दिल्ली पुलिस की ओर से शनिवार, 25 जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई. इसमें दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन पर बात की. पुलिस ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और छात्र प्रोटेस्ट से जुड़े पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स के बारे में बताया. दिल्ली पुलिस ने कहा कि पाकिस्तान से चल रहे अकाउंट्स का इन्वॉल्वमेंट ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय भी देखा गया था.
'ऑपरेशन सिंदूर में यही हुआ था,' CJP प्रोटेस्ट में दिल्ली पुलिस को क्या 'पाकिस्तान कनेक्शन' मिला?
Delhi Police ने एक Press Conference की. इसमें पुलिस ने CJP Protest और Fake Social Media Posts के बारे में जानकारी दी. साथ ही Arvind Kejariwal के उस वीडियो का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने प्रदर्शन के बीच बड़े क्रैक डाउन का दावा किया था.

सेंट्रल दिल्ली के डिप्टी पुलिस कमिश्नर (DCP) रोहित राजबीर सिंह ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के अपडेट्स के बारे में मीडिया को बताया. उन्होंने कहा,
‘पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले विरोध प्रदर्शन हो रहा है. इस प्रदर्शन की खास बात ये है कि इसमें सोशल मीडिया और खास तौर पर इंस्टाग्राम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है. आज की युवा पीढ़ी के लिए न्यूज़ और अपडेट पाने का एक बड़ा सोर्स बन चुका है. सोशल मीडिया के इस प्रोटेस्ट से जुड़े इस्तेमाल में कई बार ये भी देखा गया है कि कई झूठी, भ्रामक और गुमराह करने वाले पोस्ट भी शेयर किए गए हैं.’
DCP रोहित राजबीर सिंह ने आगे कहा,
‘इन सबकी वजह से कानून व्यवस्था में प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ता है. हम सभी जानते हैं कि सोशल मीडिया पर कोई भी जानकारी तेजी से वायरल हो जाती है. लेकिन हर पोस्ट, वीडियो और फोटो सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है. इसलिए किसी भी जानकारी पर भरोसा करने से पहले या उसे आगे शेयर करने से पहले उसका फैक्ट चेक करना जरूर होता है. दिल्ली पुलिस भी सोशल मीडिया पर लगातार निगरानी रखे हुए है.’
दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने आगे कहा कि फेक न्यूज AI और डीप फेक न्यूज, एडिटेड क्लिप्स और गुमराह करने वाले पोस्ट के बारे में पुलिस लगातार अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए जानकारी साझा कर रही है, ताकि लोगों को सही और गलत के बीच फर्क समझ आ सके. पुलिस के मुताबिक, वह फैक्ट्स के आधार पर यह बताना चाहती है कि सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और फेक नैरेटिव फैलाने की कोशिशें कैसे की जा रही थीं.
पुलिस ने दावा किया कि वो कुछ ऐसे पोस्ट्स का जिक्र कर रहे हैं, जिनका मकसद पैनिक फैलाना और सिंपल फैक्ट्स को तोड़-मरोड़ कर मिस-इंफॉर्मेशन फैलना नजर आ रहा है. पुलिस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस पोस्ट का जिक्र किया, जिसमें दावा किया गया था कि 20 जुलाई के दिन यानी ‘संसद मार्च’ वाले दिन पुलिस की कार्रवाई के दौरान एक महिला की मौत हो गई. पुलिस ने साफ किया कि पुलिस की कार्रवाई में किसी की भी मौत नहीं हुई है. यह एक फेक न्यूज़ है.
क्रैक डाउन का दावा झूठाइसके बाद पुलिस की ओर से दिल्ली पुलिस के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल का एक वीडियो पोस्ट का जिक्र किया. जिसमें उन्होंने दावा किया था कि केंद्र सरकार जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ क्रैक डाउन की तैयारी कर रही है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और खुद दिल्ली पुलिस ने इस बात का खंडन किया था कि ऐसा कुछ नहीं होना जा रहा. पुलिस अधिकारी ने कहा,
‘हमारी जांच में ये भी सामने आया कि पाकिस्तान से चलाए जा रहे कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स फेक कॉन्टेंट फैला रहे हैं. दिल्ली पुलिस संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसे और अकाउंट्स को पहचानने का काम कर रही है. ऐसे 400 से अधिक हैंडल्स की पहचान कर ली गई है. और उन्हें AI वीडियो, फेक कॉन्टेंट, डीप फेक वीडियो और फेक कॉन्टेंट और प्रदर्शन से जुड़ी फेक न्यूज फैलाने की वजह से ब्लॉक कर दिया गया है. ऐसे ही कुछ हैंडल्स ऑपरेशन सिंदूर के समय फेक न्यूज फैलाने में सक्रिय पाए गए थे.’
पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के भी एक वीडियो को दिखाया, जो एक फेक AI वीडियो था. इसके अलावा एक सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल राजीव पुरी DGMO के नाम से एक और फेक वीडियो वायरल किया गया. फेक वीडियो में एक झूठा बयान जोड़कर दावा किया गया कि चल रहे प्रदर्शन की वजह से सेना को दिल्ली में तैनात किया जा रहा है.
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दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने आगे बताया कि पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं के खिलाफ और भारत सरकार के कमिटमेंट के तहत, दिल्ली पुलिस ने क्राइम ब्रांच में एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है. SIT का नेतृत्व DCP लेवल के पुलिस अधिकारी करेंगे. इसकी निगरानी का जिम्मा क्राइम ब्रांच के स्पेशल पुलिस कमिश्नर पर होगा. SIT गठन के आदेश पहले ही जारी कर दिए गए हैं.
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