"अब्दुल अब्दुल क्या होता है? आप किसी कम्युनिटी का मजाक उड़ा रहे हैं अब्दुल कहकर. आप अपने शब्दों को वापस लीजिए. अब्दुल कहकर मजाक मत उड़ाइए." एक पत्रकार के सवाल पर भड़कते हुए समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने ऐसा कहा. उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम वोटों को लेकर सियासी लड़ाई तेज हो गई है. इसी लड़ाई में 'अब्दुल' शब्द का मुसलमान से जोड़कर मेटाफर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी इस मामले में पीछे नहीं हैं.
'अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा, अपने MP-MLA बनाएगा', अखिलेश का खेल बिगाड़ेंगे ओवैसी?
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस के राजनीतिक नेतृत्व पर हमलावर हैं. वे लगातार मुस्लिमों से नेहरू-गांधी और यादव परिवारों पर डिपेंडेंसी छोड़कर अपनी राजनीतिक ताकत खड़ी करने की अपील कर रहे हैं.

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की सियासत में मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है. अक्टूबर में ओवैसी ने यूपी के कई जिलो में रैलियों को संबोधित किया. ये रैलियां ऐसे इलाकों में की गईं, जहां मुस्लिम आबादी का दबदबा है.
इन रैलियों के सहारे असदुद्दीन ओवैसी म्यान में रखी तलवार की धार तेज करने में जुटे हैं. यूपी के मुसलमानों को सियासी लीडर बनने का पुराना संदेश फिर दोहराया जा रहा है. फिर से 'अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा' की ताकीद की जा रही है. निशाने पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस हैं.
ओवैसी का कहना है कि मुस्लिम समुदाय कब तक दूसरी पार्टियों के नेताओं के लिए दरी बिछाता रहेगा, वोट देगा और जरूरत पड़ने पर जेल जाएगा. अब वक्त आ गया है कि मुस्लिम समाज अपने बीच से नेता तैयार करे. अब्दुल सिर्फ दरी नहीं बिछाएगा, बल्कि विधायक और सांसद भी बनेगा.
ओवैसी का ये हमला सीधे समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस के राजनीतिक नेतृत्व पर है. वे लगातार मुस्लिमों से नेहरू-गांधी और यादव परिवारों पर डिपेंडेंसी छोड़कर अपनी राजनीतिक ताकत खड़ी करने की अपील कर रहे हैं. वहीं, सपा और कांग्रेस की तरफ से भी ओवैसी के बयानों पर जवाब दिया जा रहा है. ऐसे में यूपी चुनाव से पहले मुस्लिम वोटों की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है.
'नेहरू, गांधी या यादव को अपना नेता नहीं बनाएंगे'असदुद्दीन ओवैसी ने 19 अक्टूबर को रामपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब मुस्लिम समुदाय किसी नेहरू, गांधी या यादव को अपना नेता नहीं बनाएगा. उन्होंने कहा,
"हमारी सफों में ये नौजवान बेटा और बेटियां खड़ीं होंगी. मैं जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं मुस्लिम नौजवानों में भी उतनी ही काबिलियत है, जितनी दूसरे समुदायों के लोगों में है, लेकिन उन्हें प्लेटफॉर्म नहीं दिया जाता. AIMIM उन्हें ये प्लेटफॉर्म दे रही है."
रामपुर सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान का सियासी गढ़ है. असदुद्दीन ओवैसी कई बार अखिलेश यादव पर आजम खान को नजरअंदाज करने का आरोप लगा चुके हैं. ओवैसी कई बार आजम के लिए अपनी हमदर्दी जाहिर कर चुके हैं.
इससे पहले 11 अक्टूबर को आजमगढ़ में भी ओवैसी ने कहा कि अब हमें किसी गांधी या नेहरू की जरूरत नहीं है, बल्कि अपने नेताओं की जरूरत है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुस्लिमों से कहते हैं कि उनका साथ दो, उनके बीच से अगला नेहरू और गांधी निकलेगा.
ओवैसी सवाल किया कि मुस्लिमों में से मौलाना अबुल कलाम आजाद, मौलाना महमूद हसन (शेख-उल-हिंद), मौलाना हिफ्जुर्रहमान सियोहारवी, मौलवी मोहम्मद इस्माइल संभली, मौलाना मोहम्मद अली जौहर, आबे सफानी (अली बहादुर खान) जैसे स्वतंत्रता सेनानी निकलने की बात क्यों नहीं कही जाती.
'अखिलेश यादव अपनी पार्टी का नाम बदल दीजिए'26 अक्टूबर को शामली के कैराना में असदुद्दीन ओवैसी ने अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा,
"अखिलेश यादव, आपकी पार्टी का नाम समाजवादी से बदलकर समाजवादी यादव परिवार कर देना चाहिए."
ओवैसी ने आरोप लगाया कि पहले आजमगढ़ से मुस्लिम सांसद चुने जाते थे, लेकिन अब वहां अखिलेश यादव के भाई वहां से सांसद बन गए. उन्होंने कहा कि बदायूं से मुसलमान सांसदी जीतते थे, अब अखिलेश के भाई वहां से सांसद हैं. इसी तरह फिरोजाबाद में भी पहले मुस्लिम सांसद हुआ करते थे, लेकिन अब वहां अखिलेश यादव परिवार के सदस्य चुनाव जीत रहे हैं. ओवैसी ने कहा,
"यादव परिवार ये कह रहा है कि हमारे परिवार में जितने बच्चे-बच्चियां पैदा होंगे, अब्दुल तुम सालगिरह पर केक नहीं काटना, बल्कि अपनी सांसद और विधायक की सीट हमारे परिवार के बच्चे-बच्चियों को गिफ्ट में दे देना."
ओवैसी ने 12 अक्टूबर को लखनऊ में ANI के इंटरव्यू में समाजवादी पार्टी को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि मुस्लिमों ने दो-तीन पीढ़ियों तक समाजवादी पार्टी का समर्थन करके अपना नुकसान किया है. उन्होंने सवाल उठाया कि अखिलेश यादव की सरकार ने आजमगढ़ के लिए क्या किया और शिब्ली कॉलेज को यूनिवर्सिटी का दर्जा क्यों नहीं दिया गया.
'सिर्फ वोट बैंक बनकर नहीं रहेंगे मुसलमान'5 अक्टूबर को श्रावस्ती में ओवैसी ने कहा कि पिछले 70-75 सालों से मुस्लिम समुदाय को सिर्फ वोटर बनाकर रखने की कोशिश हुई है. उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 200 से ज्यादा मदरसों को सील किया गया और 18 से ज्यादा मदरसों को गिराया गया, कब्रिस्तानों के खिलाफ कदम उठाए गए, लेकिन समाजवादी पार्टी और दूसरे विपक्षी दलों ने आवाज नहीं उठाई.
उन्होंने INDIA ब्लॉक के दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत और उत्तर प्रदेश के मुसलमान किसी राजनीतिक पार्टी की 'बपौती' नहीं हैं. अगर उन्हें सिर्फ वोट बैंक समझा जाएगा तो आने वाले चुनाव में इसका जवाब मिलेगा.
ऐसा नहीं कि असदुद्दीन ओवैसी सियासी तौर पर सपा या कांग्रेस से पूरी तरह बैर रखना चाहते हैं. 4 अक्टूबर को उन्होंने गठबंधन की बात को दोहराया. उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता में आने से रोकने के लिए AIMIM दूसरी पार्टियों के साथ आने को तैयार है, लेकिन इसे कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि AIMIM मुस्लिमों की राजनीतिक हिस्सेदारी और स्वतंत्र राजनीतिक पहचान की पक्षधर है.
सपा-कांग्रेस का ओवैसी पर पलटवारओवैसी के बयानों पर सपा और कांग्रेस ने पलटवार किया है. इंडिया टुडे से जुड़े सुशीम मुकुल की रिपोर्ट के मुताबिक, सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर ने ओवैसी पर 'विभाजनकारी राजनीतिक एजेंडा' चलाने का आरोप लगाया. उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी का PDA मंच एक बड़े सामाजिक गठबंधन का प्रतिनिधित्व करता है. PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक. बाद में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने P का मतलब पंडित भी बताया.
कांग्रेस नेता उदित राज ने ओवैसी पर खुद को सभी मुसलमानों का इकलौता प्रतिनिधि के रूप में पेश करने का आरोप लगाया. उदित राज ने कहा, “बीजेपी हिंदुओं की ठेकेदार बन रही है, और वे मुसलमानों के ठेकेदार बन रहे हैं.” कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि अगर ओवैसी यूपी में मुस्लिमों की अपनी आजाद लीडरशिप चाहते हैं तो तेलंगाना में उन्होंने ऐसी मुस्लिम लीडरशिप को कितना तैयार किया है.
कांग्रेस नेताओं ने हैदराबाद में ओवैसी परिवार के लंबे राजनीतिक दबदबे का हवाला देते हुए पूछा कि वहां मुस्लिम नेतृत्व को आगे बढ़ाने की उनकी कैसी कोशिशें हैं. ऐसे में ओवैसी की मुस्लिम राजनीतिक हिस्सेदारी वाली मुहिम पर उनके ही गृह राज्य में सवाल उठने लगे हैं.
सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि AIMIM विरोधी पार्टियां तेलंगाना में उनके सीमित चुनाव लड़ने के दायरे पर सवाल उठाती हैं. कांग्रेस प्रवक्ता शाम मोहम्मद ने पूछा कि असदुद्दीन ओवैसी अपने गृह राज्य तेलंगाना की 119 में से मात्र 9 विधानसभा सीटो पर चुनाव लड़ते हैं? उन्होंने दावा किया कि ओवैसी भारत में एक पाकिस्तान बनाना चाहते हैं. AIMIM ने तेलंगाना की 9 सीटों पर लड़ी, जिसमें 7 सीटों पर जीत दर्ज की.
2027 में अखिलेश के लिए चुनौती बनेंगे ओवैसी?उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी करीब 19.26 फीसदी है और परंपरागत तौर पर इस वोट का बड़ा हिस्सा सपा पार्टी और कांग्रेस के साथ रहा है. ओवैसी इसी राजनीतिक आधार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
बिहार के सीमांचल में AIMIM की दोबारा 5 सीटों पर जीत ने ओवैसी को यूपी में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का हौसला दिया है. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में AIMIM एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. उसे करीब 0.49 फीसदी वोट मिले थे.
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25 अक्टूबर को कैराना में ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी की सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोकने की हर मुमकिन कोशिश करेगी. उन्होंने ये भी कहा कि अगर दूसरी विपक्षी पार्टियां इस मकसद से सहमत हैं तो AIMIM उनके साथ आने को तैयार है.
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