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SIR पर थम नहीं रहा बवाल, अब महाराष्ट्र के CEO की चिट्ठी आई सामने, आयोग से की ये बड़ी मांग

SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग में टकराव का मामला फिलहाल ठंडा होता नहीं दिख रहा है. दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति और गोवा CEO की चिट्ठी के बाद ताजा मामला महाराष्ट्र का है. CEO एस. चोकलिंगम ने ECINet में बदलाव की मांग की है.

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महाराष्ट्र के CEO एस. चोकलिंगम ने दिल्ली के चुनाव अधिकारियों को पत्र लिखा. (Courtesy: EC/Maharashtra CEO websites)

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  • महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने ECINet सॉफ्टवेयर में ERO के अधिकारों के लिए चार मुख्य बदलावों की मांग की, जिनमें सुनवाई से छूट और दस्तावेजों के विकल्प शामिल हैं।
  • भारतीय चुनाव आयोग के अंदर SIR प्रक्रिया को लेकर मतभेद और विपक्षी दबाव के बीच Maharashtra CEO ने प्रणाली में सुधार के लिए सॉफ्टवेयर में अधिकारों की कमी को लेकर पत्र लिखा।
  • चुनाव आयोग ने ECINet की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाई है और SIR प्रक्रिया में नए नियम लागू किए हैं, जिसमें नोटिस प्राप्त वोटर के दस्तावेज घर से दिए जाने की सुविधा शामिल है।

वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की साख पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. पहले दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां सामने आईं. फि‍र गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की चिट्ठी. अब पता चला कि महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस. चोकलिंगम ने ECINet में बदलाव करने की मांग की है. उनका कहना है कि कानून के तहत ‘इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर’ (ERO) को अधिकार मिले हैं. उन अधिकारों को सॉफ्टवेयर में भी इस्तेमाल करने की सुविधा मिलनी चाहिए.

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24 सितंबर को एस. चोकलिंगम ने सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, DG IT सीमा खन्ना और दूसरे सीन‍ियर अधिकारियों को पत्र भेजा. ये जानकारी अब सामने आई है. इंग्लिश अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्र में एस. चोकलिंगम ने ECINet में चार मुख्य बदलावों की मांग की थी. इन मांगों का मूल सवाल ये था कि अगर कानून ERO को किसी मामले में फैसला लेने की छूट देता है, तो सॉफ्टवेयर में भी उसके लिए जरूरी विकल्प क्यों नहीं होना चाहिए.

इसे प्वाइंट टू प्वाइंट समझते हैं

पहली मांग सुनवाई को लेकर

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नियमों के मुताबिक ERO ये तय कर सकता है कि किसी वोटर को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी है या नहीं. महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम के मुताबिक, ECINet में दो ऑप्शन थे, लेकिन सुनवाई से छूट देने का ऑप्शन नहीं था. इसलिए उन्होंने तीसरा विकल्प 'Exempted from Hearing' यानी 'सुनवाई से छूट' जोड़ने की मांग की. अगर वोटर ने पर्याप्त और संतोषजनक दस्तावेज दे दिए हैं, तो हर मामले में उसे दफ्तर बुलाने की जरूरत न पड़े.

दूसरी मांग डॉक्यूमेंट्स को लेकर

SIR नोटिस के पीछे 13 तरह के डॉक्यूमेंट्स का जिक्र है. एस. चोकलिंगम ने कहा कि ये लिस्ट उदाहरण के तौर पर है, पूरी और आखिरी लिस्ट नहीं. इसलिए ECINet में 'Other/Other Equivalent Document' का विकल्प होना चाहिए. इससे जरूरत पड़ने पर दूसरे वैध दस्तावेज भी स्वीकार किए जा सकें.

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उन्होंने खास तौर पर ऐसे लोगों का जिक्र किया, जिनके पास तय सूची में दिए गए दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सकते. इनमें आदिवासी समुदायों, बेघर लोगों और सेक्स वर्कर्स जैसे समूहों का उदाहरण दिया गया.

तीसरी मांग ERO को लेकर

पत्र में 'तार्किक विसंगति' यानी लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (Logical Discrepancy) वाले मामलों में ERO को खुद फैसला लेने की पर्याप्त सुविधा देने की मांग की गई. लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी का मतलब ये नहीं है कि वोटर फर्जी है. ये ऐसा मिसमैच है, जिसे ECINet पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड को मिलाते समय पकड़ता है. जैसे रिश्तेदार के नाम में अंतर, उम्र से जुड़े बेमेल या पुराने रिकॉर्ड से जानकारी का ठीक से मेल न खाना.

चोकलिंगम का कहना था कि कुछ मामलों में BLO की रिपोर्ट और दूसरे सबूतों के आधार पर ERO खुद संतुष्ट होकर फैसला कर सकता है. लेकिन, सॉफ्टवेयर में उसे ऐसा करने के लिए पर्याप्त विकल्प नहीं मिलते.

चौथी मांग अनिवार्य अपलोड को लेकर

एस. चोकलिंगम ने मांग की कि हर डिस्क्रिपेंसी के मामले में 'Last SIR Extract' अपलोड करना अनिवार्य न हो, बल्कि ऑप्शनल हो. उनका तर्क था कि डिस्क्रिपेंसी की पहचान पहले ही पुराने SIR रिकॉर्ड से की जा चुकी है. इसलिए हर मामले में पिछली SIR के दस्तावेज को अपलोड करना जरूरी नहीं होना चाहिए.

इसके अलावा एस. चोकलिंगम ने EROs के लिए एक स्पष्ट FAQ की जरूरत भी बताई. इसमें नोटिस जारी होने, दस्तावेज जमा करने, सुनवाई और मामले के निपटारे की पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझाया जाए. यानी कुल मिलाकर महाराष्ट्र CEO की चिट्ठी का फोकस एक ही बात पर था. वो ये क‍ि कानून ERO को न‍िर्णय लेने को जो अध‍िकार देता है, ECINet में भी उसे लागू करने की सुविधा हो.

चुनाव आयोग ने क्या किया?

इस बीच इस पूरे मामले में बड़ा अपडेट आया. 26 सितंबर को चुनाव आयोग की बैठक हुई. इसके बाद आयोग ने ECINet की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया. कमेटी की अध्यक्षता एक सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर करेंगे और इसमें IIT या IIIT का एक इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट भी शामिल होगा.

कमेटी ये देखेगी कि ECINet संबंधित कानूनों और नियमों के मुताबिक काम कर रहा है या नहीं. आयोग ने ये भी कहा है कि अगर फील्ड ऑफिसर को सिस्टम में और फ्लेक्सिबिलिटी की जरूरत होगी, तो उसे ऑपरेशनल बनाया जाएगा. यही नहीं, महाराष्ट्र CEO की सबसे अहम मांगों में से एक को आयोग ने लागू भी कर दिया है.

अब SIR के दौरान बिना मैपिंग (Unmapped) या लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के नाम पर नोटिस पाने वाले लोगों के घर BLO जाकर जरूरी दस्तावेज जमा कर सकते हैं. उन्हें ECINet पर अपलोड कर सकते हैं. ऐसे लोगों को सामान्य तौर पर ERO या AERO के दफ्तर में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी.

सिर्फ एक्सेप्शनल मामलों में, ERO के फैसले के मुताबिक सुनवाई होगी. आयोग ने इसे पहली पसंद के तौर पर ऑनलाइन कराने की बात कही है. परिवार का कोई एडल्ट सदस्य भी जरूरत पड़ने पर वोटर की ओर से सुनवाई में शामिल हो सकता है.

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने 29 सितंबर को भी साफ किया कि नोटिस पाने वाले वोटर्स को घबराने की जरूरत नहीं है. BLO उनके दस्तावेज घर से ले सकते हैं. पुणे में बड़ी संख्या में लोग सुनवाई केंद्रों पर पहुंच गए थे, क्योंकि उन्हें लगा कि व्यक्तिगत रूप से जाना जरूरी है. लेकिन नई व्यवस्था में ऐसा सामान्य तौर पर जरूरी नहीं है.

अब महाराष्ट्र में SIR का संशोधित शेड्यूल भी सामने आ चुका है. क्लेम और ऑब्जेक्शन दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 12 अक्टूबर कर दी गई है. नोटिस के मामलों को निपटाने की डेडलाइन 10 नवंबर तक है. वहीं महाराष्ट्र की फाइनल वोटर लिस्ट अब 16 नवंबर को प्रकाशित होगी.

फिलहाल अपडेट ये है क‍ि ECINet को लेकर उठे सवालों के बाद चुनाव आयोग ने सिस्टम की समीक्षा शुरू कर दी है. महाराष्ट्र CEO की चिट्ठी में उठाई गई सुनवाई से छूट की मांग को लागू किया जा चुका है. बाकी तकनीकी और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आगे बदलाव की गुंजाइश आयोग ने खुली रखी है. अब सवाल ये है कि ECINet की समीक्षा करने वाली कमेटी अपनी रिपोर्ट में क्या कहती है. साथ ही, क्या इसके बाद EROs के लिए सॉफ्टवेयर में और बदलाव किए जाते हैं.

कौन हैं एस. चोकलिंगम?

अब आपको महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम के बारे में भी बता देते हैं. एस. चोकलिंगम महाराष्ट्र कैडर के 1996 बैच के IAS अफसर हैं. साल 2024 में वो महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी बने.

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महाराष्ट्र के आधिकारिक मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की वेबसाइट पर उन्हें एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर बताया गया है. यानी वे राज्य में मतदाता सूची और चुनाव से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी करने वाले वरिष्ठ अधिकारी हैं. ECINet में बदलाव को लेकर उनकी चिट्ठी और उसके बाद हुए बदलावों ने उन्हें इस पूरे विवाद के केंद्र में ला दिया है.

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