MLC इलेक्शन की काउंटिंग में नागपुर में बीजेपी आगे थी. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी अपने उम्मीदवार के लिए पूरी ताकत लगा दी थी. लेकिन 40 घंटे से ज्यादा चली वोटों की गिनती के बाद बाजी पलट गई. कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को 3 हजार 271 वोटों से हरा दिया.
अभिजीत वंजारी ने नागपुर से MLC चुनाव जीता, BJP को अपने गढ़ में मिली ये हार बहुत चुभेगी
महाराष्ट्र में MLC इलेक्शन के दौरान नागपुर डिविजन ग्रेजुएट्स सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने जीत दर्ज की. सीएम देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के घर में पार्टी को हार मिली. यहां RSS का मुख्यालय भी है. बीजेपी को यह हार खलेगी.

खास बात ये है कि नागपुर फडणवीस और गडकरी का होमटाउन है. यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS का मुख्यालय भी है. ऐसे इलाके में बीजेपी की हार को कांग्रेस अपने लिए बड़ी जीत बता रही है. वंजारी ने लगातार दूसरी बार नागपुर डिविजन ग्रेजुएट्स सीट जीतकर विधान परिषद में अपनी जगह बरकरार रखी है.
नतीजों के मुताबिक, अभिजीत वंजारी को कुल 67 हजार 231 वोट मिले. बीजेपी के सुधाकर कोहले को 63 हजार 960 वोट मिले. दोनों के बीच जीत का अंतर 3 हजार 271 वोटों का रहा. लेकिन इस नतीजे तक पहुंचना आसान नहीं था. काउंटिंग 27 अक्टूबर की सुबह शुरु हुई और 29 अक्टूबर के तड़के जाकर पूरी हुई.
शुरुआत में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी आगे चल रहे थे. पहले राउंड में उन्होंने बीजेपी के सुधाकर कोहले पर 927 वोटों की बढ़त बनाई थी. लेकिन दूसरे राउंड में तस्वीर बदल गई.
काउंटिंग के दौरान उलटफेरपहली पसंद के वोटों की गिनती के बाद सुधाकर कोहले को 60 हजार 924 वोट मिले. वहीं, वंजारी को 56 हजार 630 वोट मिले. यानी कोहले 4 हजार 294 वोटों से आगे हो गए थे. निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले को भी 24 हजार 249 वोट मिले. इसके बावजूद कोई भी उम्मीदवार जीत के लिए जरूरी वोटों का कोटा हासिल नहीं कर पाया. इसलिए दूसरी पसंद के वोटों की गिनती शुरू हुई.
इस चुनाव में मतदाताओं को अपनी पसंद के उम्मीदवारों को प्रॉयोरिटी के क्रम में वोट देना था. पहले पसंद के वोटों से जीत तय नहीं हुई, तो चुनाव के नियमों के मुताबिक दूसरी पसंद के वोटों की गिनती हुई. उम्मीदवारों के बाहर होने के साथ उनके वोटों को दूसरी पसंद के आधार पर गिना गया.
यहीं से मुकाबला पलट गया. दूसरे राउंड तक आगे चल रहे सुधाकर कोहले पिछड़ गए. आखिर में अभिजीत वंजारी ने 67 हजार 231 वोटों के साथ जीत दर्ज कर ली.
अभिजीत वंजारी की जीत के हैं बड़े मायनेजीत के बाद वंजारी ने कहा कि बीजेपी ने नागपुर में अपने नेताओं और संसाधनों की पूरी ताकत लगा दी थी. इसके बावजूद मतदाताओं ने कांग्रेस का साथ दिया. उन्होंने इस जीत का श्रेय कांग्रेस और महाविकास आघाड़ी की एकजुटता के साथ चुनाव में समर्थन देने वाले संगठनों को भी दिया.
हालांकि, मतगणना के दौरान माहौल तनावपूर्ण भी हुआ. 28 अक्टूबर की देर रात नागपुर के मानकापुर इंडोर स्टेडियम के बाहर बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए. दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई. इसके बाद पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा.
अब सवाल है कि नागपुर की इस जीत को इतना अहम क्यों माना जा रहा है? दरअसल, नागपुर लंबे समय तक बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी इस ग्रेजुएट्स सीट से कई बार विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं. जुलाई 1990 से मई 2014 तक उन्होंने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था.
2020 में अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के संदीप जोशी को हराकर इस सीट पर कांग्रेस की जीत दर्ज कराई थी. अब 2026 में उन्होंने बीजेपी के सुधाकर कोहले को हराकर सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है.
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प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर क्या कहा?नागपुर के अलावा महाराष्ट्र विधान परिषद की चार और सीटों पर चुनाव हुए थे. पांच सीटों के नतीजों में विपक्षी महाविकास आघाड़ी ने तीन सीटें जीतीं. वहीं, सत्तारूढ़ महायुति को दो सीटें मिलीं.
पुणे और छत्रपति संभाजीनगर की ग्रेजुएट्स सीटों पर शरद पवार की NCP यानी NCP-SP के उम्मीदवार जीते. पुणे टीचर्स सीट बीजेपी के कौस्तुभ गावड़े ने जीती. अमरावती टीचर्स सीट पर शिवसेना के किरण सरनाईक ने जीत दर्ज की. नागपुर ग्रेजुएट्स सीट कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के खाते में गई.
नतीजों के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. महाराष्ट्र कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा. नतीजे आने से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस के चुनाव में खाता नहीं खोल पाने को लेकर तंज कसा था. इससे पहले प्रधानमंत्री ने भी ‘कांग्रेस पर तंज’ भरा पोस्ट किया था.
हालांकि, विधान परिषद की कुल 78 सीटों में बीजेपी अब भी सबसे बड़ी पार्टी है. उसके 35 सदस्य हैं. इसलिए नागपुर की हार को पूरे राज्य में बीजेपी की ताकत खत्म होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता. लेकिन इस नतीजे ने पार्टी के मजबूत गढ़ में कांग्रेस की चुनौती जरूर दिखा दी है.
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