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राजस्थान निकाय चुनाव: BJP कैंडिडेट को सिर्फ एक वोट मिलने की कहानी सामने आई

राजस्थान के परबतसर नगर पालिका के वार्ड 13 में बीजेपी प्रत्याशी कैलाश चंद्र को सिर्फ एक वोट मिला, क्योंकि उनका और उनके परिवार का वोट दूसरे वार्ड में था.

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राजस्थान में दो उम्मीदवारों को सिर्फ एक वोट मिले हैं. (सांकेतिक तस्वीर- India today)

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  • बीजेपी के कैलाश चंद्र ने परबतसर नगर पालिका के वार्ड नंबर 13 से चुनाव लड़ा, जहां उन्हें केवल एक वोट प्राप्त हुआ क्योंकि वे उस वार्ड के मतदाता नहीं थे।
  • कैलाश चंद्र को वार्ड नंबर 12 से चुनाव लड़ना था लेकिन टिकट किसी और को दिया गया, इसलिए पार्टी ने उन्हें वार्ड नंबर 13 में नामांकन भरने को कहा जो उनके लिए वोटर आधार नहीं था।
  • इस घटना के बाद, कैलाश चंद्र का चुनाव परिणाम बीजेपी के उस वार्ड में पार्टी की स्थिति को दर्शाता है और इससे भविष्य में पार्टी के प्रत्याशियों के चयन पर असर पड़ सकता है।

चुनाव में एक-एक वोट अहम है. लेकिन चुनाव में एक ही वोट मिले तो कोई क्या करें? भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दावा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का है. लेकिन राजस्थान में एक छोटे से चुनाव में उसके उम्मीदवार की गजब फजीहत हो गई. पार्षदी के चुनाव में बीजेपी कैंडिडेट को सिर्फ एक वोट मिले. हालात ऐसे बने कि वह खुद का वोट भी खुद को नहीं दे पाए. 

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एक वोट पाने वाले कैंडिडेट्स से ये सवाल तो जरूर होता है, क्या घर वाले भी वोट नहीं दिए? इनके साथ तो यही हुआ. घर वाले भी उन्हें वोट नहीं दे पाए. इनके अलावा, किसान नेता हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के एक उम्मीदवार को भी सिर्फ एक वोट मिला. 

ये दोनों घटनाएं एक ही नगर पालिका की हैं. डीडवाना-कुचामन जिले के परबतसर नगर पालिका में वार्ड नंबर 13 और वार्ड नंबर 20 के दो प्रत्याशी जीवन भर ये चुनाव नहीं भूलेंगे. वार्ड नंबर 13 से कैलाश चंद्र सत्ताधारी पार्टी बीजेपी का झंडा लेकर चुनाव में खड़े थे. राज्य में तो जिसकी सरकार है ही, केंद्र में भी वही सत्ताधारी है. लेकिन, पार्षदी के इस छोटे से चुनाव में पार्टी का रुतबा उनके काम नहीं आया. सिर्फ एक वोट पाकर वह तो ये भी नहीं कह सकते कि ‘चुनाव हारे हैं’.

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लेकिन उनके इस हश्र के पीछे एक कहानी है.

इंडिया टुडे से जुड़े हनीफ खान की रिपोर्ट के मुताबिक, हुआ ये कि कैलाश चंद्र वार्ड नंबर 13 से खड़े तो हो गए लेकिन वोटर वो वार्ड नंबर-12 के हैं. कैलाश वार्ड नंबर 12 से चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन पार्टी ने वहां किसी और को टिकट दे रखा था. वार्ड नंबर 13 में उसके पास कोई प्रत्याशी नहीं था. लेकिन बीजेपी यहां कांग्रेस को एकतरफा नहीं जीतने देना चाहती थी. लिहाजा, बीजेपी नेता मानसिंह किनसरिया ने कैलाश चंद्र को बुलाया. उनसे कहा कि पार्टी को वार्ड-13 में प्रत्याशी नहीं मिल रहा. तुम नामांकन भर दो. मामला सिर्फ खानापूर्ति का था. कैलाश चंद्र ने ऐसा ही किया. वार्ड-13 से बीजेपी के टिकट पर खड़े हो गए.

विडंबना देखिए. वह इस वार्ड के चुनाव में खुद को ही वोट नहीं डाल सकते थे, क्योंकि वोटर तो वह वार्ड नंबर 12 के थे. परिवार भी वार्ड-नंबर 12 में है. परिवार भी कैलाश चंद्र को वोट नहीं दे पाया. नतीजा ये हुआ कि कैलाश चंद्र को चुनाव में सिर्फ एक वोट मिला. अब वो खुद को ये कहकर तसल्ली दे सकते हैं कि जिस वार्ड में पार्टी को प्रत्याशी नहीं मिल रहा था, वहां वो कम से कम एक वोट तो लेकर आए. यानी इस वार्ड में कम से कम पार्टी का एक वोटर तो है. 

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चुनाव के नतीजे.
वार्ड नंबर 20 का हाल

कैलाश चंद्र का चुनावी नतीजा इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है. चर्चा का विषय तो इसी नगर पालिका के वार्ड नंबर 20 का इलेक्शन भी है. खुद को दमदार किसान नेता कहने वाले हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भंवरलाल को वार्ड नंबर 20 से प्रत्याशी बनाया था. चुनाव हुआ तो भंवरलाल को भी सिर्फ एक वोट मिला.  

वैसे माना जाता है कि बेनीवाल की पार्टी का जनाधार शहरों में है. लेकिन नगरपालिका के इस चुनाव में उनके कई उम्मीदवार पार्षदी जीते हैं. ऐसे में अब लोग भंवरलाल से पूछ रहे हैं कि जब आपका कोई वोटबैंक नहीं था तो चुनाव में उतरे क्यों?

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