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भारत में 'जार्विस' उड़ाएगा फाइटर जेट? AI पायलट वाले FWD Supreme मॉडल की पहल झलक

Flying Wedge Defence and Aerospace ने दिल्ली में FWD Supreme का फुल-स्केल स्टैटिक प्रोटोटाइप पेश किया है. AI की मदद से चलने वाला यह मानवरहित कॉम्बैट एयरक्राफ्ट निगरानी, हमला और दूसरे विमानों के साथ मिलकर ऑपरेशन करने के लिए विकसित किया जा रहा है. हालांकि, इसकी उड़ान और लड़ाकू क्षमता का प्रदर्शन अभी बाकी है.

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भारत का पहला AI-पायलटेड फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम

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  • 13 अक्टूबर 2023 को Flying Wedge Defence and Aerospace (FWDA) ने दिल्ली में FWD Supreme नामक भारत के पहले AI-पायलटेड फाइटर जेट का स्टैटिक प्रोटोटाइप पेश किया।
  • 2015 की फिल्म Avengers: Age of Ultron में AI आधारित जार्विस किरदार से प्रेरित होकर इंजीनियर सुहास तेजस्कंदा ने AI-पायलटेड लड़ाकू विमान बनाने की योजना शुरू की।
  • FWDA की योजना है कि आने वाले वर्षों में FWD Supreme की पहली उड़ान और सेना में इंडक्शन हो, जिससे भारत की लड़ाकू विमान तकनीक में AI के उपयोग का विस्तार होगा।

2015 में एक मूवी आई थी- Avengers : Age of Ultron. इस मूवी में ‘जार्विस’ नाम का एक किरदार था. और ये किरदार असल में कोई इंसान नहीं, बल्कि एक AI मॉडल था. लेकिन इतना स्मार्ट कि सही-गलत, नैतिक-अनैतिक समझ सके. इस मूवी को देख कर भविष्य की एक झलक मिली थी. झलक ये कि भविष्य में जब AI का इस्तेमाल बढ़ेगा तो दुनिया कैसी होगी.

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तो जब ये मूवी आई, उसी समय तमिलनाडु के बेंगलुरु में एक लड़का इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था. एक तरफ मूवी चल रही थी, दूसरी तरफ वो लड़का भारत को उसका AI से चलने वाला फाइटर जेट देने की प्लानिंग कर चुका था. और एक दशक बीतने के बाद उसका सपना हकीकत के काफी करीब पहुंच चुका है. 

उस लड़के का नाम है सुहास तेजस्कंदा. सुहास इस समय Flying Wedge Defence and Aerospace (FWDA) नाम की कंपनी चला रहे हैं. 2022 में बनी ये कंपनी 'अनमैन्ड सिस्टम्स', आसान भाषा में कहें तो ड्रोन्स बनाती है. 13 अक्टूबर को FWDA ने दिल्ली में एक प्रोटोटाइप पेश किया. ये उनके पहले AI पायलट वाले फाइटर जेट का प्रोटोटाइप है. कंपनी का प्लान पटरी पर रहा तो आने वाले कुछ सालों में इसकी पहली उड़ान और सेना में इंडक्शन, दोनों देखने को मिल सकता है. इस सिस्टम को FWDA ने 'FWD Supreme' का नाम दिया है.

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AI पायलट उड़ाएगा फाइटर जेट 

FWDA ने 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में अपने FWD Supreme प्रोग्राम का फुल-स्केल स्टैटिक प्रोटोटाइप पेश किया है. कंपनी इसे भारत का पहला AI-पायलटेड फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम बता रही है. हालांकि, अभी इसे उड़ान भर चुका फाइटर जेट कहना सही नहीं होगा. दिल्ली में पेश किया गया मॉडल एक स्टैटिक प्रोटोटाइप है. यानी इसे एयरक्राफ्ट के डिजाइन और प्रस्तावित रूप को दिखाने के लिए पेश किया गया है. इसकी उड़ान, परफॉरमेंस और लड़ाकू क्षमता का प्रदर्शन अभी बाकी है.

लेकिन भारत के लिए ये अपने आप में बड़ी कामयाबी है. क्योंकि AI से चलने वाले जेट का मतलब है इसमें पायलट की जगह एक मशीनी दिमाग होगा. एकदम एवेंजर्स के जार्विस की तरह. खुद ही टेक-ऑफ करेगा, खुद टारगेट खोजेगा, खुद उसे खत्म करेगा और वापस बेस पर भी लौटेगा. नाम है FWD Supreme.

क्या है FWD Supreme?
FWD Supreme कंपनी की एक प्रस्तावित AI-पायलटेड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट फैमिली है. इसका मकसद ऐसे मानवरहित विमान विकसित करना है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से उड़ान और मिशन से जुड़े फैसले खुद से ले सकें.

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कंपनी के मुताबिक, इस एयरक्राफ्ट फैमिली को इंटेलिजेंस, सर्विलांस एंड रिकॉनिसेंस (ISR), स्ट्राइक और दूसरे एयरक्राफ्ट के साथ मिलकर ऑपरेशन करने (Loyal Wingman) जैसे मिशनों के लिए डेवलप किया जा रहा है.

FWD Supreme
13 अक्टूबर को FWDA ने दिल्ली में एक प्रोटोटाइप पेश किया. 

AI से लैस विमानों का झुंड, क्या है 'Mobbing Doctrine'?
FWD Supreme प्रोग्राम को कंपनी की 'Mobbing Doctrine' के हिसाब से डिजाइन किया गया है. इसके तहत एक अकेले महंगे फाइटर एयरक्राफ्ट पर निर्भर रहने से अच्छा है, कई सारे AI-पायलटेड विमानों का होना. इस कॉन्सेप्ट को लॉयल विंगमैन कहा जाता है.

नाम से जाहिर है एक ‘वफादार’ विंगमैन यानी पायलट. एविएशन की भाषा में विंगमैन शब्द विमान उड़ाने वाले के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इस कॉन्सेप्ट के अनुसार एक पूरा जंगी जहाजों का बेड़ा जिसे स्क्वाड्रन कहते हैं. उसमें सिर्फ एक ही जहाज ऐसा होगा जिसे कोई इंसान उड़ाएगा. इस जहाज को नाम दिया जाता है मदर शिप. स्क्वाड्रन के बाकी जहाज मानव रहित होंगे जो मदर शिप के आदेशानुसार काम करेंगे. जैसे आपके फोन में किसी ब्लूटूथ डिवाइस को पेयर किया जाता है, ठीक वैसे ही ये मानव रहित विमान मदर शिप से पेयर्ड रहेंगे. 

मकसद ये कि मदर शिप एक निश्चित जगह जाकर रुक जाएगी. अगर ऑपरेशन किसी ऐसे क्षेत्र में हो जहां पायलट को भेजने पर पकड़े जाने का डर हो, ऐसे में ये कॉन्सेप्ट काम आता.

लल्लनटॉप से बातचीत में FWD Supreme के फाउंडर सुहास बताते हैं कि उनका सबसे बड़ा उद्देश्य एयर कॉम्बैट की लागत को कम करना है. कंपनी के मुताबिक, कम लागत वाले और नेटवर्क से जुड़े विमानों को बड़ी संख्या में तैनात करके जंग के दौरान नंबर गेम में दुश्मन को पछाड़ा जा सकता है.

FWD Supreme की खासियत

FWDA के मुताबिक FWD Supreme के लिए फ्लाइंग-विंग डिजाइन और विमान के भीतर हथियार रखने की जगह की प्लानिंग है. कुछ वैसा जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ विमानों में होता है. विमान के निचले हिस्से या यूं कहें कि उसके पेट में हथियार होते हैं. इसे इंटर्नल वेपन भी कहते हैं. अंदर हथियार होने का फायदा ये होता है कि रडार पर दिखने की संभावना और कम हो जाती है.

FWD Supreme पर कंपनी ने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक-

• पेलोड: लगभग 350 किलोग्राम.
• अधिकतम स्पीड: मैक 0.8 से 0.85 तक.
• क्रूज स्पीड: लगभग 500 से 600 किलोमीटर प्रतिघंटा.
• रेंज: 1,500 किलोमीटर से अधिक.
• एंड्योरेंस: दो घंटे से अधिक.
• प्रोपल्शन: 5 kN थ्रस्ट.
• डिजाइन: फ्लाइंग-विंग कॉन्फिगरेशन और इंटरनल वेपन बे.

हालांकि ये आंकड़े कंपनी के साझा किए गए शुरुआती स्पेसिफिकेशन हैं. असल क्षमता का पता तब लगेगा, जब इसकी टेस्ट फ्लाइट हो जाए. लेकिन कंपनी का जो विजन है, अगर वो कामयाब हुआ तो भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास Loyal Wingman है.

पहली उड़ान कब होगी?

कंपनी के मुताबिक, FWD Supreme Lite नाम का हल्का वेरिएंट टैक्सी ट्रायल पार कर चुका है और अपनी पहली उड़ान की तैयारी कर रहा है. टैक्सी ट्रायल में विमान को रनवे चलाकर उसकी स्पीड, कंट्रोलिंग और बाकी सिस्टम्स का टेस्ट किया जाता है.

सुहास तेजस्कंदा के मुताबिक उनकी कंपनी डिजाइन, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग के जरिए सेना को एक उन्नत, लेकिन किफायती क्षमता से लैस करना चाहती है.

इस प्रोटोटाइप की लॉन्चिंग पर रक्षा मंत्रालय के DG Acquisition ए. अंबारासु सहित तीनों सेनाओं के सीनियर अफसर भी मौजूद थे. सुहास कहते हैं कि अभी शुरुआती मॉडल को रनवे से उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है. लेकिन सेना के लिए कई जगहों पर रनवे बनाना मुमकिन नहीं है. इसलिए वो इसका कैनिस्टर लॉन्च वेरिएंट भी बना रहे हैं. इसके अलावा वो नेवी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए शिप से लॉन्च होने वाले वेरिएंट पर भी काम कर रहे हैं.

वर्तमान में किसी भी देश की एयरफोर्स ने पूरी तरह से इस कॉन्सेप्ट को नहीं अपनाया है. भविष्य में क्या होगा, ये अभी से कहना मुश्किल है. पर जैसा लेखक और दार्शनिक युवाल नोआ हरारी कहते हैं कि भविष्य में लगभग हर क्षेत्र में एआई का ही दबदबा होगा. और जब ऐसा होगा तो जाहिर है मिलिट्री भी इससे अछूती नहीं रहेगी.

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