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'बांग्लादेशी' बताकर पकड़े गए बच्चों को हाईकोर्ट ने छोड़ा, मां पर सुनाया ये फैसला

Bombay High Court ने बांग्लादेशी होने के आरोप में हिरासत में ली गई महिला और उसके तीन बच्चों को वापस भेजने पर अस्थायी रोक लगा दी है. कोर्ट ने बच्चों को पिता को सौंपने का आदेश दिया है. क्या है पूरा मामला?

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हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक चारों में से किसी को भी देश से बाहर न भेजा जाए. (सांकेतिक फोटो)

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  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से महिला और उसके तीन नाबालिग बच्चों को हिरासत में लेने के मामले में जवाब दाखिल करने को कहा और बच्चों को उनके पिता को सौंपने का आदेश दिया।
  • महिला और उसके बच्चों पर बांग्लादेशी नागरिक होने का आरोप है, जबकि याचिकाकर्ता ने दावा किया कि तीनों बच्चे भारत में जन्मे हैं और हिरासत में लिए जाते समय उचित नोटिस नहीं दिया गया था।
  • हाईकोर्ट ने बच्चों को देश से बाहर न भेजने का निर्देश देते हुए 21 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई नियत की और बच्चों को मां से मिलने की अनुमति दी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से एक महिला और उसके तीन नाबालिग बच्चों को हिरासत में लेने के मामले में जवाब मांगा है. महिला और बच्चों पर बांग्लादेशी नागरिक होने का आरोप है. जबकि याचिकाकर्ता का कहना है कि तीनों बच्चे भारत में ही पैदा हुए थे. कोर्ट ने आदेश दिया है कि बच्चों को उनके पिता को सौंप दिया जाए और मामले की सुनवाई पूरी होने तक चारों में से किसी को भी देश से बाहर न भेजा जाए.

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कोर्ट ने क्या कहा?

इंडिया टुडे से जुड़ीं विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला के पति और सास की तरफ से दायर 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई की. ये ऐसी याचिका होती है, जिसमें अगर किसी को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया जाए तो इसे उसके परिवार के लोग, दोस्त या वकील कोर्ट में दाखिल करते हैं. इसके बाद कोर्ट पुलिस को निर्देश देती है कि वो आरोपी को कोर्ट में लाए और उस पर लगे आरोप को साबित करे. अगर पुलिस आरोप साबित नहीं कर पाती है तो कोर्ट उसे तुरंत रिहा करने का आदेश जारी कर देता है. 

इस मामले में महिला के पति और उसकी सास ने याचिका दी थी. इसमें जस्टिस सारंग वी. कोटवाल और जस्टिस आशीष चव्हाण की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य को औपचारिक जवाब के जरिए अपने एक्शन को सही ठहराना होगा. बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि तीनों बच्चों को उनके पिता को सौंप दिया जाए और उन्हें अपनी मां से नियमित रूप से मिलने की अनुमति दी जाए.

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क्या है पूरा मामला?

यह याचिका सबीना की सास कांता सुबरल्लू सुब्बय्या और पति मोहम्मद इमरान रऊफ खान ने दायर की थी. सबीना और उसके तीन बच्चों पर बांग्लादेशी नागरिक होने के आरोप हैं. उन्हें मुंबई की तिलक नगर पुलिस ने वीजा परमिशन खत्म होने के बाद भी भारत में ही रुकने के आरोप में हिरासत में लिया था. लेकिन, सबीना के पति के वकील ने कोर्ट को बताया कि इमरान ने 2011 में सबीना से शादी की थी और तीनों बच्चे भारत में ही पैदा हुए थे. तीनों यहीं पढ़ाई कर रहे हैं. उनके पास इसे साबित करने के लिए दस्तावेज भी हैं.

‘भारत में ही जन्मे तीनों बच्चे’

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अधिकारियों ने हिरासत में लेने से पहले कोई नोटिस, हिरासत का आदेश या देश से बाहर भेजने का आदेश जारी नहीं किया था. न ही उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया गया था. वकील ने कोर्ट को बताया कि बच्चों में एक पांच साल का बच्चा भी है, जो डेंगू से पीड़ित है और उसे मुंबई के सायन अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बच्चे की हालत के बावजूद परिवार के सदस्यों को उससे मिलने नहीं दिया जा रहा है. 

मानवीय आधार पर राहत की मांग करते हुए याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से अपील की कि जब तक जांच चल रही है, तब तक बच्चों को घर लौटने की इजाजत दी जाए. हालांकि, पुलिस और राज्य सरकार का कहना था कि सबीना एक अवैध प्रवासी है. उन्होंने यह भी दावा किया कि बच्चों को भी अवैध प्रवासी के तौर पर चिह्नित किया गया है.

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सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया. साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक मामले का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक सबीना को देश से बाहर न भेजा जाए. बेंच ने यह भी आदेश दिया कि तीनों बच्चों को घर लौटने की इजाजत दी जाए. लेकिन शर्त यह है कि वे तिलक नगर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र से बाहर न जाएं. कोर्ट ने आगे यह भी निर्देश दिया कि बच्चों को समय-समय पर अपनी मां से मिलने के लिए डिटेंशन सेंटर ले जाया जाए. इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होनी है.

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