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कितनी देर लगेगी, खाना खाना है... जिन बेटियों पर नाज था, उन्होंने वीडियो कॉल पर कराया अंतिम संस्कार

Sonipat के वृद्धाश्रम में पूर्व कपड़ा व्यापारी शिवचरण गुप्ता का निधन हो गया. बेटियों ने उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया. उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता का अंतिम विदाई दी. वीडियो सामने आने के बाद मामला काफी चर्चा में आ गया है.

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बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया. (फोटो: इंडिया टुडे)

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  • मुंबई के शिवचरण राम रतन गुप्ता, जो सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे, 4 जुलाई को निधन हो गया और उनका अंतिम संस्कार बेटियों की गैर-हाजिरी के बावजूद किया गया।
  • शिवचरण के बीमार होने और अंतिम सांस लेने के बाद वृद्धाश्रम के प्रशासन ने उनकी बेटियों को स्थिति से अवगत कराया, लेकिन बेटियों ने मिलने या अंतिम संस्कार के लिए आने से इनकार कर दिया।
  • बेटियों ने वीडियो कॉल से अंतिम संस्कार में भाग लिया और 5,100 रुपये ऑनलाइन भेजकर अंतिम संस्कार कराया, साथ ही उनकी इच्छानुसार आंखों का दान भी किया गया।

मुंबई के रहने वाले शिवचरण राम रतन गुप्ता. अपने समय के जाने-माने कपड़ा व्यापारी. खूब कमाया. एक परिवार था. पत्नी थी. तीन बेटियां थीं. दुनिया भर के पिताओं की तरह शिवचरण ने भी कई सारे सपने देखे. अपनी बेटियों को खूब पढ़ाया-लिखाया. अच्छी तालीम दिलाई. बेटियां भी सफल हुईं. अच्छे परिवार में शादी हुई और पिता के घर की दहलीज लांघकर अपने-अपने ससुराल चली गईं. 

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जीवन में सबकुछ ठीक चल रहा था. समय का पहिया अपनी गति से घूमा. पति-पत्नी बूढ़े हुए और सोनीपत (हरियाणा) के एक वृद्धाश्रम में आकर रहने लगे. मंगलवार, 4 जुलाई को शिवचरण ने अपनी आखिरी सांस ली. बेटियों को फोन करके इसकी जानकारी दी गई. लेकिन उन्होंने सोनीपत आने से इनकार कर दिया. बेटियों ने तकनीक का फायदा उठाया और वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया. 

'कॉल आनी बंद हो गईं'

इंडिया टुडे से जुड़े पवन राठी की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवचरण राम रतन गुप्ता सोनीपत में 'समाज कल्याण शिक्षा समिति' के ओल्ड-एज होम में लगभग डेढ़ साल से रह रहे थे. वे अपनी पत्नी मीना के साथ यहां आए थे, जिनका पहले ही निधन हो चुका था. ओल्ड-एज होम के एडमिनिस्ट्रेटर आनंद कुमार ने बताया कि मौत से करीब 20 दिन पहले बेटियों को उनके पिता की बिगड़ती सेहत के बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन वे उनसे मिलने नहीं आईं. आनंद ने कहा, 

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"शिवचरण के पास एक फोन था जिससे वे अपनी बेटियों से बात करते थे. बीमार पड़ने के बाद उनकी कॉल आनी बंद हो गईं. हमने उन्हें उनकी हालत के बारे में बताया, लेकिन फिर भी वे नहीं आ सकीं."

शिवचरण की मौत के बाद मैनेजमेंट ने फिर से उनकी बेटियों से संपर्क किया और कहा कि अगर वे सोनीपत आएं तो उनके पिता का अंतिम संस्कार किया जा सकता है. लेकिन उन्होंने कहा कि उनके पास यात्रा करने का समय नहीं है. 

5,100 रुपये भेजकर कराया अंतिम संस्कार

नेपाल में रहने वाली अनीता ने ऑनलाइन 5,100 रुपये भेजे और गुजारिश की कि उनके पिता का अंतिम संस्कार ठीक से किया जाए. अनीता टीचर हैं. दाह संस्कार के बाद बेटियों ने ओल्ड-एज होम मैनेजमेंट से अंतिम संस्कार के वीडियो भेजने को कहा. उनमें से एक को कॉल पर यह कहते हुए सुना गया, 

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"इसमें और कितना समय लगेगा? हमें खाना और नहाना है."

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अस्थियां भी विसर्जित करा दीं

शिवचरण को अपनी बेटियों की कामयाबी पर बहुत गर्व था. उनकी दो बेटियां टीचर बनीं. उनकी सबसे बड़ी बेटी अनीता नेपाल में रहती हैं, निशा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती हैं, जबकि सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में रहती हैं. तीनों की शादी हो चुकी है और उनके अपने परिवार हैं. 

शुरू में परिवार ने कहा था कि उनके पिता की अस्थियां संभालकर रखी जाएं. बाद में उन्होंने ओल्ड-एज होम को बताया कि उनके पास सोनीपत आने का समय नहीं है. उन्होंने मैनेजमेंट से गुजारिश की कि अस्थियों को गंगा में विसर्जित कर दिया जाए. शिवचरण राम रतन गुप्ता की इच्छा थी कि मरने के बाद उनकी आंखें दान कर दी जाएं. उनकी इच्छा का सम्मान किया गया और उनकी आंखें दान कर दी गईं. 

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