भारत में आपने अब तक कितने क्रिप्टो निवेश घोटालों के बारे में सुना होगा? एक भी नहीं? चलिए हम आपको देश के सबसे बड़े क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट घोटाले के बारे में बताते हैं. मध्य प्रदेश में 70 साल के एक चार्टर्ट अकाउंटेंट हैं- अशोक विजयवर्गीय. उनके वॉट्सऐप पर एक दिन मैसेज आता है- ‘हैलो, दिस इज दिव्या स्पीकिंग’. (हलो, मैं दिव्या बोल रही हूं.) और यहीं से इस महाघोटाले की धारा बह निकलती है. धीरे-धीरे करके विजयवर्गीय से 21 करोड़ रुपये की ठगी की जाती है. फिर पैसे को देश भर के करीब 20 हजार बैंक खातों के जरिए 4 लेयर्स में ऐसे फैलाया जाता है कि पुलिस चाहकर भी जालसाजों का अकाउंट फ्रीज नहीं कर पाती.
वॉट्सऐप पर आया 'हैलो मैं दिव्या' और 7 महीने में सीए से ठग लिए 21 करोड़ रुपये
मध्य प्रदेश के चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से फर्जी क्रिप्टो निवेश के नाम पर 7 महीने में 21.05 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई. पुलिस के मुताबिक, ठगों ने रकम को 20 हजार से ज्यादा बैंक खातों में चार लेयर के जरिए घुमाकर जांच को मुश्किल बना दिया.


‘द ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चीफ रिटर्निंग ऑफिसर अशोक विजयवर्गीय के साथ हुई इस बहुत बड़ी ठगी के बारे में पुलिस ने बताया कि इसे दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 7 महीने में अंजाम दिया गया है. इस दौरान विजयवर्गीय से तकरीबन 21.05 करोड़ रुपये ठगे गए हैं.
जालसाजों ने वॉट्सऐप से किया संपर्क
पुलिस को मिली शिकायत के मुताबिक, दिसंबर 2025 में 'दिव्या' नाम बताने वाली एक महिला ने वॉट्सऐप पर विजयवर्गीय से संपर्क किया था. उसने खुद को निवेश सलाहकार बताया और उनसे USDT (Tether) नाम की क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट करके बड़ा मुनाफा कमाने का लालच दिया. आरोपियों ने अशोक विजयवर्गीय को एक ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल का लिंक भेजा. वहां उनका अकाउंट खोला गया. शुरुआत में उन्होंने 25 दिसंबर 2025 को चार बार में 10-10 हजार रुपये जमा किए. इसके बाद UPI अकाउंट के जरिए करीब 1 लाख रुपये और खाते में डाले.
जिस पोर्टल का लिंक उन्हें दिया गया था, उस पर विजयवर्गीय को अच्छा रिटर्न दिख रहा था. विजयवर्गीय का भरोसा जीतने के लिए इस निवेश पर ठगों ने उन्हें जनवरी 2026 में 1.88 लाख रुपये का रिटर्न दिया. ये पैसे सीधे विजयवर्गीय के खाते में आ गए. इसके बाद उन्होंने इस पोर्टल पर बड़ी रकम इन्वेस्ट करना शुरू किया. धीरे-धीरे करके उन्होंने कुल 21 करोड़ रुपये निवेश कर डाले. पोर्टल पर उनका मुनाफा भी गजब का दिख रहा था. पोर्टल बता रहा था कि उन्हें 33 करोड़ का फायदा हो रहा है.
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कब पता चला ठगी हो गई?
लेकिन ठगी के इस खेल का पहला आभास तब हुआ जब अशोक ने इन पैसों को निकालने की कोशिश की. पहले उन्हें कहा गया कि उन्हें इसमें से 10.84 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स देना पड़ेगा. फिर एक करोड़ रुपये मार्जिन रिस्क के लिए मांगे गए. धीरे-धीरे और मांगे बढ़ने लगीं लेकिन पैसे नहीं निकालने दिए गए. अब अशोक को पता चल गया था कि उनके साथ बहुत बड़ा फ्रॉड हो गया है. सारा मुनाफा जो पोर्टल पर दिख रहा था वो फर्जी था. पुलिस का तो कहना है कि ये पोर्टल ही फर्जी था.
यह तो लूटने का किस्सा है. ठगी के इन पैसों को कैसे मैनेज किया, ये कहानी और रोचक है.
जांच करने वाली एजेंसियों ने बताया कि अशोक से ठगे गए पैसों को बहुत तेजी से कई खातों में सर्कुलेट किया गया. ताकि ये पुलिस के हाथ न लग जाए. इस काम में कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के 20 हजार से ज्यादा बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया. पैसे चार लेयर्स में ट्रांसफर किए गए. एटीएम से डेबिट, ऑनलाइन शॉपिंग, वाउचर और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए तेजी से पैसे इधर-उधर किए गए.
जालसाजों ने ये काम इतनी तेजी से किए कि पुलिस सिर्फ 2 करोड़ रुपये ही फ्रीज कर पाई. जांच टीम का कहना है कि ठगों ने जिन खातों का इस्तेमाल किया, उनमें से कई ‘मनी म्यूल’ हो सकते हैं. कुछ लोग कमीशन लेकर अपने बैंक खातों को साइबर अपराधियों को यूज करने के लिए दे देते हैं. ऐसे खाते मनी म्यूल कहे जाते हैं.
फिलहाल, पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है.
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