गुजरात में चुनावी चंदे के बहाने करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का मामला सामने आया है. पुलिस ने रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टियों (RUPPs) के खिलाफ तीन मामले दर्ज किए हैं. ये कार्रवाई इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (IT Department) की शिकायतों के आधार पर की गई. इन पार्टियों पर आरोप है कि इन्होंने लगभग 1,870 करोड़ रुपये के कथित फर्जी डोनेशन के जरिए सरकारी खजाने को 560 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया. FIR में तीन राजनीतिक पार्टियों के अलावा, भारतीय नेशनल जनता दल (BNJD) से जुड़े चार लोगों, स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी से जुड़े तीन लोगों और गरीब कल्याण पार्टी से जुड़े आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है.
गुजरात: 1870 करोड़ का चंदा लिया, कमीशन काट लौटाया, करोड़ों का चूना लगाने वालीं 3 पार्टियों पर FIR
गुजरात CID-Crime ने Income Tax Department की शिकायतों के आधार पर मामले दर्ज किए हैं. आरोप है कि राजनीतिक चंदे के नाम पर रकम जमा कराई गई, कमीशन काटकर पैसा दानदाताओं को वापस किया गया और टैक्स लाभ लेने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल किए गए.

इन तीनों मामलों में सबसे बड़ा मामला BNJD से जुड़ा है. FIR के मुताबिक, इस पार्टी को 56,238 लोगों से 1,143.85 करोड़ रुपये मिले. इससे कथित तौर पर लगभग 343 करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान हुआ.
स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी (SAP) को कथित तौर पर 519 करोड़ रुपये मिले, जिससे 155 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. जबकि गरीब कल्याण पार्टी को कथित तौर पर 206.76 करोड़ रुपये मिले, जिससे लगभग 62 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के आंकड़ों से पता चलता है कि ये तीनों पार्टियां यानी RUPP, 2017 से गुजरात में चुनाव लड़ रही हैं. भले ही उनके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई हो. गुजरात पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया,
ये FIR, IT डिपार्टमेंट के अधिकारियों की चार शिकायतों पर आधारित हैं. इन शिकायतों में पार्टियों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने टैक्स बचाने के लिए शेल फर्मों से डमी डोनेशन लिए और कमीशन काटकर बाकी डोनेशन की रकम वापस कर दी. साथ ही EC को डिजिटल सिग्नेचर वाले फर्जी दस्तावेज भी जमा किए.
गांधीनगर ज़ोन की CID क्राइम ने शुक्रवार, 25 सितंबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत FIR दर्ज की. इन धाराओं में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने जैसे जुर्म शामिल हैं.
IT विभाग की शिकायत के अनुसार, गुजरात पुलिस के मुताबिक, जांच एक साल से ज्यादा समय तक चली. इन पार्टियों पर आरोप है कि उन्होंने 4 से 6 प्रतिशत कमीशन के बदले राजनीतिक चंदे को दानदाताओं को वापस भेज दिया (reroute कर दिया) और सरकारी खजाने को कुल मिलाकर 560 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान पहुंचाया.
SAP के खिलाफ दर्ज FIR में पार्टी के पदाधिकारियों जैसे मेहुल कुमार महेशकुमार खत्री, सुरेंद्रसिंह परषोत्तमदास तिवारी और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) मुकुंदभाई चंदनसिंह राठौड़ के नाम शामिल हैं. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के सामने 'फॉर्म 24A' कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट जमा करने के लिए गलत रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया.
इससे सरकार को लगभग 343 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इसमें आगे यह भी आरोप लगाया गया है कि CA आदिल सैयद ने पार्टी के खातों की ठीक से जांच किए बिना ही ऑडिट रिपोर्ट तैयार कीं और उन पर डिजिटल साइन किए.
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संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरूजांच में शामिल गुजरात पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि IT विभाग ने शक के आधार पर दो साल पहले इन पार्टियों के यहां तलाशी ली थी. अधिकारी ने कहा,
हमें चार शिकायतें मिली हैं और हमने RUPP के खिलाफ तीन FIR दर्ज की हैं. चूंकि IT विभाग खुद शिकायतकर्ता है, इसलिए वे समय के साथ की गई अपनी जांच के आधार पर सबूत पेश करेंगे. हम धोखाधड़ी के मामलों में आरोपों के लिए फॉरेंसिक समेत सबूत इकट्ठा कर रहे हैं. हम पार्टी कार्यकर्ताओं और सदस्यों के ठिकानों पर तलाशी लेंगे.
अधिकारी ने आगे कहा,
हम यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्रवाई भी शुरू करेंगे कि जांच पूरी होने तक बैंक खातों का इस्तेमाल न हो सके और आरोपियों की संपत्तियां बेची न जा सकें. अपराध से हासिल संपत्ति के तौर पर कुछ संपत्तियों को ज़ब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी.
उन्होंने आगे कहा कि पुलिस एक मजबूत चार्जशीट दाखिल करेगी ताकि ऐसा गलत काम करने वालों को कड़ा मैसेज दिया जा सके.
वीडियो: तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक में क्या हुआ?









