गोवा में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान 97 वोटर्स के नाम काटने या कहें दोबारा लिस्ट में नहीं जोड़ने की बात सामने आई है. हैरानी की बात ये है कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसर (ERO) ने उनके नाम चेक कर उन्हें योग्य वोटर बताया था. इसके बाद भी उनका नाम फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं था. इसकी सबसे बड़ी वजह है ECINet सिस्टम का सेंट्रलाइज होना. इस व्यवस्था पर चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने भी आपत्ति जताई थी.
7 दिन में 8 ईमेल फिर भी वोटर लिस्ट से 97 नाम गायब! गोवा SIR में खुली बड़ी गड़बड़ी की पोल
Goa SIR voter deletion row: गोवा में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान 97 वोटर्स के नाम काटने की बात सामने आई है. ERO अफसरों ने एक हफ्ते में आठ बार मेल किया तब भी उनके नाम दोबारा लिस्ट में शामिल नहीं किए गए.

इंडियन एक्सप्रेस की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट में खुलासा हुआ. रितिका चोपड़ा ने बुधवार 23 सितंबर को रिपोर्ट किया कि चुनाव आयोग में सर्वसम्मति या बहुमत से काम नहीं हो रहा था, जो संविधान के खिलाफ है. अब एक और रिपोर्ट में गोवा का केस सामने आया है. चुनाव आयुक्तों ने हाल ही में जो आपत्तियां जताई थी, ये केस उसकी पुष्टि करता नजर आ रहा है.
क्या है पूरी कहानी?17 फरवरी 2026 को गोवा में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) के तहत अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने से चार दिन पहले, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने दिल्ली में ECI को पत्र लिखा. इससे पहले वो सात बार और पत्र लिख चुके थे. पत्र के साथ 97 वोटरों की एक सूची भी थी. इन 97 वोटर्स की लिस्ट को गोवा के ही EROs ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया के तहत सुना था. इनकी जांच हुई थी और सभी वोटर्स योग्य पाए गए थे. मेल में कहा गया कि इन वोटर्स के नाम हटाने के फैसले को बदलना है. ये काम ECINet पोर्टल के ज़रिए होना था जो ERO के कार्यक्षेत्र से बाहर है. इसके लिए अंतिम मंजूरी दिल्ली से ही आती है.
अगले दिन, कमीशन के डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर ने IT की डायरेक्टर जनरल सीमा खन्ना को लिखा,
“IT सिस्टम SC के निर्देशों के अनुसार ज़रूरी कार्रवाई को रोक नहीं सकता. कृपया EROS/AEROs के फ़ैसले और इन ईमेल में आपको बताई गई जानकारी के आधार पर पब्लिश करने की ज़रूरी कार्रवाई में मदद करें.”
लेकिन 20 सितंबर 2026 को जब इंडियन एक्सप्रेस ने फाइनल लिस्ट चेक की तो उसमें उन वोटर्स के नाम नहीं थे. सवाल पूछने पर गोवा के चीफ इलेक्टोरल अफसर संजय गोयल ने बताया कि कुछ गड़बड़ी के कारण उन वोटर्स के नाम हटाए जाने थे. लेकिन बाद में जब दस्तावेज चेक किए गए, तो नाम हटाने का फैसला बदल दिया गया. उन्होंने इसकी जानकारी ECI को दी, लेकिन फाइनल वोटर लिस्ट में नाम न शामिल करने का फैसला ECI का था. उन्होंने ये भी अपील की कि ERO स्तर पर वोटरों को फिर से शामिल करने के लिए (ECINet में) कोई व्यवस्था होनी चाहिए.
इस पर 14 अगस्त 2026 को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा था कि फील्ड अफसरों को ECINet सिस्टम तक पहुंच नहीं मिल रही थी. DG (IT) के पास इसे प्रतिबंधित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है.
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एक हफ्ते में भेजे आठ ईमेलरिपोर्ट के मुताबिक, प्रॉब्लम ये थी कि उन्हें फ़्लैग करने का फ़ैसला पहले ही ECINet पर दर्ज हो चुका था. सिस्टम में ऐसा कोई रोलबैक विकल्प नहीं था जिससे EROs उसे बदल सकें. 22 जनवरी से ही फ़ील्ड से इसके लिए रिक्वेस्ट आ रही थी. इसके बाद भेजे गए सभी ईमेल का यही हाल रहा. रिकॉर्ड में कोई जवाब नहीं है और न ही उन पर कोई एक्शन लिया गया है. पहला मेल 13 फरवरी को भेजा गया.
13 फरवरी: मेल में लिखा गया कि गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ़्तर से भेजे गए किसी भी ईमेल या चिट्ठी का जवाब अभी तक नहीं मिला है.
14 फरवरी (दो ईमेल, दोपहर 12.52 बजे और शाम 6.11 बजे): मेल में लिखा गया कि एक बार फिर अनुरोध है कि कृपया जल्द से जल्द रोल बैक/रिवर्ट बैक की सुविधा और डॉक्यूमेंट को दोबारा अपलोड करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए. इसके बाद 14 फरवरी को संजय गोयल ने ज्ञानेश भारती DEC को चिट्ठी लिखी जिसमें सीमा खन्ना को CC में रखा.
इसके बाद 15, 16, 17 और 18 फरवरी को भी मेल भेजे गए मगर कोई जवाब नहीं आया. फिर फाइनली 21 फरवरी को रिपोर्ट पब्लिश हुई जिसमें 97 वोटर्स के नाम नहीं थे. जब नाम शामिल नहीं हो पाए, तो चुनाव अधिकारियों ने इन वोटरों से कहा कि वे नए वोटरों के लिए बने 'फॉर्म 6' पर दोबारा आवेदन करें. लेकिन इस केस ने चुनाव आयोग के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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