता है.
सिद्धार्थ बाबू अब जरूरत पड़ने पर पीएम नरेंद्र मोदी या दूसरे बड़े अधिकारियों के लिए चीनी भाषा में बातचीत के अनुवादक भी बनते हैं.
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