हरियाणा में एक व्यक्ति ने शादी से पहले एक दूल्हे का बैकग्राउंड चेक कराने के लिए एक प्राइवेट डिटेक्टिव यानी जासूस हायर किया. ये जासूस एक डिटेक्टिव एजेंसी से हायर किया गया था. लेकिन आरोप है कि एजेंसी संतोषजनक जानकारी देने में नाकाम रही. इसके बाद व्यक्ति ने हरियाणा उपभोक्ता आयोग में शिकायत की. शिकायत में उसने 12 हजार रुपये का एडवांस वापस करने की मांग की. साथ ही मुआवजे के तौर पर 51 हजार रुपये मांगे.
दूल्हे की सही जांच पड़ताल नहीं कर पाया जासूस, अब कोर्ट ने कस्टमर को मोटा मुआवजा दिलाया
हरियाणा में एक व्यक्ति ने संभावित दूल्हे का बैकग्राउंड चेक कराने के लिए प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी को 12 हजार रुपये एडवांस दिए थे. जिला उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए एडवांस लौटाने और मुआवजे व मुकदमे के खर्च के तौर पर बड़ी रकम देने का आदेश दिया. जानिए पूरा मामला.

शिकायतकर्ता के मुताबिक दूल्हे के बैकग्राउंड की जांच (शादी से पहले की पड़ताल) के लिए डिटेक्टिव एजेंसी से कुल 24 हजार रुपये की फीस तय हुई थी. इसमें से शिकायतकर्ता ने 12 हजार रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे. शिकायतकर्ता के अनुसार, एजेंसी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि 10-12 दिनों में जांच पूरी कर ली जाएगी. इसमें दूल्हे का पैतृक घर, उसके वर्तमान निवास और वर्कप्लेस की जांच शामिल थी. हालांकि, बार-बार कॉन्टैक्ट करने के बावजूद, एजेंसी जांच के ऐसे नतीजे नहीं दे पाई, जो संतोषजनक थे.
उन्होंने यह भी दावा किया कि एजेंसी ने एक तस्वीर शेयर की. इसमें दूल्हे का पारिवारिक घर दिखाया गया था. बाद में पता चला कि वह तस्वीर OLX पर मौजूद किसी प्रॉपर्टी लिस्टिंग से ली गई थी. उन्होंने एजेंसी पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और कहा कि जब उन्होंने इस बारे में एजेंसी के कर्मचारियों से सवाल किया, तो उन्होंने उन्हें ही कार्रवाई करने की धमकी दी. कानूनी नोटिस मिलने के बाद भी जब एजेंसी ने एडवांस पेमेंट वापस नहीं किया, तो शिकायतकर्ता ने 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019' की धारा 35 के तहत आयोग का दरवाजा खटखटाया. नोटिस मिलने के बावजूद, दूसरी पार्टी (एजेंसी) आयोग के सामने पेश नहीं हुई.
यमुनानगर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले पर सुनवाई की. बेंच में अध्यक्ष रहबीर सिंह, मेंबर जसविंदर सिंह और सुमन राणा शामिल थे. बेंच ने पाया कि जो भी आरोप लगाए गए हैं, उन्हें डॉक्यूमेंट्स के आधार पर सही पाया गया है. आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने बार-बार एजेंसी से संपर्क किया था, क्योंकि काम में देरी हो रही थी. लेकिन एजेंसी की ओर से दिए गए जवाब अस्पष्ट थे. और दूल्हे के बारे में भी कोई ठोस या सत्यापित जानकारी नहीं दी गई.
एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि एजेंसी ने दूल्हे के परिवार के घर के सबूत के तौर पर एक फोटो दी थी. लेकिन पता चला कि वह फोटो उत्तर प्रदेश की एक OLX प्रॉपर्टी लिस्टिंग से ली गई थी. इसके बाद कमीशन ने 19 अक्टूबर को एक आदेश दिया. आदेश में कमीशन ने कहा,
‘इस तरह से सेवाएं न देकर और मदद न करके लापरवाही बरती गई. जो सर्विस ली गई है, उसमें कमी दिखती है. मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, शिकायतकर्ता राहत पाने का हकदार है.’
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आयोग ने इस मामले से जुड़े व्हाट्सएप चैट्स और पेमेंट रसीद की जांच की. और शिकायतकर्ता को 12 हजार रुपये का एडवांस और मुआवजे के तौर पर 51 हजार रुपये पेमेंट करने का फैसला सुनाया. यानी शिकायतकर्ता को कुल 63 हजार रुपये मिलेंगे.
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