2024 में सावन का महीना था. हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए यह महीना बहुत पवित्र माना जाता है. लोग व्रत रखते हैं. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक हिंदू व्यक्ति ने भी सावन का व्रत रखा था. शरीर में पानी की कमी पूरी करने के लिए उसने रियल जूस का एक पैकेट खरीदकर पी लिया. उन्हें जूस का स्वाद खराब लगा. बाद में पता चला कि पैकेट के अंदर का जूस खराब हो गया था और उसमें फफूंद लगी थी. मामला कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल में पहुंचा. 2026 में अपने फैसले में कमीशन ने जूस बनाने वाली कंपनी को दोषी ठहराया और उस पर कुल 1,00,000 रुपये का जुर्माना लगाया.
फफूंद वाला जूस पीने से टूटा व्रत, कोर्ट ने कंपनी पर ठोक दिया ₹100000 का जुर्माना
व्रत के दौरान कांगड़ा में एक शख्स ने पीने के लिए जूस खरीदा. हालांकि, जूस खराब निकला और उसमें फफूंद भी था. इसके बाद कंपनी के खिलाफ कोर्ट में मामला पहुंच गया और आखिरकार कंपनी को कुल 1,00,000 रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया गया.


पीड़ित हिंदू शख्स ने दावा किया था कि रियल फ्रूट पावर मौसमी जूस के 1 लीटर वाले पैकेट में फंगस मिली थी. शख्स ने आरोप लगाया कि खराब जूस की वजह से आस्था के साथ रखा गया व्रत टूट गया. यह पैकेट उन्होंने 26 जुलाई 2024 को खरीदा था. रियल फ्रूट पावर मौसमी जूस को डाबर इंडिया लिमिटेड कंपनी बनाती है. इसकी मैन्यूफैक्चरिंग मई 2024 और एक्सपायरी डेट नवंबर 2024 थी.
कमीशन ने क्या आदेश दिया?इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शख्स की शिकायत का निपटारा करते हुए कांगड़ा के डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने जूस में खराबी के लिए इसे बनाने वाली डाबर कंपनी को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया. कमीशन के प्रेसिडेंट हिमांशु मिश्रा और सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर ने 9 जुलाई के आदेश में कहा,
"कंपनी को स्टोर शेल्फ पर खतरनाक, खराब फ़ूड प्रोडक्ट रखने, पब्लिक हेल्थ को खतरे में डालने और ग्राहक को गहरी भावनात्मक तकलीफ पहुंचाने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए."
कमीशन ने माना कि फफूंद वाला गंदा जूस पीने से ग्राहक को सदमा लगा. यह एहसास कि गंदे लिक्विड से उनका धार्मिक व्रत टूट गया है, इससे उन्हें बहुत ज्यादा भावनात्मक, आध्यात्मिक और मानसिक पीड़ा हुई. कमीशन ने कहा कि इससे उनकी फिजिकल हेल्थ को भी खतरा था.
पीड़ित शख्स के आरोपशख्स ने दावा किया कि जूस खराब लग रहा था, तो टेट्रा पैक चेक किया और अंदर बहुत सारा ब्लैक फंगस मिला था. उन्होंने आरोप लगाया कि खराब जूस पीने से व्रत टूट गया और धार्मिक आस्था को भी चोट पहुंची. पीड़ित ने दावा किया कि डाबर ने उसे सिर्फ एक रिप्लेसमेंट जूस पैकेट दिया, जिसके बाद मजबूरन कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन जाना पड़ा.
वहीं, डाबर ने जूस बनाने के दौरान किसी भी खामी से इनकार किया था. कंपनी ने कहा कि जिस जूस को खराब बताया गया, उसी बैच के 1.08 लाख पैकेट में कोई खामी नहीं निकली. इन सभी पैकेट की क्वालिटी और सेफ्टी मानक के हिसाब से थीं और कहीं से फंगस जैसी कोई शिकायत नहीं मिली.
कंपनी ने यह भी दलील दी कि शिकायतकर्ता ने लेबोरेटरी जांच के लिए पैकेट नहीं उपलब्ध कराया. कमीशन ने डाबर की दलील नहीं मानी और कहा कि पीड़ित ने शिकायत दर्ज करते समय उसके सामने ओरिजिनल सील्ड टेट्रा पैक पेश किया था. कमीशन ने बताया कि उसके सुपरविजन में सैंपल को साइंटिफिक एनालिसिस के लिए लेबोरेटरी भेजा गया था.
लेबोरेटरी ने फफूंद जैसी गंदी गांठों के होने की रिपोर्ट दी और यह नतीजा निकाला कि यह ड्रिंक इंसानों के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित नहीं है. कमीशन ने डाबर के अपने इंटरनल कंट्रोल सैंपल पर भरोसा करने से इनकार कर दिया. कमीशन ने यह भी स्वीकार किया कि ग्राहक ने जो पैकेट खरीदा था, उसकी लैब टेस्टिंग, मैन्युफैक्चरर (डाबर) की इंटरनल रिपोर्ट से ज्यादा सही थी.
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कमीशन ने डाबर की इस खामी को अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस माना. कहा कि दुकानदार ने तो ओरिजनल, सील्ड टेट्रा पैक ही दिया था, लेकिन उसके एयरटाइट और फैक्ट्री-सील्ड कंटेनर में फंगस हो गई थी. इसलिए यह जूस बनाने के समय का पैकेजिंग डिफेक्ट है.
1 लाख भरने पड़ेंगेकमीशन ने डाबर को शख्स को 60,000 रुपये का मुआवजा और 10,000 रुपये का मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया. कमीशन ने कंपनी को कांगड़ा डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर वेलफेयर फंड में 30,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया. माने, डाबर को कुल 1,00,000 लाख रुपये अदा करने होंगे. फैसले पर तामील के लिए कंपनी को 45 दिन का समय दिया गया है.
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