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दिल्ली-NCR में H1N1 का कहर: 1777 केस, एक दिन में 159 नए मरीज

दिल्ली-NCR में H1N1 संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. दिल्ली में कुल मामले 1,777 तक पहुंच गए हैं और पिछले दिन 159 नए मामले सामने आए. बढ़ते मामलों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हाई लेवल समीक्षा बैठक बुलाई है. जानिए H1N1 के लक्षण, सांस फूलने और ऑक्सीजन गिरने जैसे warning signs, इलाज, बचाव और सरकार की तैयारी.

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सांस फूलने और ऑक्सीजन गिरने पर तुरंत सावधान (फोटो- इंडिया टुडे)

दिल्ली-NCR में H1N1 का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. मानसून के बीच वायरल और दूसरे सांस से जुड़ी बीमारियों के साथ H1N1 के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. खबर लिखे जाने तक दिल्ली में H1N1 के कुल मामले बढ़कर 1,777 हो गए हैं. पिछले दिन 159 नए मामले सामने आए हैं.

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मामलों में तेजी से बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को दिल्ली में H1N1 की स्थिति की समीक्षा के लिए हाई लेवल बैठक बुलाई. बैठक में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की जानकारी है.

'इंडिया टुडे' की जानकारी के मुताबिक दिल्ली-NCR में कई डॉक्टरों और दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल के प्रमुख के भी H1N1 पॉजिटिव होने की जानकारी सामने आई है. डॉक्टरों के पास फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है. कुछ मरीजों में ऑक्सीजन लेवल गिरने और सांस लेने में गंभीर परेशानी की शिकायत भी सामने आई है.

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हालांकि दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने, अस्पतालों की तैयारी मजबूत करने और जरूरी हेल्थ प्रोटोकॉल लागू करने के निर्देश दिए हैं.

दिल्ली में H1N1 के 1777 केस, एक दिन में 159 नए मरीज

दिल्ली में H1N1 संक्रमण के आंकड़े जिस रफ्तार से बढ़े हैं, वो इस समय सबसे बड़ी चिंता है. 21 अगस्त को अपडेट 'इंडिया टुडे' रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में H1N1 के कुल मामले 1,777 हो चुके हैं. पिछले दिन 159 मामले रिपोर्ट हुए.

यानी सिर्फ एक दिन के आंकड़े ने ये साफ कर दिया है कि राजधानी में संक्रमण की निगरानी को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

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इससे पहले भी दिल्ली में H1N1 मामलों में तेज उछाल सामने आया था. अगस्त की शुरुआत में उपलब्ध आंकड़ों में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब छह गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. अब कुल मामलों का आंकड़ा 1,777 तक पहुंच चुका है. ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक H1N1 के मामले पूरे देश में तेजी से बढ़ रहे हैं.

मामलों की संख्या बढ़ने के पीछे सिर्फ एक वजह बताना सही नहीं होगा. मानसून के दौरान मौसम में बदलाव, उमस, लोगों का लंबे समय तक बंद जगहों में रहना और सांस से जुड़ी बीमारियों का बढ़ना संक्रमण के प्रसार में भूमिका निभा सकता है.

H1N1 आखिर फैलता कैसे है?

H1N1 इंफ्लूएंजा A वायरस का एक सब टाइप है. संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और सांस लेने के दौरान निकलने वाले ‘सांस के हवा में रह जाने वाले अंश’ (respiratory droplets) और छोटे पार्टीकल्स के जरिए इंफ्लूएंजा फैल सकता है.

भीड़भाड़ वाली जगहों और नजदीकी संपर्क में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए किसी व्यक्ति को फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसके साथ लंबे समय तक बेहद करीब रहने से बचना चाहिए.

WHO के मुताबिक मौसमी सर्दी-जुकाम अचानक बुखार, आमतौर पर सूखी खांसी, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, गले में खराश और थकान जैसे लक्षण पैदा कर सकता है. ज्यादातर लोग करीब एक हफ्ते में ठीक हो जाते हैं, लेकिन हाई-रिस्क लोगों में बीमारी गंभीर हो सकती है.

H1N1 के कौन से लक्षण दिखें तो सावधान हो जाएं?

H1N1 की शुरुआत कई बार सामान्य वायरल जैसी लगती है. अचानक बुखार आना, ठंड लगना, सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी और अत्यधिक थकान इसके आम लक्षण हैं. कुछ लोगों में नाक बहना या बंद होना, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण भी हो सकते हैं.

नोएडा स्थित ‘मैश मानस अस्पताल’ के डॉ नमन शर्मा का कहना है कि असली खतरा तब बढ़ता है जब संक्रमण श्वसन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करने लगे. लल्लनटॉप से बात करते हुए डॉ नमन कहते हैं,

सांस लेने में परेशानी, सांस फूलना, सीने में लगातार दर्द या दबाव, अत्यधिक कमजोरी, कंफ्यूजन, होंठ या चेहरा नीला पड़ना या लक्षणों का अचानक बिगड़ना वॉर्निंग साइन हो सकते हैं.

'इंडिया टुडे' को दिल्ली-NCR से मिली जानकारी में कुछ मरीजों के ऑक्सीजन लेवल गिरने की बात भी सामने आई है. ऐसे मामलों में घर पर इंतजार करना सही नहीं है.

WHO और CDC दोनों गंभीर या तेजी से बिगड़ते इंफ्लूएंजा के लक्षण में डॉक्टर को दिखाने की सलाह देते हैं.

किन लोगों के लिए H1N1 ज्यादा खतरनाक हो सकता है?

H1N1 हर मरीज में गंभीर बीमारी पैदा नहीं करता. लेकिन कुछ लोगों में कॉम्पिलीकेशन का खतरा ज्यादा रहता है. इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और डायबिटीज, अस्थमा, फेफड़ों की गंभीर बीमारी या हार्ड डिजीज जैसी दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोग शामिल हैं.

कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में भी इंफ्लूएंजा गंभीर रूप ले सकता है. WHO के मुताबिक हाई-रिस्क लोगों में इंफ्लूएंजा से निमोनिया जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं.

इसलिए हाई-रिस्क व्यक्ति को बुखार और खांसी होने पर सिर्फ घर पर दवा लेकर कई दिनों तक इंतजार नहीं करना चाहिए.

H1N1 में इलाज क्या है, क्या हर मरीज को एंटीबायोटिक चाहिए?

सबसे जरूरी बात ये है कि H1N1 एक वायरल इंफेक्शन है. इसलिए एंटीबायोटिक वायरस पर सीधे काम नहीं करते. डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षण, रिस्क फैक्टर और बीमारी की गंभीरता देखकर ट्रीटमेंट तय करते हैं. कुछ मामलों में एंटी वायरल दवाएं जैसे oseltamivir दी जा सकती है.

WHO और CDC के मुताबिक इंफ्लूएंजा एंटी वायरल बीमारी शुरू होने के शुरुआती समय में सबसे ज्यादा प्रभावी होते हैं. खास तौर पर हाई-रिस्क और गंभीर मरीजों में इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए.

लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हर बुखार वाले व्यक्ति को खुद से oseltamivir शुरू कर देना चाहिए. दवा डॉक्टर की सलाह से ही ली जानी चाहिए.

दूसरी बड़ी गलती है खुद से एंटीबायोटिक शुरू करना. अगर बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण नहीं है तो एंटीबायोटिक, H1N1 को ठीक नहीं करेगा और अनावश्यक इस्तेमाल से साइड इफेक्ट और एंटीबायोटिक प्रतिरोध का खतरा बढ़ सकता है.

H1N1 से बचने के लिए क्या करें?

H1N1 से बचाव में सबसे महत्वपूर्ण है श्वशन से जुड़ी साफ-सफाई और एहतियात. अगर बुखार, खांसी या फ्लू जैसे लक्षण हैं तो घर पर रहें और दूसरों के नजदीकी संपर्क में आने से बचें. खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें. हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से साफ करें.

भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के मुताबिक मास्क का इस्तेमाल भी संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है. बीमार व्यक्ति के साथ लंबे समय तक नजदीकी संपर्क से बचना भी जरूरी है.

इंफ्लूएंजा वैक्सीनेशन भी बीमारी और उससे होने वाली दिक्कतें के जोखिम को कम करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है. WHO मौसमी इंफ्लूएंजा से बचाव के लिए वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी प्रीवेंटिव कदमों में गिनता है.

सरकार की तैयारी क्या है?

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने H1N1 की स्थिति की समीक्षा के बाद निगरानी बढ़ाने और अस्पतालों की preparedness मजबूत करने पर जोर दिया है.

'इंडिया टुडे' को मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली में स्वास्थ्य विभाग, MCD और अस्पतालों के बीच स्थिति की समीक्षा की गई है. सरकारी अस्पतालों में जरूरी हेल्थ प्रोटोकॉल और निगरानी को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं.

अब केंद्रीय स्तर पर भी मामले की समीक्षा की जा रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ H1N1 की स्थिति पर हाई लेवल रिव्यू मीटिंग बुलाई है.

बैठक का फोकस बढ़ते मामलों, निगरानी, इलाज की क्षमता और दिल्ली की तैयारी पर है.

क्या H1N1 को लेकर घबराने की जरूरत है?

मामलों की संख्या बढ़ना निश्चित तौर पर चिंता की वजह है, लेकिन हर H1N1 संक्रमण गंभीर नहीं होता. ज्यादातर लोग उचित देखभाल के साथ ठीक हो जाते हैं. समस्या तब होती है जब हाई-रिस्क मरीजों में संक्रमण गंभीर हो जाए या सांस से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो जाएं.

इसलिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि बुखार, खांसी और कमजोरी जैसे लक्षण को पूरी तरह नजरअंदाज न करें. और अगर सांस फूलने लगे, ऑक्सीजन गिरने लगे, सीने में दर्द हो या मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगे तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें.

दिल्ली में 1,777 मामलों तक पहुंच चुका H1N1 का आंकड़ा एक साफ चेतावनी जरूर है, लेकिन इसका जवाब पैनिक नहीं, बल्कि समय पर डायग्नोस, उचित इलाज और इंफेक्शन की रोकथाम है.

डेंगू भी बढ़ा सकता है परेशानी, लेकिन H1N1 को डेंगू न समझें

मानसून के दौरान डेंगू और H1N1 दोनों के मामले सामने आ सकते हैं और शुरुआती दौर में बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे कुछ लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं. लेकिन दोनों बीमारियों का कारण और इलाज अलग है. इसलिए सिर्फ लक्षण देखकर खुद डायग्नोसिस करने के बजाय लगातार बुखार या हालत बिगड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. इस समय दिल्ली में H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच डेंगू पर भी निगरानी रखी जा रही है, लेकिन इस खबर का मुख्य फोकस H1N1 संक्रमण और उससे जुड़ी सांस संबंधी दिक्कतों पर है.

वीडियो: सेहत: डेंगू होने पर कौन-सी गलतियां बिल्कुल नहीं करनी चाहिए, जान लीजिए

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