जनगणना 2027 के दूसरे चरण का पूरा टाइमलाइन शेड्यूल क्या है? ये सवाल इन दिनों हर खासो-आम के जेहन में घूम रहा है. आख़िरकार देश की अगली जनगणना जमीन पर कब उतरेगी. तो इंतजार की घड़ियां खत्म हुईं और जनगणना का पूरा कार्यक्रम आपके सामने है. ध्यान से देख लीजिए कि आपके शहर में जनगणना कह होगी. साथ ही उन सवालों की तैयारी भी कर लीजिए जो आपसे पूछे जाएंगे.
देश की सबसे बड़ी गिनती का काउंटडाउन शुरू! जानिए आपके इलाके में कब होगी दूसरे चरण की जनगणना
Census Schedule: पहाड़ी इलाकों से लेकर महानगरों तक भारत की जनगणना 2027 के दूसरे चरण का पूरा शेड्यूल सामने आ चुका है. साथ ही वो सवाल भी तैयार हैं, जिनका जवाब आपको जनगणना के दौरान देना पड़ेगा.

कब-कहां होगी जनगणना
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक शेड्यूल के मुताबिक, इस बार की जनगणना दो मुख्य चरणों में पूरी की जाएगी. इसमें से पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों जैसे कि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले हिस्सों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों के लिए प्रक्रिया जल्दी शुरू हो रही है. इन इलाकों में दूसरे चरण की जनसंख्या गणना 1 सितंबर 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक तय की गई है.
वहीं देश के बाकी मैदानी राज्यों के लिए मुख्य जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में निर्धारित की गई है, जिसके लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 रखी गई है. इस विशालकाय प्रशासनिक प्रक्रिया पर करीब 11,718 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट खर्च किया जा रहा है.
कैसी होगी डिजिटल जनगणना? मोबाइल का कितना इस्तेमाल?
क्या आप जानते हैं कि इस बार कागजी पन्नों और रजिस्टरों वाला पुराना दौर पीछे छूटने वाला है? भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है. जब जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी. ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक डाटा जुटाने के लिए सरकारी कर्मचारियों यानी एन्युमरेटर्स को विशेष रूप से तैयार किया गया मोबाइल ऐप दिया जाएगा. इस मोबाइल ऐप की मदद से वे सीधे डिजिटल एंट्री कर सकेंगे.
इसके अलावा आम जनता के लिए भी पोर्टल के जरिए खुद से डेटा भरने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का ऑप्शन भी दिया गया है. इन सभी गतिविधियों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए एक मजबूत वेब-आधारित पोर्टल का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि आंकड़ों में किसी भी तरह की देरी या गड़बड़ी ना हो सके.
जनगणना में क्या-क्या पूछा जाएगा?
क्या इस बार जनगणना के फॉर्म में कुछ नए और आधुनिक सवाल भी देखने को मिलेंगे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मकान की लिस्ट और आवास की गिनती के पहले चरण में मकानों की स्थिति, पीने के पानी, बिजली, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के अलावा घरों में मौजूद आधुनिक संपत्तियों और वाहनों से जुड़े करीब 33 सवाल पूछे जा रहे हैं.
सबसे बड़ा बदलाव ये है कि साल 1931 के बाद पहली बार जनगणना के दूसरे चरण के दौरान जातिगत जनगणना को भी आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया है. इसके जरिए सामाजिक और आर्थिक पिछड़पन के सटीक आंकड़े जुटाने की तैयारी है, ताकि भविष्य की नीतियां ज्यादा प्रभावी तरीके से बनाई जा सकें.
आरक्षण से लेकर परिसीमन तक का जनगणना कनेक्शन
ये सवाल बहुत जरूरी है कि आखिर जनगणना के इन आंकड़ों का देश की राजनीति और आम आदमी के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा? जानकारों का मानना है कि जनगणना के ये नए आंकड़े ही देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की दिशा तय करते हैं. संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत हर नई जनगणना के बाद लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाता है.
इसके अलावा अनुसूचित जातियों यानी एससी और अनुसूचित जनजातियों यानी एसटी के लिए सीटों का आरक्षण भी इन्हीं जनगणना से मिले जनसंख्या अनुपातों के आधार पर तय होता है, जिससे देश के हर वर्ग को उसकी आबादी के हिसाब से सही प्रतिनिधित्व मिल सके.
पहले चरण में छूट गए तो क्या करें
और चलते-चलते आपको बता दें कि अगर पहले चरण (मकान सूचीकरण) की जनगणना में आपका घर या परिवार छूट गया है, तो आप स्थानीय प्रगणक (Enumerator) या पर्यवेक्षक (Supervisor) से तुरंत संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, आप आधिकारिक पोर्टल VikasPedia पर जाकर भी अपने जनगणना का अपडेट हासिल कर सकते हैं.
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