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साइक्लोन अर्नब से आंध्र प्रदेश में 5 मौतें, अब बाढ़ का खतरा, एयरफोर्स तैनात

Cyclone Arnab: 125-135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ आंध्र प्रदेश के यानम तट से तूफान गुजर चुका है. पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, कई इलाकों में बिजली सप्लाई प्रभावित हुई है. ओडिशा में सरकार ने ‘जीरो कैजुअल्टी’ का दावा किया.

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साइक्लोन की वजह से कई जगहों पर भारी नुकसान हुआ है (COURTSEY- ITG)

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  • आंध्र प्रदेश में साइक्लोन अर्नब के कारण पांच लोगों की मौत हो गई है और भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 13 जिलों और पुडुचेरी के यानम में फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी किया है।
  • यह तूफान 28 अक्टूबर को 125 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लैंडफॉल हुआ, जिससे पेड़ गिरने, बिजली के खंभे कमजोर होने और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी।
  • सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज कर दिए हैं, मुख्यमंत्री ने केंद्र से मदद मांगी है और बिजली बहाली सहित बचाव अभियान जारी है।

आंध्र प्रदेश में साइक्लोन अर्नब की चपेट में आने से अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है. ये मौतें कहीं पेड़ गिरने से हुईं, तो कहीं करंट की चपेट में आने से लोगों की जाने गईं. लेकिन तूफान के गुजरने के बाद भी खतरा टला नहीं है. अब बड़ी चिंता भारी बारिश और फ्लैश फ्लड की है. India Meteorological Department यानी IMD ने आंध्र प्रदेश के 13 जिलों और पुडुचेरी के यानम जिले में फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी किया है. निचले इलाकों में water logging यानी जलभराव और अचानक बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है. यानी जिन इलाकों ने तूफान की तेज हवाओं का सामना किया, अब वहां लोगों को बारिश और बाढ़ से जूझना पड़ सकता है.

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150 की स्पीड पर चल रही हवा

साइक्लोन अर्नब ने 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश और यानम के कोस्ट को पार किया. लैंडफॉल के वक्त हवाओं की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे थी. जबकि झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे. लैंडफॉल के बाद तूफान कमजोर जरूर हुआ, लेकिन पीछे तबाही का मंजर छोड़ गया.

विशाखापत्तनम से लेकर काकीनाडा और कोस्टल इलाकों तक कई जगह पेड़ उखड़ गए. बिजली के खंभे गिर गए और सड़कें पानी में डूब गईं. कई इलाकों में बिजली सप्लाई भी प्रभावित हुई है. भारी बारिश की वजह से हालात और बिगड़ने की आशंका है. IMD ने जिन जिलों और शहरों में फ्लैश फ्लड का खतरा बताया है, उनमें बापटला, गुंटूर, NTR, कृष्णा, एलुरु, ईस्ट गोदावरी, काकीनाडा, अल्लूरी सीताराम राजू, विशाखापत्तनम, विजयनगरम, अनकापल्ली, पार्वतीपुरम मन्यम और वेस्ट गोदावरी शामिल हैं. यानी तूफान गुजर चुका है, लेकिन बारिश और बाढ़ की आफत अभी बाकी है.

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सीएम नायडू ने केंद्र से मदद मांगी

आंध्र प्रदेश में सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र से मदद मांगी है और मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है. इंडियन एयरफोर्स ने भी विजयवाड़ा में NDRF की करीब 23 टन राहत सामग्री पहुंचाई है. राहत सामग्री में आपदा प्रभावित इलाकों में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजें शामिल हैं. इसके अलावा स्थानीय प्रशासन को भी प्रभावित इलाकों में लोगों तक मदद पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं.

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अब प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता उन इलाकों को लेकर है, जहां लगातार बारिश हो रही है और पानी का स्तर बढ़ सकता है. क्योंकि तेज हवाओं वाला तूफान तो कमजोर पड़ चुका है, लेकिन बारिश का सिस्टम अभी भी एक्टिव है. ऐसे में अगले कुछ घंटे बेहद अहम हैं. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना, जलभराव वाले रास्तों को खाली कराना और बिजली व्यवस्था को बहाल करना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है.

लेकिन अर्नब का असर सिर्फ आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहा. पड़ोसी ओडिशा में भी भारी बारिश ने मुश्किलें बढ़ाई हैं. डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा के 17 जिले साइक्लोन अर्नब से प्रभावित हुए हैं. दक्षिण ओडिशा में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है. गजपति सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में रहा, जबकि गंजाम, कोरापुट और रायगड़ा में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का असर पड़ा है. कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे गिरे हैं, जबकि निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी है. हालांकि ओडिशा सरकार के मुताबिक अब तक राज्य में किसी की मौत की खबर नहीं है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा है कि राज्य ने ‘जीरो कैजुअल्टी’ का लक्ष्य हासिल किया है. सरकार ने तूफान से पहले ही बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिया था.

आठ प्रभावित जिलों से 31 हजार 255 लोगों को निकालकर 324 शेल्टर में पहुंचाया गया. इतना ही नहीं, अगर हालात और बिगड़ते हैं तो लोगों को शिफ्ट करने के लिए पूरे राज्य में 2067 शेल्टर तैयार रखे गए हैं. इनमें 141 स्थायी और 1926 अस्थायी शेल्टर शामिल हैं.

18 हजार से अधिक नावों को वापस लाया गया

प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया. संवेदनशील इलाकों में चिन्हित 4139 गर्भवती महिलाओं में से 2245 महिलाओं को एहतियात के तौर पर अस्पतालों और हेल्थ सेंटरों में शिफ्ट किया गया है. मछुआरों को लेकर भी पहले से तैयारी की गई. कुल 19143 मछली पकड़ने वाली नावों को सुरक्षित किनारे पर वापस लाया गया. इनमें 11955 नावें समुद्र से और 7188 नावें चिलिका झील से वापस लाई गईं.

रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए ओडिशा में 62 ODRAF टीमें, 9 NDRF टीमें और 244 फायर सर्विस टीमों को तैनात किया गया है. ओडिशा में अर्नब का असर भारी बारिश के रूप में दिखा. 28 अक्टूबर सुबह साढ़े आठ बजे तक 24 घंटे में राज्य में औसतन 23.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई. 14 ब्लॉक और तीन शहरी इलाकों में 100 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई. कोरापुट के पोट्टांगी में सबसे ज्यादा 188 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई. वहीं गजपति के मोहना में 182.4 और गंजाम में 161.4 मिलीमीटर बारिश हुई.

(यह भी पढ़ें: Arnab Cyclone: आंध्र से पुडुचेरी तक तबाही, सड़कों पर समुद्र का पानी, उखड़े पेड़-बिजली के खंभे)

सरकार ने आठ प्रभावित जिलों के लिए 19 करोड़ रुपए की राहत राशि मंजूर की है. गंजाम को 5 करोड़, जबकि सात जिलों को 2-2 करोड़ रुपए दिए गए हैं. राहत के लिए चूड़ा, गुड़, चावल, बिस्किट, पॉलीथिन शीट और anti-snake venom का स्टॉक तैयार रखा गया है. बिजली बहाली भी जारी है. TPSODL इलाके के प्रभावित 20 लाख से ज्यादा कनेक्शनों में करीब 65 फीसदी बिजली बहाल हो चुकी है. प्रशासन ने जिला कंट्रोल रूम 24 घंटे एक्टिव रखे हैं. कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द हैं और प्रभावित इलाकों में स्कूल और आंगनवाड़ी बंद रखे गए हैं.

यानी तूफान गुजर गया है, लेकिन बारिश और बाढ़ की चुनौती अभी सामने है. आंध्र प्रदेश में पांच लोगों की जान जा चुकी है और अब नजर फ्लैश फ्लड के खतरे पर है. वहीं ओडिशा में भारी बारिश और जलभराव ने कई इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अर्नब की रफ्तार भले ही कमजोर पड़ गई हो, लेकिन उसका असर अभी खत्म नहीं हुआ है. अगले कुछ घंटे आंध्र प्रदेश और ओडिशा, दोनों के लिए बेहद अहम हैं.

वीडियो: आसान भाषा में: क्या होता है साइक्लोन? ओमान ने क्यों रखा भारत में आए साइक्लोन का नाम?

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