फ़र्ज करिए कि भारत का किसी देश से युद्ध चल रहा है. जमीन पर आर्मी, समुद्र में नेवी और आसमान में एयरफोर्स मोर्चा संभाले हुए है. एक दिन भारत तय करता है कि अब इस युद्ध को खत्म ही करना है. एक साथ भारत के करीब 50 फाइटर जेट्स एयरबॉर्न (उड़ान भरना) होते हैं. अब दुश्मन है तो उसके जासूस भी होंगे. तो दुश्मन को खबर लग गई कि भारत की कम से कम 3 स्क्वाड्रन उस पर हमला करने वाली है. लिहाजा वो भी अपने कई जहाजों को एयरबॉर्न करता है. रडार एक्टिव करता है लेकिन बिना रडार पर नजर आए इंडियन एयरफोर्स एक अहम ठिकाने को उड़ा देती है.
रिलायंस बनाएगा भारत के स्टेल्थ फाइटर AMCA का इंजन, रोल्स रॉयस के साथ हुआ करार
भारत के Advanced Medium Combat Aircraft यानी AMCA को देश का पहला 5th Generation Stealth Fighter Jet बनने के लिए तैयार किया जा रहा है. अब Reliance Industries और Rolls-Royce ने इसके लिए स्वदेशी Combat Engine विकसित करने की दिशा में साझेदारी का ऐलान किया है.

रडार पर नजर नहीं आना ही पांचवीं पीढ़ी के जेट्स की खासियत है. खबर है कि जल्द ही भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जिसके पास अपना खुद का स्टेल्थ फाइटर जेट होगा. नाम है एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट. शॉर्ट में कहें तो ऐम्का (AMCA). बताया जा रहा है कि भारत की रिलायंस (Reliance) और यूके की रोल्स रॉयस (Rolls Royce) मिलकर इसका इंजन बनाने जा रहे हैं.
HAL की जगह प्राइवेट सेक्टर को मौकामई 2025 में खबर आई थी कि सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्राइवेट प्लेयर्स से बोली लगाने को कहा है. यानी सालों तक एविएशन के क्षेत्र में काम करने वाली सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इस प्रोजेक्ट से दूर हो गई है. इस जेट के इंजन अब भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और यूके की रोल्स रॉयस साथ मिलकर बनाएंगी. इंजन के मामले में भारत दूसरे देशों पर निर्भर है लेकिन इस पार्टनरशिप की वजह से भारत में एक नया ईकोसिस्टम डेवलप होने की उम्मीद है, जिससे आने वाले सालों में भारत पूरी तरह स्वदेशी इंजन बना पाएगा.
एक चीज है जिससे हर फाइटर पायलट बचना चाहता है. वो है दुश्मन के रडार पर दिखना. मॉडर्न जमाने के स्टेल्थ तकनीक वाले फाइटर जेट्स की ये खूबी होती है कि वो रडार पर एक चिड़िया से भी छोटे दिखते हैं. फिलहाल अमेरिका, रूस और चीन ऐसे जेट्स ऑपरेट कर रहे हैं. आपने अगर बैटमैन सीरीज की मूवीज देखी हैं तो आपको एक सीन याद दिलाते हैं. इसमें बैटमैन हॉन्ग-कॉन्ग जाकर लाओ नामक एक मुजरिम को पकड़कर लाता है.
अब चूंकि लाओ को जहाज से लाना था इसलिए ब्रूस वेन यानी बैटमैन ने ऐसे पायलट्स को हायर किया जो रडार से बचकर प्लेन उड़ाने में माहिर थे. अगर बैटमैन के पास ऐसे जहाज होते जो स्टेल्थ तकनीक से लैस होते तो पायलट हायर करने का खर्च बच जाता. पर वो ब्रूस वेन था, इसलिए उसे पैसे की कमी नहीं थी. किसी देश को अगर किसी दुश्मन देश में चुपके से घुसना हो, जासूसी करनी हो तो उसे चाहिए ऐसी तकनीक जिससे कितना भी उड़ो, कोई देख न पाए. और यही आवश्यकता जननी बनी स्टेल्थ तकनीक के आविष्कार की.

किसी जहाज को डिटेक्ट करने के लिए रडार का इस्तेमाल किया जाता है. रडार एक सिम्पल कॉन्सेप्ट पर काम करता है. इस कॉन्सेप्ट को इंसानों से काफ़ी पहले चमगादड़ इस्तेमाल कर रहे हैं. रडार दरअसल लगातार हवा में या पानी में तरंगें छोड़ता है. अगर ये तरंगें किसी चीज से टकराती हैं तो रडार अपने ऑपरेटर को बताता है कि ये आगे क्या है? उसका आकार क्या है? वो चीज कितनी बड़ी है? और किस तरह की चीज है? पर स्टेल्थ तकनीक इस रडार के साथ कर देती है एक प्रैंक.
अगर आपने गौर से देखा होगा तो अधिकतर जहाज गोलाकार टाइप के शेप में दिखते हैं जबकि स्टेल्थ जहाजों में सतह एकदम फ्लैट होती है. साथ ही इसके कोने भी काफ़ी तीखे या शार्प होते हैं. इन कोनों और सतह की वजह से ये जहाज आसानी से रडार की तरंगों को दूसरी दिशा में भेज देते हैं. इसके अलावा स्टेल्थ तकनीक से लैस जहाज रडार की तरंगों को सोख लेते हैं. इन जहाजों पर एक ऐसा मैटेरियल इस्तेमाल किया जाता है, जो रडार की तरंगों को सोखने की क्षमता रखता है. सोखने के बाद ये जहाज गर्मी के रूप में उन तरंगों को वापस निकाल देते हैं.
सेंसर फ्यूजन से लैसफाइटर जेट्स में तमाम तरह के कंट्रोल्स और सेंसर्स लगे होते हैं. जितना पुराना जहाज होगा, उसमें पायलट का काम उतना ही बढ़ जाएगा. क्योंकि पायलट को हर मीटर, हर स्क्रीन पर नजर रखनी होगी. ऐसे में जंग के दौरान पायलट का ध्यान बंटना स्वाभाविक है लेकिन मॉडर्न जमाने के फाइटर जेट्स में एक नया सिस्टम लगा होता है. नाम है सेंसर फ्यूजन. AMCA भी इस सिस्टम से लैस होगा. ये जेट में लगे रडार, सेंसर्स, कैमरा, इंफ्रारेड सेंसर्स; सभी से डेटा इकठ्ठा करेगा लेकिन इसमें पायलट को हर सेंसर या मॉनिटर को अलग-अलग समझने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सेंसर फ्यूजन सिस्टम सभी सिस्टम्स के डेटा को जोड़कर पायलट के सामने एक कॉमन डेटा जारी करेगा. इससे न सिर्फ जल्दी बल्कि पायलट सही डिसीजन भी लेने के और करीब होगा.
गायब होने वाला टेस्ट ऑलरेडी चल रहा हैबीते दिनों इंटरनेट पर एक तस्वीर वायरल हुई. इसमें एक फाइटर जेट का ढांचा दिखाई दे रहा है, जो AMCA के उस मॉडल से मिलता है, जिसे एयरो इंडिया 2025 में डिस्प्ले पर रखा गया था. सैटेलाइट इमेज है तो कोई लोकेशन भी होगी ही और वो लोकेशन है, हैदराबाद के दुंडीगल में मौजूद DRDO की ORANGE (Outdoor Radar Cross Section Analysis and Geometry Evaluation) फैसिलिटी. यानी DRDO की लैब.

सूत्रों की मानें तो खुले में इस एयरक्राफ्ट को इसलिए भी रखा गया, ताकि इसका रेडियो बिहेवियर चेक किया जा सके. आसान भाषा में कहें तो चेक ये किया जा रहा है कि रडार वेव्स के सामने एयरक्राफ्ट का ढांचा कैसा रिस्पांस करता है. इसको बोलचाल की भाषा में कहा जाता है रडार क्रॉस सेक्शन यानी RCS. ये RCS जितना कम होगा, रडार पर विमान उतना ही छोटा दिखेगा. RCS जितना ज्यादा होगा, रडार उतनी आसानी से विमान को ढूंढ लेगा.
इसको ऐसे समझिए कि अमरीका के बनाए F-35 और रशियन Su-57 जैसे विमानों का RCS काफी कम है. रडार पर ये मुश्किल से नजर आते हैं और आते भी हैं तो साइज इतना छोटा दिखता है जिससे ये पता करना मुश्किल होता है कि स्क्रीन पर दिख रही चीज सचमुच का फाइटर जेट है या नहीं.
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कुल मिलाकर देखें तो इसकी पहली उड़ान 2029-2030 तक और इंडक्शन 2035 तक पूरा होने का टारगेट रखा गया है. यानी भारत अब उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल होने जा रहा है, जो अपना खुद का 5th जेनरेशन फाइटर जेट ऑपरेट कर रहे हैं.
वीडियो: AMCA Fighter Jet Project में सरकार ने क्या बदलाव कर दिया?













