आईआईटी-बॉम्बे (IIT-Bombay) कैंपस में शनिवार, 19 सितंबर को एक छात्र के जान देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. मृतक साहिल वाकोडे के माता-पिता ने एक प्रोफेसर पर साहिल को जान देने के लिए उकसाने और लगातार प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है. साहिल की मौत के बाद कैंपस में भी आक्रोश का माहौल है और स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं. इस बीच पैरेंट्स की शिकायत के आधार पर पुलिस ने संस्थान के एक प्रोफेसर को आरोपी बनाया है. प्रोफेसर के खिलाफ जान देने के लिए उकसाने का केस दर्ज किया गया है.
IIT बॉम्बे में छात्र की मौत ने तूल पकड़ा, प्रोफेसर पर जान देने के लिए उकसाने और SC/ST एक्ट में FIR
IIT Bombay Student Death: आईआईटी बॉम्बे में छात्र के जान देने के मामले में एक प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है. मृतक छात्र साहिल वाकोडे के माता-पिता की लिखित शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ SC/ST Act भी लगाया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, माना जा रहा है कि किसी स्टूडेंट के जान देने के मामले में पहली बार किसी प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है. मृतक स्टूडेंट साहिल वाकोडे के माता-पिता की लिखित शिकायत के बाद पवई पुलिस ने एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी हैं.
परिवार का आरोप है कि प्रोफेसर लगातार साहिल पर जातिसूचक टिप्पणियां कर प्रताड़ित करते थे. शनिवार देर रात इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच (Crime Branch) को सौंप दी गई. इस साल कैंपस में जान देने की यह तीसरी घटना है.
साहिल को शुक्रवार, 18 सितंबर को एग्जाम के दौरान मोबाइल पर चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते पकड़ा गया था. इसके बाद उसी शाम साहिल ने अपने हॉस्टल के कमरे में जान दे दी. स्टूडेंट्स का आरोप है कि कैंपस में जान देने का तीसरा मामला है, लेकिन कॉलेज प्रशासन स्टूडेंट्स के मेंटल हेल्थ को लेकर लापरवाह है. साहिल एनर्जी साइंस विभाग के द्वितीय वर्ष का छात्र था.
प्रोफेसर पर FIR दर्ज, डायरेक्टर ने आरोपों को नकारापैरेंट्स की शिकायत के बाद एनर्जी साइंस विभाग के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. परिवार का आरोप है कि प्रोफेसर ने साहिल के लिए जातिसूचक टिप्पणियों का इस्तेमाल किया था. प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ही इस परीक्षा के दौरान इंविजिलेटर (निरीक्षक) थे. वह हाल ही में संस्थान के 'डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स' भी रह चुके हैं.
एफआईआर में प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के अलावा दूसरे कुछ अधिकारियों का भी नाम दर्ज है. संस्थान के डायरेक्टर ने सभी आरोपों को नकारा है. आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने कैंपस में किसी भी तरह के जातिगत भेदभाव से इनकार किया. उन्होंने FIR पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'इस मामले में जातिगत भेदभाव का कोई सवाल ही नहीं उठता है. संस्थान में किसी भी छात्र की जाति से जुड़ी जानकारी शेयर नहीं की जाती है.'
यह भी पढ़ें: IIT बॉम्बे में परीक्षा में ChatGPT के इस्तेमाल करते पकड़ा गया, छात्र ने ली जान, स्टूडेंट्स का हंगामा
परिवार ने गिरफ्तारी तक शव लेने से किया इनकारसाहिल वाकोडे के माता-पिता और कुछ छात्रों का आरोप है कि प्रोफेसर ने सस्पेंड करने की धमकी दी थी और साहिल को कमरे से बाहर लेकर गए थे. हालांकि, इन आरोपों से संस्थान ने इनकार करते हुए कहा है कि किसी भी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी. संस्थान की ओर से कहा गया है कि छात्र को भरोसा दिया गया था कि इस घटना का असर उनके एकैडमिक करियर पर नहीं पड़ेगा.
साहिल के पिता रविंद्र एक मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी में अधिकारी के पद पर हैं. मां सोनाली सरकारी स्कूल में टीचर हैं. परिवार ने पोस्टमार्टम के 7 घंटे बाद तक शव लेने से इनकार कर दिया. परिवार की मांग थी कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही वह बेटे का शव लेंगे. रविंद्र ने कहा कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, मैं अपने बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करूंगा. साहिल उनका इकलौता बेटा था.
हालांकि, भारी हंगामे के बाद सीनियर आईपीएस अधिकारी पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी. उन्होंने निष्पक्ष जांच का भी भरोसा दिया. पुलिस ने मामला क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया है और एसीपी (ACP) स्तर के अधिकारी से जांच कराने का भरोसा दिया है. जांच के भरोसे के बाद परिवार साहिल का शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए गए.
वीडियो: आसान भाषा में: क्या इंसान AI से लड़ने की तैयारी में है?









