मुंबई पुलिस (Mumbai Police) अपने डॉग स्क्वाड में बेल्जियन मालिनोइस (Belgian Malinois) के छह कुत्ते जोड़ने जा रही है. इनके आने के बाद मुंबई पुलिस के साथ तैनात बाकी सारे डॉग जिसमें अभी लैब्राडोर (Labradors) और डोबरमैन (Dobermanns) हैं, शायद उनको रिटायर किया जाएगा. माने वीआईपी मूवमेंट से लेकर बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों से पहले विस्फोटक पहचान और सुरक्षा जांच को मजबूत करने का जिम्मा अब बेल्जियन मालिनोइस के 'सवा शेरों' पर होगा. आपको पक्का लगेगा ऐसा क्या है इनमें जो लैब या डोबरमैन या जर्मन शेफर्ड में नहीं. बहुत कुछ जो शायद आपने सिर्फ फिल्मों में देखा होगा.
लादेन को खत्म करने वाले मिशन पर गई डॉग ब्रीड मुंबई पुलिस को मिली, कौन है Belgian Malinois?
Belgian Malinois दुनिया की सबसे बुद्धिमान, फुर्तीली और मेहनती डॉग नस्लों में से एक है. दिखने में यह जर्मन शेफर्ड से मिलते-जुलते हैं, लेकिन उनसे थोड़े छोटे, दुबले-पतले और अधिक एथलेटिक होते हैं. इनका शरीर मजबूत, फुर्तीला और वजन में हल्का होता है, जिससे ये लंबी छलांग लगाने और तेज दौड़ने में माहिर होते हैं.

साल 2011 में अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को ढेर करने के लिए पाकिस्तान के एबटाबाद में चलाए गए अमेरिकी नौसेना के सील कमांडो के ऐतिहासिक ऑपरेशन में बेल्जियन मालिनोइस नस्ल के कॉम्बैट डॉग ‘Cairo’ ने बेहद अहम और जोखिम भरी भूमिका निभाई थी. जब नेवी सील के कमांडो हेलीकॉप्टर से लादेन के कम्पाउंड में उतरे, तो काइरो उनके साथ था. उसका मुख्य काम इमारत के बाहरी हिस्से, छिपने की जगहों, और कमरों के आसपास गश्त करना था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बाहर से कोई खतरा या छुपा हुआ दुश्मन टीम पर हमला न कर सके.
काइरो को ऐसे रास्तों और दरवाजों पर नजर रखने के लिए तैनात किया गया था जहां से कोई भी बचकर भाग न सके. ऑपरेशन के बाद दुनिया को इस नस्ल का लेवल पता चला.
Zorba नाम के बेल्जियन मालिनोइस डॉग ने असम में शिकारियों को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई थी. बेल्जियम मेलिनोइस नस्ल का यह कुत्ता, जोरबा, देश में शिकारियों का पता लगाने के लिए तैनात किया जाने वाला अपनी तरह का पहला कुत्ता था. असम के कई गैंडा संरक्षण क्षेत्रों जैसे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान में 8 साल तक इसने ऐसा जलवा रखा कि शिकार एकदम जीरो हो गया था. एक बार शिकारियों को पकड़ते समय एक शिकारी ने अपना बैग पानी में फेंक दिया. Zorba पानी में गहरे तक कूदा और बैग निकाल लाया. नवंबर 2022 में जोरबा की मौत हो गई लेकिन उसके बाद से असम में इस डॉग ब्रीड की पूरी फौज तैनात है.

Belgian Malinois दुनिया की सबसे बुद्धिमान, फुर्तीली और मेहनती डॉग नस्लों में से एक है. दिखने में यह जर्मन शेफर्ड से मिलते-जुलते हैं, लेकिन उनसे थोड़े छोटे, दुबले-पतले और अधिक एथलेटिक होते हैं. इनका शरीर मजबूत, फुर्तीला और वजन में हल्का होता है, जिससे ये लंबी छलांग लगाने और तेज दौड़ने में माहिर होते हैं. लंबी मतलब सच में लंबी. 15-20 फीट लांघना इनके लिए कुत्तों का खेल है.
कुदरती तौर पर इनके अंदर ऊर्जा कूटकूटकर भरी होती है. इन्हें हमेशा कोई न कोई काम या टास्क करते रहना पसंद होता है. अगर इन्हें मानसिक रूप से व्यस्त न रखा जाए, तो ये बोरियत के कारण चीजें चबाना या परेशान करना शुरू कर सकते हैं. इसलिए ये फोर्स और पुलिस के खूब काम आते हैं जहां लगातार काम करना पड़ता है.
ये किसी भी कमांड या ट्रेनिंग को बहुत जल्दी समझ और याद कर लेते हैं, जिस वजह से ये कठिन से कठिन ट्रेनिंग भी आसानी से सीख जाते हैं. माने लड़ाई में इनको सिर्फ अपने हैंडलर के एक्शन से पता होता है कि आवाज नहीं करना या कब झपट पड़ना है.
'सेंट मेमोरी'जैसे हाथी की ना भूलने वाली मेमोरी होती है वैसे ही Belgian Malinois की 'सेंट मेमोरी' होती है. सही ट्रेनिंग मिलने पर Belgian Malinois गंध की पहचान करने में 95% से 99% तक सटीक हो सकते हैं. एक बार जिस गंध को पहचान लेते हैं, उसे बहुत लंबे समय तक याद रखते हैं. Belgian Malinois अपने हाई फोकस, गजब की कार्यकुशलता और सीखने की रफ्तार के कारण बारूदी सुरंगों (Explosives), ड्रग्स और खोए हुए या छिपे हुए इंसानों को ढूंढने के मामलों में दुनिया में सबसे अव्वल माने जाते हैं.
मुंबई पुलिस में क्या करेंगेइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019 में मुंबई पुलिस ने अपने डॉग स्क्वॉड में पांच बेल्जियन मालिनोइस पिल्लों को शामिल किया था, जिसमें तब लैब्राडोर और डोबरमैन का बोलबाला था. जब इन छह कुत्तों को खरीदा गया था, तब इनकी उम्र 45 से 60 दिन के बीच थी. इनमें से एक ने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है और वह मुंबई पुलिस स्क्वॉड में शामिल हो चुका है. बाकी पांच और दो लैब्राडोर पुणे के शिवाजीनगर स्थित डॉग ट्रेनिंग सेंटर में विशेष प्रशिक्षण ले रहे हैं. हर कुत्ते को दो हैंडलर्स सौंपे जाते हैं, जो चौबीसों घंटे उनकी देखभाल करते हैं.
बेल्जियन मालिनोइस को विस्फोटकों के लिए बैग, कमरों और खुले मैदानों की तलाशी लेने तथा वीआईपी के आगमन से पहले परिसरों की जांच में पुलिसकर्मियों की सहायता करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य किसी संदिग्ध वस्तु या खतरे की सूचना मिलने के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि किसी भी कार्यक्रम के शुरू होने से पहले संभावित खतरों की पहचान करना है. मुंबई पुलिस से इतर ये दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ, एनएसजी के साथ भी इंडिया में काम कर रहे हैं.
आखिर में एक बात. लैब से लेकर जर्मन शेफर्ड और डोबरमैन तक भी पुलिस से लेकर सेना में कमाल कर रहे हैं. लेकिन बेल्जियन मालिनोइस को आप किसी चैंपियन एथलीट की तरह मान लीजिए. जैसे उनके पास हमेशा दूसरों से ज्यादा तैयारी और बेहतर परफॉर्मेंस होती है, वैसा ही बेल्जियन मालिनोइस के साथ है.
वीडियो: क्या Apple का पहला फोल्ड फोन टूटने लगा?









