19 साल के एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी का दावा है कि उन्होंने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन यानी सीबीएसई (CBSE Website Hack) की एक वेबसाइट को फिर से हैक किया है. उन्होंने दावा किया है कि हैक करने के बाद विवादित ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल पर ‘बैड एप्पल' गाना भी चलाया गया. इससे पहले भी उन्होंने CBSE की इस साइट को हैक करने का दावा किया था, जिसे CBSE ने मानने से इनकार कर दिया था.
CBSE की वेबसाइट फिर से हैक करने का दावा, हैकर ने चलाया 'बैड एप्पल' गाना
CBSE Site Hack Claim: हैकर के मुताबिक हैकिंग के पीछे उसका कोई गलत मकसद नहीं था. उसका काम सीबीएसई के एग्जाम मैनेजमेंट जुड़े सिस्टम की कमियों को सामने लाना था. इसके बारे में उसने सरकारी अधिकारियों को भी जानकारी पहुंचा दी.


हैकर ने इस बारे में पोस्ट करते हुए X पर लिखा,
हमने सीबीएसई की प्रोड वेबसाइट पर आइकॉनिक बैड एप्पल वीडियो चला दिया.
हैकर निसर्ग अधिकारी ने यह भी दावा किया कि उन्हें उन सर्वर्स का भी एक्सेस मिल गया जो सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM से जुड़े थे.
क्या है 'बैड एप्पल' जो CBSE की वेबसाइट पर दिखा'बैड एप्पल' एक इंटरनेट मीम और इंटरनेट चैलेंज है. यहां शैडो वाले आर्ट टाइप म्यूजिक वीडियो का ब्लैक एंड वाइट में एक गाना बनाया जाता है. इसके बाद कोडिंग के जरिए उसे दिखाया जाता है. इंटरनेट यूजर्स को ये काफी पसंद आता है.
निसर्ग अधिकारी एक 12वीं क्लास के स्टूडेंट हैं. उनका कहना है कि उन्होंने पहले भी CBSE की OSM से जुड़ी साइट की खामियों का खुलासा किया था. उनका दावा है कि उन्हें वेबसाइट पर Create, Read, Update और Delete यानी CRUD एक्सेस के साथ प्रोडक्शन सर्वर्स तक का एक्सेस मिक गया था.
अपने दावे कि मजबूती देने के लिए निसर्ग अधिकारी ने एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग शेयर की है. वीडियो में दिख रहा है कि सीबीएसई लिंक से जुड़ी वेबसाइट के डैशबोर्ड पर ‘बैड एप्पल’ दिख रहा है. साथ ही वीडियो में स्क्रीन पर 'PWNED via SQLi wen hackers : 3 लिखा हुआ दिख था है. इसका मतलब है कि कोई वेबसाइट के अंदर घुस गया है.
क्यों हैक की वेबसाइट?निसर्ग अधिकारी के मुताबिक हैकिंग के पीछे उनका कोई गलत मकसद नहीं था. उनका काम सीबीएसई के एग्जाम मैनेजमेंट से जुड़े सिस्टम की कमियों को सामने लाना था. ये दावे तब सामने आए हैं जब सीबीएसई रिजल्ट के बाद की प्रक्रिया और री-इवैल्यूएशन सिस्टम की जांच-पड़ताल चल रही है. इससे पहले इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में निसर्ग अधिकारी ने कहा था कि उन्होंने कम से कम 40 लूपहोल्स ढूंढे थे, जिनकी जानकारी जिम्मेदार सरकारी अधिकारी को दे दी थी.
CBSE का रुखCBSE ने 26 मई को X पर पोस्ट करके बताया था कि CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) के असली पोर्टल में कोई सेंध नहीं लगाई गई. CBSE ने लिखा,
"सोशल मीडिया पर एक यूजर द्वारा की गई एक पोस्ट में यह दावा किया गया है कि CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) वाला URL: http://cbse.onmark.co.in को 26 फरवरी 2026 को उसने हैक कर लिया था. यह बात कुछ खबरों का भी आधार बनी है.
शुरुआत में ही यह साफ किया जाता है कि आंसर शीट के मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पोर्टल का URL अलग था, जिसे ना तो हैक किया गया है और ना ही उसमें वे कमजोरियां हैं जिनका जिक्र उस सोशल मीडिया पोस्ट में किया गया है."

CBSE ने आगे लिखा था,
क्या हैकिंग करना सही है?“URL: http://cbse.onmark.co.in केवल एक टेस्टिंग साइट है, जिसमें इंटरनल टेस्टिंग और रिव्यू के मकसद के लिए केवल नमूना डेटा (sample data) मौजूद है. उस पोर्टल पर मूल्यांकन का कोई भी असली डेटा, मार्क्स या अन्य डेटा मौजूद नहीं है. बोर्ड इस बात पर जोर देता है कि मूल्यांकन के असली कामकाज के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पोर्टल की सुरक्षा में सेंध का कोई भी मामला सामने नहीं आया है.”
हैकर्स मुख्य रूप से तीन तरह के होते हैं. इनको ब्लैक हैट, व्हाइट हैट और ग्रे हैट हैकर्स कहा जाता है. आपने शरीफ लोगों के लिए व्हाइट कॉलर शब्द सुना होगा. वैसे ही व्हाइट हैट हैकर्स भी शरीफ होते हैं.
इनके लिए एक और शब्द का इस्तेमाल किया जाता है- ‘एथिकल हैकर’.
एथिकल का शाब्दिक अर्थ देखें तो होता है नैतिक. माने जो काम किसी सही इरादे या मकसद से किया गया हो. यानी ये अच्छे वाले हैकर्स हैं. इनका काम ब्लैक हैट हैकर्स से दुनिया को सुरक्षित रखना है. सरकारी संस्थाएं, बैंक, बिजनेस करने वाली कंपनियां व्हाइट हैट हैकर्स को अपने साथ रखती हैं. व्हाइट हैट हैकर्स कंपनियों में या फ्रीलांसर के तौर पर काम करते हैं. ये लगातार अपने ग्राहकों को संभावित खतरों और साइबर अटैक से बचाने का काम करते हैं.
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